निर्मल बाबा, मीडिया और बाज़ार, तीनों ही हैं इस लूट के ज़िम्मेदार : मुकेश कुमार

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बाबाओं के पास अथाह पैसा है और न्यूज़ चैनल बिकने के लिए तैयार बैठे हैं, इसलिए उनका काम बहुत आसान हो जाता है। जब एक साथ कई चैनलों में बाबा दिखने लगते हैं तो एक किस्म का मास हिस्टीरिया पैदा होने लगता है और पूरे समाज को अपनी गिरफ्त में ले लेता है। वही हो रहा है। ध्यान रहे चैनल इन पेड प्रोग्राम पर विज्ञापन भी नहीं लिख रहे हैं।”

 

 

ये बहुत दुखद है कि एक ओर जहाँ कोशिशें हो रही हैं कि न्यूज़ चैनलों के कंटेंट को कैसे ज़्यादा से ज़्यादा विश्वसनीय बनाया जाए और पत्रकारिता के उच्चतर मानदंडों से उसे जोड़ा जाए वहीं थर्ड आई ऑफ निर्मल बाबा जैसे पेड प्रोग्राम ने प्रदूषण को एकदम से बढ़ा दिया है। ये उन लोगों के लिए निश्चय ही चिंता का विषय होना चाहिए जो मानते हैं कि न्यूज़ चैनलों का काम केवल धंधेबाज़ी नहीं है बल्कि एक सामाजिक ज़िम्मेदारी से भी वो बँधे हुए है। उन्हें इस बात का खयाल तो रखना ही होगा कि वे जो कुछ दिखा रहे हैं उसका समाज और देश पर क्या प्रभाव पड़ेगा। अगर वे ऐसा नहीं करते तो पत्रकारिता को कलंकित कर रहे हैं।

ये कोई नई प्रवृत्ति नहीं है। हर दो-चार साल में कोई न कोई बाबा अवतरित होता है और इसी तरह लोगों को गुमराह करता हुआ लोकप्रियता और धन बटोरता है। मीडिया इसके लिए एक बहुत ही आसान उपकरण बनकर रह गया है। इन बाबाओं के पास अथाह पैसा है और न्यूज़ चैनल बिकने के लिए तैयार बैठे हैं, इसलिए उनका काम बहुत आसान हो जाता है। जब एक साथ कई चैनलों में बाबा दिखने लगते हैं तो एक किस्म का मास हिस्टीरिया पैदा होने लगता है और पूरे समाज को अपनी गिरफ्त में ले लेता है। वही हो रहा है। ध्यान रहे चैनल इन पेड प्रोग्राम पर विज्ञापन भी नहीं लिख रहे हैं।

अब आलम ये हो गया है कि देश भर के न्यूज़ चैनलों में सर्वाधिक दस लोकप्रिय कार्यक्रमों में से छह निर्मल बाबा के हैं और उनका न्यूज़ से कोई लेना देना नहीं है। कई चैनलों की टीआरपी निर्मल बाबा की कृपा से उछाल पर है। न्यूज़ का कंटेंट तीसरे दर्ज़े का है मगर उनके पास निर्मल बाबा हैं और बस वही हैं। अगर निर्मल बाबा की टीआरपी को हटाकर देखें तो शायद वे कंगाल हो जाएंगे। हाँ, नुकसान हो रहा है तो उनका जो खुद को न्यूज़ चैनल बनाए रखने की जद्दोजहद में लगे हुए हैं।

निर्मल बाबा के कार्यक्रमों से टीआरपी और धन कमाने वाले चैनलों पर कुछ कहने से पहले इस पर विचार करना ज़रूरी है कि निर्मल बाबा क्या हैं और अपने कार्यक्रमों के ज़रिए किसका भला या बुरा कर रहे हैं। ऐसा इसलिए कि जो चैनल इस पेड कार्यक्रम के ज़रिए लाभ कमा रहे हैं उन्होंने ज़रूर अपने फैसले के पक्ष में तर्क तैयार कर रखे होंगे। उनका पहला तर्क तो हमेशा की तरह यही होगा कि ये आस्था का मामला है, इसमें अंध विश्वास जैसा कुछ नहीं है। यानी आस्था की आड़ लेकर वे जिस तरह अंध विश्वास के दूसरे कार्यक्रम चला रहे हैं वैसे ही निर्मल बाबा को दिखाना भी उनकी नज़र में सही है।

उनका दूसरा तर्क दर्शकों की पसंद का होगा। इसके मुताबिक अगर दर्शक देखना चाहते हैं तो हम क्यों न दिखाएं। ये एक तरह की ढिठाई है, मगर बहुत सारे संपादकों ने दर्शकों की पसंद को भी अपनी ढाल बना रखा है। उनका तीसरा तर्क होगा कि जब दूसरे चैनल इस तरह का कंटेंट दिखाकर दर्शकों का हरण करने लगते हैं तो हमें अपने बचाव में इसी तरह के उपाय करने पड़ते हैं। यानी अगर सब प्रतिज्ञा कर लें कि वे घटिया चीज़ें नहीं दिखाएंगे तो हम भी नहीं दिखाएंगे। उनका अंतिम तर्क यही है कि उन्हें भी सरवाइव करना है। अगर रेवेन्यू और टीआरपी साथ-साथ मिलती है तो हमें बाज़ार के दबाव में इसे स्वीकार करना ही पड़ता है और हम यही कर रहे हैं। अगर हम ये नहीं करेंगे तो चैनल चलेगा कैसे( जैसे चैनल चलाकर वे देश पर एहसान कर रहे हों)।

अब अगर इन दलीलों को रोशनी में आपने निर्मल बाबा के कार्यक्रमों को देखने की कोशिश की तो भ्रम में पड़ जाएंगे कि क्या कहें, किसे दोष दें। बाबा को, मीडिया को या बाज़ार को या फिर तीनों सामूहिक रूप से ज़िम्मेदार हैं। बाबा खुले आम धोखाधड़ी कर रहे हैं मगर उन्हें रोकने वाला कोई नहीं है, न प्रशासन, न पुलिस न कानून। कुछ चैनल मौके को भुनाने में लगे हुए हैं और बाज़ार तो खैर ऐसा करने के लिए उन पर दबाव भी बना रहा है और उन्हें प्रेरित भी कर रहा है। सबकी आपस में साठ गाँठ है और इसके विरूद्ध आवाज़ चाहे जितनी उठाई जाए होता कुछ नहीं। पिछले एक दशक में चैनलों को विभिन्न मंचों पर जितना कोसा गया है उसके बाद तो उनका विवेक जाग ही जाना चाहिए था और चैनलों को सुधर ही जाना चाहिए था मगर ऐसा हुआ नहीं है।

इसका मतलब है कि बीमारी गंभीर है और इलाज कठिन होगा और लंबा भी चलेगा। ये भी तय है कि इसे आत्मनियमन और संपादकों के विवेक भर पर नहीं छोड़ा जा सकता, क्योंकि ये दोनों ही चीज़ें लगभग काम नहीं कर रही हैं। ऐसे में जो लोग निर्मल बाबा के विरोध में लामबंद हो रहे हैं उन्हें लंबी लड़ाई के लिए तैयार रहना चाहिए।

(मुकेश कुमार जाने-माने पत्रकार हैं और न्यूज़ एक्सप्रेस चैनल के एडीटर इन चीफ व सीईओ हैं।)

 

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मीडिया दरबार के मॉडरेटर 1979 से पत्रकारिता से जुड़े हैं. एक साप्ताहिक से शुरूआत के बाद अस्सी के दशक में स्वतंत्र पत्रकार बतौर खोजी पत्रकारिता में कदम रखा, हिंदी के अधिकांश राष्ट्रीय अख़बारों में हस्ताक्षर. उसी दौरान राजस्थान के अजमेर जिले के एक सशक्त राजनैतिक परिवार द्वारा एक युवती के साथ किये गए खिलवाड़ पर नवभारत टाइम्स के लिए लिखी रिपोर्ट वरिष्ठ पत्रकार श्री मिलाप चंद डंडिया की पुस्तक "मुखौटों के पीछे - असली चेहरों को उजागर करते पचास वर्ष" में भी संकलित की गयी है. कुछ समय के लिए चौथी दुनियां के मुख्य उपसंपादक रहे किन्तु नौकरी कर पाने के लक्खन न होने से तेईस दिन में ही चौथी दुनिया को अलविदा कह आये. नब्बे के दशक से पिछले दशक तक दूरदर्शन पर समसामयिक विषयों पर प्रायोजित श्रेणी में कार्यक्रम बनाते रहे. अब वैकल्पिक मीडिया पर सक्रिय.
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34 thoughts on “निर्मल बाबा, मीडिया और बाज़ार, तीनों ही हैं इस लूट के ज़िम्मेदार : मुकेश कुमार

  1. mukesh जी आपका और आपके टीम मेम्बेर्स का बहुत बहुत धन्यवाद
    समाज के कुछ अमीर सुकडी मानसिकता के लोग इस जैसे बाबाओं को भगबान और इस देश को बर्बाद करना चाहते हैं इसीलिये हमारा देश पिछड़ रहा hai

  2. Mukesh जी आपके प्रयाश के लिए आपका धन्यवाद
    भारत की मीडिया पंगु विचारधारा की रुधिबदी मंशिकता की है
    मीडिया सरकार बाबा आदि इस देश को सदियों पीछे धकेल रहे hain

  3. मै आपके काम को अच्छा मानता हूँ !!!!

    मगर निर्मल बाबा क पक्ष मै भी कुछ कहना चाहता हूँ की निर्मल बाबा कोई इतनी बड़ी हस्ती नहीं की लोग उनको जानते हो या उनका अनुसरण करते हो ये तभी हो सकता है जब उनकी कोई कृपया लोगों पर बरसी हो ……..

    कुछ न कुछ तो है ………

    सच्चाई सबके सामने आनी चाहिए…….

  4. निर्मल बाबा तो बहाना है: पिछले लगभग पॉच छह वर्षों से पूरे भारत में अंधविश्वास फैला कर लोगों को लूट रहे निर्मल नरूला उर्फ निर्मल बाबा सरेआम अधिकॉश न्यूज चैनलों और अन्य मनोरंजक चैनलों पर रोज आकर अपनी ठगी का धंधा चला रहा था और उसके इस ठगी और लूट के धंधे में ये टीवी चैनल बाराबर के हिस्सेदार बने हुऐ थे तथा चुपचाप माल बटोर रहे थे लेकिन अचानक क्या हुआ कि ये सारे के सारे चैनल जो उसका नमक खा रहे थे अचानक नमक हरामी पर उतर आऐ है यह बड़ा रहस्य है????
    दरअसल यह सब अचानक नहीं हुआ है इसके पीछे बड़ा गहरा षड़यंत्र प्रतीत हो रहा है क्योंकि तीन जून से बाबा रामदेव का भारत स्वाभिमान के तहत कालेधन और भ्रष्टाचार के मुद्दे पर व्यवस्था परिवर्तन का महाऑदोलन प्रारंभ हो रहा है जिससे सरकार के हाथ पॉव अभी से फूल रहे है क्योंकि सरकार के पास उनकी मॉगों/मुद्दों का कोई भी काट नहीं है इसलिये सरकार न्यूज चैनलों के माध्यम से निर्मल बाबा को शिकार करने के बहाने बाबाओं के बदनाम कर तथा बाबा रामदेव पर निशाना लगाने का बहाना ढॅूढ रही है जिससे उनको और उनके व्यवस्था परिवर्तन की महाक्रॉति को बदनाम किया जा सके। आजकल सरकार के षड़यंत्र की प्रथम कड़ी में टीवी पर बहस में बैठे तथाकथित बुद्धिजीवी (परजीवी) अपनी बहस में बाबा रामदेव का नाम भी इस निर्मल बाबा के साथ शामिल करने की कोशिश करते देखे जा रहे है तथा तीन जून से आते आते ये सरकार देश में ऐसा वातावरण तैयार करना चाहती है जिससे बाबा रामदेव को बदनाम कर उनके ऑदोलन को दबाया जा सके। इसीलिये भॉड न्यूज चैनल और बिकी हुई मीडिया अभी से इस कोशिश में लग गयी है। लेकिन देश की जनता जाग चुकी है तथा हमें इन षड़यंत्रों की तरफ सबका ध्यान खींचते हुऐ महाक्रॉति के पक्ष में वातावरण बनाना होगा।

  5. बिना मेहनत किये ये परजीवी बाबा आज तक समाज में जिन्दा हैं? बुद्ध, महावीर, तुलसी, कबीर को न तो प्रेस की जरूरत थी न ही प्रवचनों की? उन्हें दलालों की फ़ौज खडी करने की जरूरत ही कहाँ थी? कबीर ने जीवन भर कपडा बुन कर अपनी साधना पूरी की… बिना श्रम की एक रोटी भी उन्हें नहीं चाहिए थी.
    निर्मल बाबा बेशर्मी से बकवास करते रहते हैं… दो हजार देकर आशीर्वाद पाने वाले कोई मनरेगा और बीपीएल वाले नहीं हैं… ये सब पढ़े लिखे बेवकूफ लोग हैं जो इन बाबाओं को बाज़ार प्रदान कर रहे हैं…

    निर्मल दरबार एक पूरी व्यवस्था का नाम है… निर्मल बाबा से घर माँगने पर बंगला दे देते हैं… मनमोहन सिंह को इस दरबार में अवश्य जाना चाहिए, इंदिरा आवास योजना का संकट ही ख़त्म हो जायेगा… रेल मंत्री और वित्त मंत्री को इस दरबार में जरूर जाना चाहिए, एक मिनट में देश की समस्या छू मंतर हो जायेगी? निर्मल बाबा देश को जाहिलों और बेवकूफों का देश समझ कर अपना भाग्य बाज़ार फैलाये हुए हैं…एक तो चोरी, उस पर सीनाजोरी? अपनी बेवकूफी को प्रसारित और प्रचारित करना हास्यस्पद है.

    'राष्ट्र सर्वप्रथम सर्वोपरि'.
    वन्दे मातरम्…

  6. इ ऍम फ्रॉम मुंबई एंड इ ऍम तेल्लिंग यू अगेन , जिस दिन ये साला एयर पोर्ट , या कहीं रस्ते मेंह मिल गया साले को रोड पर मरूँगा एंड इ मीन आईटी ,
    साला पूरी दुनियान को पागल बना रहा है,
    जनता हैं हुमर्रे देश मैं , पहाड़, नदी, पेड़ , बुज़ुर्ग पूजे जाते हैं और सब बहोत जल्दी बेवकूफ बन जाते हैं
    इसी चीज़ का फायदा उठा रहा हैं साला चोर हलवाई की शक्ल वाला बूढ़ा……..

  7. टीवी सीरियल मे काम कर चुकी जूनियर आर्टिस्ट निधि बाबा के बारे में कुछ बता रही है ……

    अपने आरंभिक दिनों में ठगी का धंधा चमकाने के लिए ठग निर्मल नोएडा के फिल्मसिटी में स्थित एक स्टूडियो में शूटिंग करते वक़्त बाबा के सामने जो लोग अपनी समस्या के हल होने का दावा करते थे, वे असली लोग न होकर “जुनियर आर्टिस्ट” हुआ करते थे ?

    सुबूत ये रहा ये कई टीवी सीरियल मे काम कर चुकी जूनियर आर्टिस्ट निधि है जिसे 10 हज़ार रूपये बाबा देता था .. ये बाबा की पोल खोलते हुए आगे कहती है कि शुरू के दो महीने तक निर्मल बाबा ने अपने ही आदमियों और जूनियर आर्टिस्टो से ही प्रश्न पुछ्वता था……
    ये है निर्मल बाबा का सच
    “निर्मल सिंह नरूला” उर्फ “निर्मल बाबा” टीवी पर लगभग सभी चेनलों पर आने वाला एक ठग है…..जो पैसे के बदले कृपा बाँटने का ढोंग करता है…..!!
    अब कुछ जानकारी बाबा के बारे में…..जो शायद आपको मालूम न हो…..!!
    => इस ढोंगी बाबा का ससुराल झारखंड में है और ये दस वर्ष से अधिक समय तक वहाँ गुजार चुका हैं।
    => ये झारखंड के सांसद इंदर सिंह नामधारी का साला हैं।
    => ढोंगी बाबा विवाह के बाद करीब 1974-75 के दौरान झारखंड में आया था और लाईम स्टोन का व्यवसाय शुरू किया। मगर उसमें सफल नहीं हुआ . इसके बाद गढ़वा में कपड़े का व्यवसाय शुरू किया, लेकिन वहां भी सफल नहीं हो सका .
    => एक वक्त ऐसा भी था कि ये निर्मल बाबा काफी परेशानियों से जूझ रहा था . तब बिहार में मंत्री रहे “इंदर सिंह नामधारी” ने माइनिंग का एक बड़ा काम इसे दिलवाया था। तब यह ठेकेदारी का काम करता था. उसी कार्य के दौरान इस पाखंडी बाबा को ‘ज्ञान’ की प्राप्ति हुई, इसके रिश्तेदारों ने ऐसी अफवाह फैलाई .
    => 1984 के दंगे के दौराज जब ये रांची में था, तो किसी तरह से ये अपनी जान बचाकर वहाँ से भागा था .
    => गोमो में निर्मल नरूला का साढ़ू भाई सरदार नरेन्द्र सिंह नारंग हैं। इनका विवाह भी दिलीप सिंह बग्गा की बड़ी बेटी के साथ हुआ था.
    जाहिर है इस ढोंगी ने अपने राजनैतिक रिश्तों के चलते ही सभी विद्रोहियों को बढ़ने का मौका नहीं दिया……
    टीवी पर अपना ढोंग दिखा-दिखा कर लोगों को अपने भगवान होने का अहसास करवाने वाले बाबा का खुद का अरबो रुपयो का काला धन है जिसका भांडा जल्द फूटने वाला है
    द्वारा: फेसबुक चौपाल

  8. बहुत खुब लिखा अपने सर, पर इलाज बहुत जरुरी है, मै भी इस बाबा पर कुछ लिखा था. मूझे भी फोन आने लगे कि 5स्टार बाबा के बारे मत लीखो. पर मै हार नही माना… निर्मल बाबा लाइव शो…..

    आदमी :; बाबा मेरे फसबूक पे लिक्स और कमेंट्स नहीं आते?
    निर्मल बाबा :; फेसबुक आखरी बार कब खोला था?

    आदमी ; बाबा कल…..
    निर्मल बाबा :: फेसबुक दिन में कितने बार खोलते हो?

    आदमी : बाबा , दिन में 2-4 बार….
    निर्मल बाबा : ब्राउजर कौन सा इस्तिमाल करते हो?

    आदमी : बाबा गूगल क्रोम….
    निर्मल बाबा : बस यही पे किरपा रुकी हुयी है , जाओ पास्वोर्ड बदल कर अपना अकाउंट को मोज़िला ब्राउजर पे ओपन करो.., कृपा आनी लगेगी..

  9. मुकेश जी ने बड़े साहस से सच को स्वीकारा जबकि वे खुद एक चैनल के एडीटर इन चीफ व सीईओ हैं… बेहद सराहनीय और प्रशंसनीय है उनका ये साहस…..बाकी उन तमाम चैनल के एडीटर इन चीफ व सीईओ की आत्मा क्या अंधी और बहरी हो चुकी है….आज मीडिया से जुड़े लोगों को सामाजिक रूप से कई जगह अपमान सहना होता है इन्ही अंधे-बहरे चैनलों के मालिकों की वजह से जो देश में पाखंडियों के जरिए सिर्फ अपनी तिजोरी भर रहे हैं और पाप के भागीदार बन रहे हैं….बड़े शर्म की बात है

  10. पप्पू – “बाबा, मुझे रास्ता दिखाएँ
    मेरी शादी नहीं हो रही, बहुत चिंतित हूँ!”
    निर्…मल बाबा – बेटा आप करते क्या हो??
    पप्पू – आप बताये शादी के लिए कौन सा काम उचित रहेगा??
    निर्मल बाबा – तुम मिठाई की दूकान खोल लो!
    पप्पू – बाबा वोह खोली हुई है, मेरे पिता की वोह दूकान है!
    निर्मल बाबा – शनिवार के दिन दूकान 9 बजे तक खोला करो!
    पप्पू – शनी मंदिर के पास ही मेरी दूकान है जिस वजह से मैं देर रात तक दूकान खोला रहता हूँ!
    निर्मल बाबा – काले रंग के कुत्ते को मिठाई खिलाया करो!
    पप्पू – मेरे घर में काले रंग का ही कुत्ता है जिसे मैं सुबह शाम मिठाई ही मिठाई खिलाता हूँ!
    निर्मल बाबा – सोमवार को शिव मंदिर जाया करो!
    पप्पू – मैं केवल सोमवार नहीं, हर दिन शिव मंदिर जाता हूँ!
    निर्मल बाबा – भाई-बहन कितने है???
    पप्पू – बाबा, आपके हिसाब से शादी के लिए कितने भाई बहन होने चाहिए!
    निर्मल बाबा – दो भाई और एक बहन!
    पप्पू – बाबा मेरे सच में दो भाई और एक बहन है!
    निर्मल बाबा – दान किया करो!
    पप्पू – बाबा मैंने अनाथ-आश्रम खोल रखा है और उचित दान करता रहता हूँ!
    निर्मल बाबा – बद्रीनाथ कितनी बात गए हो?
    पप्पू – बाबा, आपके हिसाब के शादी के लिए कितनी बार बद्रीनाथ जाना चाहिए???
    निर्मल बाबा – कम से कम २ बार!
    पप्पू – मैं भी दो बार ही गया हूँ!
    निर्मल बाबा – अच्छा, नीले रंग की शर्ट जाएदा पहना करो!
    पप्पू – बाबा, पिछले चार साल से मैं नीले रंग की शर्ट पहन रहा हूँ कल ही धोले के लिए उतारी थी आज सूखते ही दुबारा पहन लूँगा, और कोई उपाए??
    निर्मल बाबा – माँ-बाप की सेवा करते हूँ!
    पप्पू – माँ बाप की इतनी सेवा की कि दोनों सीधे स्वर्ग चले गए!!
    बाबा एक सवाल पुछु??
    निर्मल बाबा – हाँ, जरुर???
    पप्पू – बाबा, जरा ध्यान से देखिएगा कि मेरे माथे में C लिखा हुया है???
    निर्मल बाबा – नहीं!
    पप्पू – तोह बाबा, हो सकता है कि या तोह आपके पास समय जाएदा है
    जो बैठ के लगे मूर्ख बनाने या तोह इन बैठे हुए सभी लोगो के पास पैसा जाएदा है
    जो 3-3 हजार का टिकट लेके मूर्ख बनने यहाँ आ गए??
    वैसे एक बात और कह देता हूँ बाबा!
    निर्मल बाबा- हाँ क्या??
    पप्पू – मैं पहले से शादी शुदा हूँ और दो बच्चो का बाप भी! वोह तोह यहाँ से
    गुजर रहा था तो सोचा की आपसे थोडा टाइम पास करता चलूँ …..!!

  11. संसार की समस्त समस्याओं का एकमात्र समाधान – "विद्यातत्त्वम् पद्धति".
    ===========================================
    शिक्षा-दीक्षा तभी पूर्ण-सम्पूर्ण मानी जायेगी जबकि क्रमश: घर-परिवार-सम्पदा से युक्त संसार की;इन्द्रियों और उसके क्रियाओं-भोगों से युक्त शरीर की; अस्तित्व और क्रिया-उपलब्धियों से युक्त जीव-रूह-सेल्फ की; अस्तित्व और क्रिया-उपलब्धियों से युक्त आत्मा-ईश्वर-ब्रम्ह-नूर-सोल-ज्योतिर्बिन्दु रूप शिव की और मुक्ति-अमरता सहित सम्पूर्ण की सम्पूर्णतया उपलब्धि कराने वाला परमात्मा-परमेश्वर- परमब्रम्ह-खुदा- गॉड-भगवान् की प्राप्ति-उपलब्धि कराने की बात-चीत सहित साक्षात् दर्शन कराने वाली क्रमश: जानकारियाँ— शिक्षा (Education); स्वाध्याय (Self Realization) ; योग-साधना अथवा अध्यात्म(Spiritualization); और तत्त्वज्ञान रूप भगवद्ज्ञान रूप सत्यज्ञान रूप सम्पूर्णज्ञान (True Perfect Knowledge) सम्पूर्ण की उपलब्धि कराने वाली हो– उपर्युक्त प्रकार से ही हो। पुन: दोहरा दूँ कि शिक्षा-दीक्षा सम्पूर्ण की सम्पूर्णतया जानकारी कराने वाली होनी-रहनी चाहिये तभी ही दोष मुक्त सत्य प्रधान सुदृढ़-सम्पन्न अमन-चैन का भरा-पूरा समाज कायम हो-रह सकता है । यही सत्य है और इसी को ही पुर्णत: व्यावहारिक बनाने होने-रहने की अनिवार्यत:आवश्यकता है। इसे हर किसी को अपनाना ही चाहिये– अपनाना ही पड़ेगा– पड़ेगा ही । क्या ही अच्छा होता कि सहज ही इसे सोच-समझ देख-परख कर ही सही मगर सरकार द्वारा अपना लिया जाता और समाज पर इसे प्रभावी तरीके से हर किसी के लिए अनिवार्य कर-करा दिया जाता फिर तो यही दुनियां स्वर्ग से भी श्रेष्ठतर दिखायी देने लगती । देव वर्ग भी यहाँ आने के लिए तरसने लगते। ऐसा करने में सरकार को परेशानी क्यों?
    —– सन्त ज्ञानेश्वर स्वामी सदानन्द जी परमहंस.

  12. जिहाद किसलिए?
    ===========
    कोई भी वर्ग-सम्प्रदाय यह नहीं कहता कि सबसे ऊँचा और सबका ही मालिक जो है वह संख्या में दो-चार या दस है। जो सर्वोच्च होगा-सर्वश्रेष्ठ होगा- सर्वोत्त्कृष्ठ होगा, वह होगा ही ‘एकमात्र एक’। और वही है- परमात्मा-परमेश्वर-परमब्रह्म-यहोवा-अरिहँत-बोधिसत्व-अकालपुरुष-भगवान-खुदा-गॉड। प्रत्येक धार्मिक सम्प्रदायों या वर्गों का वही ‘एकमात्र एक’ ध्येय और लक्ष्य रहा है। उसी का नाम ले-लेकर और उसी कि दुहाई ले-देकर तथा उसी को खुश करने हेतु क्या दो धार्मिक वर्गों का आपसी टकराव जायज है? जिहाद या धर्म-युद्ध किसलिए? परमात्मा-परमेश्वर-भगवान-खुदा-गॉड की राजी खुशी के लिए या स्वाभिमान (Prestige issue) के तुष्टि के लिए? कोई भी विचारवान अंतर्वर्गीय धार्मिक दंगा-फसाद कायम करना धर्म-युद्ध (जिहाद) छेड़ना मंजूर नहीं कर सकता। ऐसा कोई घोर अज्ञानी और कुफ्र से भरे रोगी दिल-दिमाग वाला कट्टर स्वाभिमानी ही कर सकता है। धार्मिकों-धार्मिकों में धर्म-युद्ध (जिहाद) कैसा? क्या दोनों द्वारा ‘धर्म-धर्म-धर्म’ ही चिल्लाते हुए ‘धर्म’ हेतु ही आपसी टकराव-संहर्ष-तनाव पैदा करना अज्ञानता और स्वाभिमान का सूचक नहीं है?
    ———- सन्त ज्ञानेश्वर स्वामी सदानन्द जी परमहंस.

  13. क्या धरती का कोई हिन्दू-मुस्लिम-सिक्ख-ईसाई मेरे इस प्रश्न का जवाब देगा कि क्या किसी भी सम्प्रदाय के द्वारा किसी भी समाज-सम्प्रदाय का रसूल-पैगम्बर और अवतार अमर्यादित होने का पात्र है? निश्चित ही यह जवाब न बनेगा कि ‘नहीं’। फिर उनके नाम पर आपस में टकराव क्यों? मोहम्मद साहब-ईसा मसीह –नानक देव-श्रीराम और श्रीक़ृष्ण जी कभी रसूल-पैगम्बर-भगवद् दूत और भगवान के अवतार रहे हैं और उस मर्यादा में रहेंगे भी। इन महापुरुषों-सत्पुरुषों के नाम पर मन्दिर-मस्जिद-गिरिजाघर-गुरुद्वारा को लेकर टकराव क्यों? ये लोग जहाँ-जहाँ गए और ठहरे वहीं-वहीं ही मन्दिर-मस्जिद-गिरिजाघर-गुरुद्वारा बनते गए। इतना ही नहीं इन्हीं महापुरुषों-सत्पुरुषों के माध्यम से, भगवान-खुदा-गॉड के नाम पर ही सही, सैकङों-हजारों मन्दिर-मस्जिद और गुरद्वारा बने हैं और बनते भी जा रहें हैं और सभी ही पवित्र और पूजा-स्थल हैं। यदि मन्दिर पूजा-स्थल हैं तो मस्जिद इबादतगाह, यदि गिरिजाघर प्रेयर-होली प्लेस है तो गुरुद्वारा प्रार्थना-पवित्र गुरुस्थान। कौन है जो मन्दिर-मस्जिद-गिरिजाघर-गुरुद्वारा को पवित्र-पाक स्थल नहीं मानेगा—पूजा-आराधना-इबादत हेतु पवित्र स्थान नहीं मानेगा?
    ———- सन्त ज्ञानेश्वर स्वामी सदानन्द जी परमहंस.

  14. हमारी सोसाइटी इतनी संकीर्ण विचार धारा की है की धर्म जैसे व्यक्तिगत आस्था के विषय पर भी व्यापार करने की व्यवस्था को चुप चाप स्वीकार ही नहीं करती बल्कि उसमे भारी संख्या में सम्मिलित होकर इसे अपने धर्म का प्रचार और सेवा मानती है yeh सभी baba और sadhu kewal भगवन पर विश्वास करने और प्रार्थना करने को कहते है जो की कोई भी व्यक्ति अपने घर में भी कर सकता है और भगवन की कृपा पा सकता है लेकिन हम तो धर्म का प्रचार करके स्वयं ही धर्म की हानि कर रहे है जिसमे इन बाबाओं का बड़ा योगदान है, और पत्रकारिता तो केवल व्यापार बन गया है जिसका एकमात्र उद्देश्य प्रचार का साधन बन कर मुनाफा कमाना है. सभी तरह के चैनल, पत्र पत्रिकाओं अख़बार में उत्तेज़क समाचार, विज्ञापन, अश्लील फोटो आदि की भरमार है क्यों ??? क्योंकि हमारी जनता जनार्दन इसे पसंद करती है और स्वतंत्र प्रतियोगिता में वोही सफल और सही माना जाता है जो बिकता है चाहे वो विचार हो, सामान हो, सेवा हो, ज्ञान हो, विद्या हो या फिर शरीर

  15. मित्रो कांग्रेस और उसके सहयोगी पहले ही सनातम धर्म और देश को लूट चुके है बाकि बचे खुचे को ये कांग्रेस प्रोयोजित बाबा और समाचार चेनल (खास तोर से स्टार न्यूज़, आज तक और जी न्यूज ) बर्बाद करने पर उतारू है, अबा सवामी राम देव, अन्ना हजारे, के साथ साथ सेना अध्यक्ष भी इनको देश द्रोही नज़र अन्ने लगा है और ये तीनो चेनल कुस्छ समाचार पत्रों से मिल कर देश को बर्बाद करने पर उतारू है.

  16. टीवी चेनलों को खरीदने वाला ढोंगी निर्मल यह भूल गया कि प्रिंट मीडिया और सोशल नेटवर्क जैसे और भी हथियार है जो उस कि ईंट से ईंट बजा सकती है.
    इस ढोंगी को ग़लतफहमी है कि तमाम टीवी चेनलों को खरीदने के बाद अब वो बेख़ौफ़ हो कर जनता को लूट सकता है. इस ढोंगी का अंत बहुत नज़दीक है!

  17. मुकेश जी आपका कदम बहुत ही सराहनीय हो सकता है आप इस पाखंड के खिलाप अपना अभियान जारी रखें देश आपका साथ देगा ओर पाखंडी एक दिन दुनियाँ के सामने बेपर्दा होगा , क्यों न्यूज़ चेनल इस कार्य में निर्मल का साथ दे रहे हेन ये बहुत ही दुखद पहलू है ,

  18. Iske liye news channel kam un channels ko chalaane waale varishth patrkaar jyaada zimmedaar hain…. varishthon ko apna ikon maan taiyaar nayee khep aaj achrach mein hai ki aakhir kis mazbooree ke tahat inhone bazaar ke saamne ghutne tek diye…. sawaal ghambheer hai aur nidaan aatmkashtdaayak so ab is kism ki paricharcha mein bhi padne se kannee kaat lena hi unke pass ek maatra upaaye hai 🙂

  19. हमारे सभी सम्मानीय दोस्तों को नमस्कार ,
    आप सभी को हमारी एवं हमारी सभी संस्थाओं की तरफ से.
    आप सभी को आज और आनेवाले कल की हार्दिक शुभकामनाएं एवं बधाई….
    आप के घर / व्यापार में भगवान गणेश का आशीर्वाद हो……….
    माँ लक्ष्मी का बाश हो , सभी दुखो का नाश………
    भारतीया / विदेशी मुद्रा की बरसात हो………
    आपके हमारे प्रयास से भ्रष्टाचार मुक्त वातावरण की शुरुवात हो…

    अब अगर इन दलीलों को रोशनी में आपने निर्मल बाबा के कार्यक्रमों को देखने की कोशिश की तो भ्रम में पड़ जाएंगे कि क्या कहें, किसे दोष दें। बाबा को, मीडिया को या बाज़ार को या फिर तीनों सामूहिक रूप से ज़िम्मेदार हैं। बाबा खुले आम धोखाधड़ी कर रहे हैं मगर उन्हें रोकने वाला कोई नहीं है, न प्रशासन, न पुलिस न कानून। कुछ चैनल मौके को भुनाने में लगे हुए हैं और बाज़ार तो खैर ऐसा करने के लिए उन पर दबाव भी बना रहा है और उन्हें प्रेरित भी कर रहा है। सबकी आपस में साठ गाँठ है और इसके विरूद्ध आवाज़ चाहे जितनी उठाई जाए होता कुछ नहीं। पिछले एक दशक में चैनलों को विभिन्न मंचों पर जितना कोसा गया है उसके बाद तो उनका विवेक जाग ही जाना चाहिए था और चैनलों को सुधर ही जाना चाहिए था मगर ऐसा हुआ नहीं है।.

    इसका मतलब है कि बीमारी गंभीर है और इलाज कठिन होगा और लंबा भी चलेगा। ये भी तय है कि इसे आत्मनियमन और संपादकों के विवेक भर पर नहीं छोड़ा जा सकता, क्योंकि ये दोनों ही चीज़ें लगभग काम नहीं कर रही हैं। ऐसे में जो लोग निर्मल बाबा के विरोध में लामबंद हो रहे हैं उन्हें लंबी लड़ाई के लिए तैयार रहना चाहिए।.

    आपके शुभाकांक्षी
    नरेश कुमार शर्मा "नरेश ".

  20. आज सनातन धर्म को जो खतरा है, यह टीवी चैनलों से है! यह सब अपने स्वार्थ के लिये शास्त्रों की मर्यादा को भंग करते हुये अनाप=शनाप कार्य-क्रम दिखा याहे हैं===इनको सनातन धर्म से या भगवान से कोई लेना-देना नहीं है! इनके कारण ही आज शास्त्रों की आलोचना हो रही है! भ्रम और अंधविश्वास को बढ़ावा दे रहे हैं!

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