क्या अब भी निर्मल बाबा के दरबार में आपबीती सुनाते हैं मंजे हुए आर्टिस्ट?

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-आर्य मनु।।

मैं आध्यात्मिक मीडिया से जुडा हूँ और अंदर का बहुत कुछ जानते हुए भी कभी उसके बारे में नहीं लिखता. कारण,साफ़ है, मेरी दुकानदारी भी इन्ही के आशीर्वाद से चलती है. दूसरे, समाज का बहुत बड़ा तबका किसी न किसी बाबा के साथ जुड़ा है..और वो भी हद तरीके से, कि कुछ विपरीत तो सुन ही नहीं सकते.

एक आध्यात्मिक चैनल के साथ काम करते करते लगभग हर प्रमुख संत के साथ कार्यक्रम संचालन का मौका मिला. यकीन मानिये, सभी तथाकथित गुरुओं का “परदे के पीछे” अन्य रूप था. केवल और केवल मोरारी बापू को मैंने अभी तक बेदाग़ पाया.

आज इस लेख में निर्मल बाबा की बात करते है. मैं उनके बारे में कुछ उल्टा पुल्टा न लिखते हुए बस कुछ प्रश्न आपके सामने रखना चाहूँगा …

1). फिलहाल बाबा के भारत के 16 राष्ट्रीय चैनलों, और 3 विदेशी चैनलों पर विदेशों में कार्यक्रम चल रहे है. केवल आस्था पर बीस मिनट का मासिक व्यय सवा चार लाख+टेक्स है, तो अन्य राष्ट्रीय समाचार चैनलों पर कितना लगता होगा ?

2). अगर बाबा के आशीर्वाद से सब कुछ हो सकता है तो इतने चैनल्स पर आने की क्या ज़रूरत?

3). समाचार चैनल्स को विज्ञापन रूपी कार्यक्रम (पेड प्रोग्राम) के रूप मिलने से वे अपने “क्लाइंट” नहीं खोना चाहते, इस से निर्मल बाबा के खिलाफ कोई खबर नहीं चलती…. क्या ये सच है? (बताते चलें, बाबा का हर प्रमुख न्यूज़ चैनल पर सुबह प्रोग्राम आता है)

4). अपने आरंभिक दिनों में नोएडा के फिल्मसिटी में स्थित एक स्टूडियो में शूटिंग करते वक़्त बाबा के सामने जो लोग अपनी समस्या के हल होने का दावा करते थे, वे असली लोग न होकर  “जुनियर आर्टिस्ट” हुआ करते थे ?

5). आज भी ये “आर्टिस्ट” बदस्तूर जारी है..??

6). बाबा के समाधान का एक उदहारण देखिये : आपके घर में गणेश जी की मूर्ति है ? अकेली है? नहीं..तो अकेली लगाओ.. हाँ तो लक्ष्मी जी के साथ लगाओ, इस से समृद्धि आएगी… दक्षिण में है तो उत्तर में लगाओ, उत्तर में है तो दक्षिण में लगाओ… खड़े है तो बैठे हुए गणेशजी लगाओ… बैठे है तो खड़े गणेश जी लाओ… क्या आपने इस स्थिति को महसूस नहीं किया ? माने आपकी हर बात का कोई न कोई जवाब… और फिर हर जगह लक्ज़री की बात !!!

7). बाबा के किसी शहर में जाने से पूर्व वह एक टीम पहले जाकर “मार्केटिंग” का काम संभालती है. और मार्केटिंग भी ऐसी वैसी नहीं… भारी वाली ? क्यों, जबकि बाबा तो अंतर्यामी है.. आपके घर की हर चीज़ आँखे बंद करके देख सकते है ??

8). युवराज के घरवालों के आरोप तो आपको पता होंगे। नहीं पता तो इस वीडियो को देखें

क्या आप को ढोंगी निर्मल बाबा की कमाई का अन्दाज़ा है ?

अगर आपको नही पता है तो फिर आप अच्छे से जान लीजिए..

[1]. 19 विभिन्न चैनल्स, जिसमे सोनी, ज़ी, स्टार ऐसे नेटवर्क है,जिनके मिडल ईस्ट, एशिया पैसिफिक,भी शामिल कर रहा हूँ, पर दिन मे कुल 33 बार बार के प्रोग्राम चलते है. एक प्रोग्राम का औसतन खर्च चार लाख मासिक है (33 से गुना स्वयं कर लीजिए. यह राशि 1 करोड़ बत्तीस लाख रुपये मासिक बनती है.)

[2]. इस पैसे को कवर करना पड़ेगा तो रोज़ प्रोग्राम करना ज़रूरी है अखिर प्रॉफिट भी तो चाहिए ना?

[3]. बाबा के आने वाले माह अप्रैल मे कुल 17 जगह समागम है. औसतन एक जगह 2500 लोगो को एंट्री मिलती है. 2500 का 2000 प्रति व्यक्ति गुना करने पर 50 लाख की राशि सीधे सीधे टिकट से मिल जाती है. इसके बाद चढ़ावे और व्यक्तिगत मिलन की तो बात ही नही कर रहा. अब अगर 17 कार्यक्रम का 50लाख से गुना करूँगा तो…. साढ़े आठ करोड़ से उपर जाएगा. इसमे सवा – सवा करोड़ टीवी वालो को दे दिए तो भी कम से कम 7 करोड़ एक महीने के बचे. अब आप ही बताइए, इनमे से हाल बुकिंग, कर्मचारी वेतन निकालने के बाद बाबा कितना कमा रहा होगा… बाबा के दरबार मे दो साल के child का भी पूरा टिकट लगता है.

[4]. बाबा को किसी भी प्रकार से दिया जाने वाला पैसा नों रिफंडेबल और नों ट्रांस्फ़ेरेबल है. ये सारी जानकारी मैने उनकी खुद की वेबसाइट ( निर्मल बाबा डॉट कॉम ) से ली है. आप खुद चेक कर सकते है.

टी वी चैनलों की ईजाद निर्मल बाबा सिर्फ एक दिन में चार करोड़ कमा कर अपने भक्तों का तो भला करें या न करें पर टी वी चैनलों का भला जरूर कर रहें हैं…!

(26 वर्ष का युवा, झीलों के शहर उदयपुर से…फिलहाल नोएडा में स्पिरिचुअल मीडिया में कार्यरत…एमबीए करने के पश्चात मीडिया में आने का मन बनाया और साथ ही साथ समाज सेवा के लिए भी आगे बढ़ा…इंटरनेट एडिक्ट, फेनड्राय्ट, वर्ड गेमर, पार्ट टाइम एंकर और फुल टाइम “स्वामीजी”…दोस्तों की नज़रों में और शायद खुद की नज़रों में भी…बस यही मेरा परिचय है..)

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मीडिया दरबार के मॉडरेटर 1979 से पत्रकारिता से जुड़े हैं. एक साप्ताहिक से शुरूआत के बाद अस्सी के दशक में स्वतंत्र पत्रकार बतौर खोजी पत्रकारिता में कदम रखा, हिंदी के अधिकांश राष्ट्रीय अख़बारों में हस्ताक्षर. उसी दौरान राजस्थान के अजमेर जिले के एक सशक्त राजनैतिक परिवार द्वारा एक युवती के साथ किये गए खिलवाड़ पर नवभारत टाइम्स के लिए लिखी रिपोर्ट वरिष्ठ पत्रकार श्री मिलाप चंद डंडिया की पुस्तक "मुखौटों के पीछे - असली चेहरों को उजागर करते पचास वर्ष" में भी संकलित की गयी है. कुछ समय के लिए चौथी दुनियां के मुख्य उपसंपादक रहे किन्तु नौकरी कर पाने के लक्खन न होने से तेईस दिन में ही चौथी दुनिया को अलविदा कह आये. नब्बे के दशक से पिछले दशक तक दूरदर्शन पर समसामयिक विषयों पर प्रायोजित श्रेणी में कार्यक्रम बनाते रहे. अब वैकल्पिक मीडिया पर सक्रिय.
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58 thoughts on “क्या अब भी निर्मल बाबा के दरबार में आपबीती सुनाते हैं मंजे हुए आर्टिस्ट?

  1. लुटवाने का काम तो हमारी मीडिया ने ही कर दिया है ……..

    अब इसमें बाबा का क्या दोष, वो तो लुटने के लिए ही आया था…,,,

    अगर हमारे देश की मीडिया लालची और भटकी हुई नहीं होती तो आज ये दुर्दशा नहीं होती……

    इन ढोंगी मीडिया वालों को ही बाहर कर देना चाहिए..

  2. आप sabhi ka bahut bahut aabhar.
    nirmal baba aur chinmayanand bapu ke baad abhi aur kaiyon kee asliyat saamne laaunga.
    bas aap sahyog karte rahiyega.

  3. is desh ko ya to baba loot rahe hain ya neta log pata nahi hamare desh ka kya hoga
    aapne acha kiya jo inka asli chehra logon ke samne laa rahe hain.regards

  4. ज़रा इस वीडियो को गौर से देखिये! यहाँ आप को पता चल जायेगा कि कैसे यह ढोंगी बाबा अपने ही चमचों को छांट छांट कर बुलाता है… इन चमचो से पहले ही डायलोग रटाया जाता है. यह बाबा के मंझे हुए कलाकार होते हैं. फिर कार्यक्रम के वक्त यही कलाकार अपने दुखों का मार्मिक किस्से सुनते हैं और फिर यह बताते हैं कि बाबा जी कि कृपा से हमारे दुःख दूर हो गए. बाकि मूर्खों कि भीड़ इस से प्रभावित हो कर जय जय कार क…रने लगते हैं. बड़ा ही गज़ब का अभिनय होता है इस पाखंडी बाबा के दरबार में!
    मगर इस विडियो में सभी कलाकार मंझे हुए नहीं हैं. कईयों के डायलोग बोलते वक्त हंसी छूट रही है. अनाड़ी लग रहे हैं बेचारे.. अभी इन कलाकारों को रिहर्सल की ज़रूरत है.
    एक शख्स कहता है कि वह नागपुर से आया है और मेरा चौथा समागम है , इस के हाव भाव से ही पता चल रहा है कि यह अभिनय में अभी पक्का नहीं है. कहता है मुझे सीमेंट का डीलर भी आप ने बना दिया , मुझे पैसे भी बहुत दिए. इन सब लोगों के बयान लिए जाने चाहिए क्यों कि यह लोग भी इस षड्यंत्र के हिस्सेदार हैं. इन सब कलाकारों के वीडयो भी डाउन लोड कर के रखा जाए और बाद में इन पर भी जाँच की जाए!

  5. हमें सिग्नचुर काम्पैग्न शुरू करना चाहिए और सूचना और प्रसारण मंत्रालय को ज्ञापन दे कर दूरदर्शन चेन्नलों पर धर्म और ज्योत्षी कार्यक्रम पर रोक लगनी चाहिए जिस से लोग इन के झांसे में न आयें और अपना पैसा व्यर्थ न करें

  6. Ramen Kumar Giri jo harkat Nirmal Bba kar rahe hain usse dharm bhrata hota hai aur ye compain dharm ko bachane mein hai

  7. Bijendra Kumar जिस देश में किसी हिजड़े को राजा बना कर तख़्त पर बिठा दिया जाये तो कैसे जनता के दिलों में सुरक्षा की भावना आ सकती है ?

  8. मीडिया वेश्या बन चुकी है. पैसे की खातिर अपने इज्ज़त को बेच चुकी है. अब इस रंडी (मीडिया) से और क्या उम्मीद की जा सकती है ?

  9. बाबागिरी के इस धंधे ने माफिया का रूप धारण कर लिया है. इस का ताज़ा example मीडिया के दोगली नीति को देख कर पता चलता है. जिस मीडिया को जनता सच्चाई की आवाज़ समझ कर विश्वास करते आ रहे हैं वाही आज झूठ का प्रचार करने वाला भोंपू बन गया है. वक्त पर इस केंसर का इलाज नहीं किया गया तो आने वाली पीढ़ियों को बहुत कष्ट भुगतना पड़ेगा !! ,

  10. हम बाबा को बुरा भला बोलना सा कोई फैयदा नहीं हा आखिर या पड़ा कसा हुआ सवाल या हा आखिर हमारा देश की मीडिया का कोई दायित्व हा की नहीं हम जो परोसगी हम उस देखंगा आखिर कब तक SARKAR को कदा कदम उठाना पदंगा

  11. he has got enough funds to telecast his prog continously.y ramden n team anna is not pointing fingers on him

  12. मुझे तो हैरत इस बात से होती है कि अभी तक इस देश में अन्धविश्वास व अवैज्ञानिक बातों के सहारे लोगों को ठगनेवालों को खुलेआम टी वी चैनल के माध्यम से लूटने की छूट मिली हुई है और इस देश का कानून असहाय होकर यह सब होता देख रहा है! टी वी चैनलों का तो यह हाल है कि जब भी ऑन करो, किसी लाल किताब, जंतर मंतर , टोना -टोटका, धन वर्षा, नज़र सुरक्षा कवच जैसी अवैज्ञानिक बातों को बढ़ावा देनेवाले चीजों की दुकानें ही ज्यदा वक़्त खुली नज़र आती हैं! पता नहीं पोंगापंथी के सहारे अपनी दुकानदारी चलनेवालों के खिलाफ इस देश में कभी कोई सख्त क़ानून लागू हो पायेगा या नहीं! या, जब बाकी दुनिया चाँद पर बसने की तयारी कर रहा होगा तब भी हमारा देश किसी लाल किताब, शुभ धन लक्ष्मी यन्त्र आदि के बूते ही तरक्की कि तयारी कर रहा होगा! हमसभी को मिलकर सोचने व कुछ करने क़ी जरुरत है ताकि हम जग हस्साई से बच सकें! कही ऐसा न हो कि हम निर्मल बाबा जैसे ठगों व पाखंडियों क़ी उलूल जुलूल (मूर्खतापूर्ण व हास्यास्पद) बातों में ही अपनी समस्याओं में के हल ढूँढते रहे और दुनिया हमारी बेवकूफी पर हंस हंसकर लोटपोट होती रहे!

  13. Sidharth Anand बिलकुल ठीक कहा आपने! मैं तो कहता हूँ इस साले पाखंडी की तीसरी आँख हो न हो, तीसरी गाँ………. जरूर होगी!

  14. nirmal kahaan se hei, iski to aankhein hi iski pol khol deti he. the frenzie that is created in the name of religion , not only in India, worldwide is asnoshing. this trend some day will lend every one in trouble.

  15. baba agar aise hi kamai karni hai to us kamai ka sahi upyog karna sikhiye. jaiye kirpa hogi…………

    baba garibi ko khatam kariye jaiye. kirpa hogi.

    baba desh ka bhala kariye. jaiyye kirpa hogi.

    baba garibo ka hokar dekhiye. bimaro ki bimari dur kariye bahut kirpa hogi.

    Budhapa sahi se kat jayega nahi to us upar wale ki lathi me aawaj nahi hoti.

  16. मॆ भी सिफ़ इतना हि कहुगा.यह निर्मल नरूला एक छटा हुआ ठग बाजारवाद ने मध्यम वर्ग में जो डर और असुरक्षा पैदा की है..वैसे ये बाबा सरे ही मतलबी और ढोंगी है लेकिन थोड़े से पैसो के लालच में इनकी कोई पोल नहीं खोलना चाहता है.ये और इनके जैसे कई बाबाओं की लाइफ बन गई.कुछ बाबा तो फैशन डिजाइनर और ब्यूटी पार्लर से बन ठन कर आते हैं.आजकल चैनल्स पर प्रवचन देने का धंधा ज्यादा फायदे का सौदा है. हमारी अंधी आस्था गीता के मर्म…कर्म ही धर्म भूल चुकी है. लानत है पढ़े लिखे बेवकूफों पर जो ऐसे बाबाओं की नौटंकी का हिस्सा बनते है.एक ओर इस देश का मजदूर औरकिसान दिनभर मेहनत कर पसीना बहाकरभी भूखा सोता है वहीं कुछ लोग जिनके पेट जरूरत से ज्यादा भर गए हैं. वे लाखों रुपये बाबाओं से सवाल पूछने में बर्बाद कर देते हैं.आप की बाबा विरोधी मुहीम अतिउत्तम है बशर्ते ढोंगी बाबाओ का सूपड़ा साफ होने तक चलती रहे ..जागो भारत जागो!

  17. सिर्फ निर्मल बाबा ही नही तमाम और भी बाबा धर्म के नामपर दुकानें चला रहे है. हैरानी होती है कि लोग ऐसे लोगों के जाल में फंस कैसे जाते हैं. जो टिकेट लगा कर लोगों के दुख दूर करने, भगवान की कृपा दिलाने या जीने की कला सिखाने की बात करे वो कैसा धर्म गुरु, कैसा महात्मा,कैसा स्वामी? ये सारे के सारे ठग ही हो सकते हैं. ऐसे में उनके द्वारा ठगे जाने वाले ऑख के अंधे भी कम दोसी नहीं हैं.

  18. देश को चाट पोंछ कर खा गए फकीरा फिर भी कहते है ऊंट के मुह में जीरा……आस्था या चुतीया पंती……

  19. aaj baba aur netaon ne desh ko nanga karke rakh diya hai ,angrejon jitna nahi loota us se jada aaj ke baba aur netaon ne loota hai ,inhe to road pe nanga karke maarna chahiye
    j

  20. यह निर्मल नरूला एक छटा हुआ ठग है. यह फ्री में तुम्हे कृपा क्या खाक करेगा . ??
    अगर तुम्हारे पास दो हज़ार रूपए नहीं है रो यह तुम्हे पास फटकने भी नहीं देगा . बेवकूफों जाग जाओ !! यह लोगों को उल्लू बना कर अपनी झोली भर रहा है. इस के चमचों ने ही इसे 1.7 करोड़ का चूना लगाया तब इसे पुलिस और अदालत की शरण में जाना पड़ा. उस वक्त कहाँ गयी इस की तीसरी आँख ??? हा हा हा हा .. साला ढोंगी कहीं का …

  21. its true sir ye aisa sach hai jo andh bhakto ke gale nhi utarta maine bhi hakikat janne ke liye try kiya online sawaal puch msg aa gaya 2000 deposit kare ek vyakti ke liye jo paisa le vo bhagwaan kaisa 2000 me kai log pura mahina ghar chalate hai par kise koun samjhaye

  22. बाजारवाद ने मध्यम वर्ग में जो डर और असुरक्षा पैदा की है…ये और इनके जैसे कई बाबाओं की लाइफ बन गई.कुछ बाबा तो फैशन डिजाइनर और ब्यूटी पार्लर से बन ठन कर आते हैं.आजकल चैनल्स पर प्रवचन देने का धंधा ज्यादा फायदे का सौदा है. हमारी अंधी आस्था गीता के मर्म…कर्म ही धर्म भूल चुकी है. लानत है पढ़े लिखे बेवकूफों पर जो ऐसे बाबाओं की नौटंकी का हिस्सा बनते है.एक ओर इस देश का मजदूर औरकिसान दिनभर मेहनत कर पसीना बहाकरभी भूखा सोता है वहीं कुछ लोग जिनके पेट जरूरत से ज्यादा भर गए हैं. वे लाखों रुपये बाबाओं से सवाल पूछने में बर्बाद कर देते हैं…जागो भारत जागो!

  23. सबसे पहले चैनल वालों को और उसके बाद घर की महिलाओं को सचेत होना होगा. टी आर पी का बहाना बनाकर चैनल खुद यह कार्यक्रम बंद नहीं करेगा. जिस दिन दो ऐसे चैनल जिन्हें बाबा का स्पोंसर्ड और एडिटेड कार्यक्रम नहीं मिल रहा है, वे अगर हवा बिगाड़ने में लग गए तो बाबा की भी सारी शक्ति भाग जायेगी. वैसे इस फर्जी बाबा का भंडाफोड़ आज नहीं तो कल ज़रूर होगा. भगवान अपने साथ खेलने वालों को बर्दाश्त नहीं करते.

  24. what the hell is this::::::::::
    TUMNE KABHI CHUSKI KHAI HAI…
    NAHI KHAI TO KHAO SAB THIK HO JAYEGA…

  25. हाँ सही कहा आपने गरीब और मजदूर लोगो की कमाई ये बाबा इसी तरह बर्बाद कर रहे हैं और बेचारे गरीब और मध्यवर्गीय लोग इस चाह में अपनी कमाई उनपर खर्च कर रहे हैं

  26. ढोंगी बाबा लोग जोंक की तरह होते हैं जो खून चूस चूस कर इतने मोटे हो जाते है कि बाद में सम्पूर्ण समाज के लिए खतरा बन जाते हैं. हम खुद इन्हें पोषित करते हैं. जब तक इन को पोषण मिलता रहेगा यह बैखौफ हो कर खून चूसते रहेंगे !!!

  27. इस साजिश में देश की सरकार और सम्पूर्ण मीडिया तंत्र भी पूरी तरह ज़िम्मेदार है. जहाँ तक जनता की बात है, वो तो एक अबोध बालक की तरह है जिस को तमाम टीवी चैनल भला फुसला कर दलदल में धकेल रहे हैं. इस साजिश की सब से ज्यादा शिकार वो गृहणियां होती है जो बेचारे दिन भर घर पर टीवी देखते रहते हैं. अबोध बच्चों पर भी इस का दुष्परिनाम पड़ता है.

  28. sahi farmaya Mishra ji aap ne. mujhe bhi yh dhongi footi aankh nahi suhata.
    mgar hamare desh ki andhi public ko roshni kaun de ??
    itne babe aaye, itne karnaame kiye , itne sare kaand huye , lekin fir bhi desh ki murkh public ko alk hi nahi !! khuda khair kare !!

  29. Arun sir,nirmal baba me buraiya ho sakati kai,lekin aap sabhi budhijiwi log jis dhang se unke khilaf akjutata ka pradarshan kar rahe hai usase dharm kamjor padata hai.sathi jee main aasha karta hu ki aap meri bhawnao ko samajh sake ho..

  30. आप की बाबा विरोधी मुहीम अतिउत्तम है बशर्ते ढोंगी बाबाओ का सूपड़ा साफ होने तक चलती रहे I क्यों की देखने में ये आया है की आज के ये बाबा ईश्वर की जगह अपने दरबारों में स्वयं की पूजा करते हैं I जो धर्म विरुध्ध है I आप चाहे जिस भी कलयुगी संत को लेलें अपने प्रवचन स्थल या दरबार में किसी भी देवता की आरती नहीं कराता जबकि उसी के नाम को माध्यम बनाकर लाखों की कमाई कररहे होते हैं I आप अक्षर धाम मंदिर को ही ले लें वहां पर दिखावे के तौर पर सभी भगवानों की मूर्तियाँ हैं परन्तु आरती के समय मंदिर के बीच में स्थित स्वामीनारायण की मूर्ति की ही आरती होती है यह कहाँ तक धर्म सांगत है I

  31. वैसे ये बाबा सरे ही मतलबी और ढोंगी है लेकिन थोड़े से पैसो के लालच में इनकी कोई पोल नहीं खोलना चाहता है

  32. हाँ आपने ठीक कहा निर्मल बाबा ठुग है परन्तु भोली भली जनता को लूटना ही इनका काम है.ऐसे और भी ऐसे बाबा भोली भली जनता को MURKAH BANAANA.

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