किसने निर्मल नरूला पर फूंके करोड़ों रुपए उसे ठेकेदार से निर्मल बाबा बनाने में?

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निर्मल बाबा नामक इस ढोंगी को इस काम में लाने वाला कौन है? अगर रिपोर्टों की ही मानें तो पता चलता है कि निर्मल ब्यापार में पूरी तरह दीवालिया हो चुका था। उसके पास इतने पैसे नहीं थे कि वो इस बाबागिरी के कारोबार को शुरू कर सके। बाबागिरी के इस कारोबार को शुरू करने के लिए करोड़ों रुपए की पूंजी लगी होगी।

इस बात की भी जांच होनी चाहिए कि यह सारी पूंजी लगाने वाला आखिर कौन है, अब यह बात तो जगजाहिर हो चूका है की निर्मल शुरू में स्टूडियो किराये पर लेकर फिल्म और टीवी कलाकारों की टीम से समागम की फिल्म बनवा कर चैनलों पर बिज्ञापन चलवाता था।

उसने अपने इस बाबागिरी के कारोबार को जमाने का जो काम किया है, इसमें करोड़ो रुपए की पूंजी आखिर किसने लगाई होगी यह जाँच का मामला है। मेरा तो मानना है कि इस पूरे प्रकरण की सीबीआई जाँच भारत सरकार को करानी चाहिए। निर्मल के पीछे जो पूंजी लगाने वाला ब्यक्ति है वो भी पकड़ में आना चाहिए।

निर्मल शुरू में एक साधारण इन्सान था उसे इस मुकाम तक लाने वाले ब्यक्ति को भी तलाश कर समाज के सामने लाना चाहिए। इस नाजायज कारोबार में निर्मल का साथ देने वाले तमाम लोग भी कसूरवार हैं। उनकी भी खोज होनी चाहिए।

निर्मल दरबार के खाते से जिन दूसरे लोगो के खाते में पैसा गया है उनको भी कानून की गिरफ्त में लेना चाहिय क्योकि यह पैसे का ट्रांसफर आयकर कानून के विरुद्ध हुआ है। भारत सरकार और आयकर बिभाग को तुरंत कार्रवाई शुरू करनी चाहिए। निर्मल दरबार और इससे जुड़े लोगो के बैंक कारोबार पर तुरंत रोक लगाने की जरूरत है।

यह पैसा देश के आम लोगो का है और इस पैसे को जब्त कर सरकारी खजाने में जमा करने की करवाई करनी चाहिए। टीवी चैनल, जिन पर निर्मल का विज्ञापन चल रहा है या चलता था, उनके विरुद्ध भी तत्काल भारत सरकार को करवाई करनी चाहिए क्योंकि ये तमाम टीवी चैनल विज्ञापन को समाचार या कार्यक्रम के प्रसारण की तरह चला रहे थे। यह भी कानून की दृष्टि से अपराध है।

-कैलाश साहू, रांची (झारखंड)

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मीडिया दरबार के मॉडरेटर 1979 से पत्रकारिता से जुड़े हैं. एक साप्ताहिक से शुरूआत के बाद अस्सी के दशक में स्वतंत्र पत्रकार बतौर खोजी पत्रकारिता में कदम रखा, हिंदी के अधिकांश राष्ट्रीय अख़बारों में हस्ताक्षर. उसी दौरान राजस्थान के अजमेर जिले के एक सशक्त राजनैतिक परिवार द्वारा एक युवती के साथ किये गए खिलवाड़ पर नवभारत टाइम्स के लिए लिखी रिपोर्ट वरिष्ठ पत्रकार श्री मिलाप चंद डंडिया की पुस्तक "मुखौटों के पीछे - असली चेहरों को उजागर करते पचास वर्ष" में भी संकलित की गयी है. कुछ समय के लिए चौथी दुनियां के मुख्य उपसंपादक रहे किन्तु नौकरी कर पाने के लक्खन न होने से तेईस दिन में ही चौथी दुनिया को अलविदा कह आये. नब्बे के दशक से पिछले दशक तक दूरदर्शन पर समसामयिक विषयों पर प्रायोजित श्रेणी में कार्यक्रम बनाते रहे. अब वैकल्पिक मीडिया पर सक्रिय.
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8 thoughts on “किसने निर्मल नरूला पर फूंके करोड़ों रुपए उसे ठेकेदार से निर्मल बाबा बनाने में?

  1. Subodh Kant Sahay is the one behind the making of so-called "Nirmal Baba". He did this so that he can prepare a competitor for Baba Ramdev and to get one Baba to support Congress in up-coming elections. Though it may turn it otherwise now..
    Let's see if media persons can dare to expose the link between Subodh Kantsahay and Nirmal baba.

  2. निर्मल बाबा को अगर जेल में भी भर दिया गया तो वहां भी अपराधियों को भागने में मदद करेगा और उनसे पैसे कम लेगा.

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