शलभमणि पर हमला क्यों? क्या पुलिसिया कार्रवाई की कोई और थी वज़ह?

admin 23

उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ से एक बड़ी खबर ये आई कि आईबीएन के ब्यूरो प्रमुख शलभमणि त्रिपाठी और उनके एक साथी के साथ पुलिस ने कार्रवाई के नाम पर बदतमीज़ी की। घटना की सूचना मिलते ही लखनऊ के सभी पत्रकार एक एक कर इकट्ठा होने लगे। सैकड़ों की संख्या में आक्रोशित पत्रकार हजरतगंज कोतवाली पहुंचे और वहां जम कर नारेबाजी की। पत्रकारों  ने फैसला लिया कि अपने बीच के पत्रकार साथी शलभ के साथ दुर्व्यवहार किए जाने का वह बदला इसी क्षण लेंगे. सभी शांतिपूर्ण तरीके से सीएम आवास के बाहर पहुंचे और धरने पर बैठ गए.

इसकी भनक बड़े अफसरों को लगते ही सबके हाथ पांव फूल गए। उन्होंने आनन-फानन में शलभ पर कार्रवाई करने वाले अधिकारियों को निलंबित कर उनके खिलाफ मुकद्दमा भी दर्ज़ करवा दिया।

उधर लखनऊ के एक पत्रकार ने मेल के जरिए बताया कि आईबीएन 7 के पत्रकार शलभ और मनोज राजन त्रिपाठी दोनों की पुलिस के कुछ आला अफसरों से कई वजहों से दुश्मनी थी। मेल के मुताबिक दोनो पत्रकारों ने हाल के वर्षों में पत्रकारिता की आड़ में सरकारी मशीनरी के साथ मिलकर करोड़ों अरबो के वारे न्यारे किये है।

बताया जाता है कि अभी हाल ही में शलभ और मनोज ने मिलकर 90 लाख और 60 लाख के मकान ख़रीदे हैं। इतना ही नही इन दोनों की अकूत सम्पति का राज शलभ के ड्राईवर को भी लग गया जिस कारण ही मिश्रा नाम का यह ड्राईवर मौका पाते ही शलभ के घर से 47 लाख नगद और करीब दो करोड़ रुपए की सोने की ईट लेकर भाग गया था। बाद में शलभ ने सरकारी मशीनरी की मदद से ड्राईवर को माल समेत गिरफ्तार करा दिया था .. लेकिन ताज्जुब की बात इसमें ये रही कि जिस गाजीपुर थाने से उसकी गिरफ़्तारी दिखाई गई थी वहां उसके पास माल की बरामदगी सिर्फ सत्रह हज़ार रुपए ही दिखाई गई.. गौर करने की बात तो यह है कि लखनऊ में तीन साल की पत्रकारिता में कोई क्या इतनी अकूत संपत्ति का मालिक भी हो सकता है?
मीडिया दरबार को प्राप्त मेल के मुताबिक जिस खबर को लेकर पत्रकार लामबंद हुए थे और अखबारों ने जिस तरह से बढ़ा चढ़ा कर लिखा उसने एक बात साफ कर दी है की पत्रकारिता जैसी चीज तो लखनऊ में रही नही..  दर असल हुआ ये था कि शलभ और उनके निजी कैमेरामैन गुरुभक्त हजरतगंज पुरानी कोतवाली के सामने से आईबीएन के तेजकुमार प्लाज़ा स्थित दफ्तर जा रहे थे, रस्ते में किसी कारण भीड़ जमा थी, जिसके चलते रास्ता जाम हो गया था। जाम में फंसने के कारण इन दोनों पत्रकारों को भी रुकना पड़ा, लेकिन रास्ता न मिलने पर दोनों का पारा चढ़ गया.. शलभ कुछ बोलते उससे पहले ही गुरुभक्त  ने जोर-शोर से गाली गलौज करना शुरू कर दिया.. इतना ही नहीं गुरुभक्त ने भीड़ लगाने के लिए एक महिला को  जिम्मेदार मानते हुए उसे भी  खूब बेइज्जत किया। बताया जाता है कि महिला के फ़ोन पर जब पुलिस अफसर मौके पर पहुचे तो महिला की आपबीती सुनकर गुरुभक्त को कोतवाली ले जाने लगी बस इसी बात से नाराज़ शलभ त्रिपाठी ने पुलिस अफसरों से भी मारपीट शुरू कर दी।  इससे बौखला कर ही पुलिसवालों ने शलभ से मार-पीट की…

बहरहाल, इस सब के बावजूद पुलिसिया कार्रवाई ने मीडिया जगत को भड़काने का ही काम किया जिस कारण ही दर्ज़नो पत्रकारों ने मुख्यमंत्री आवास पर ज़ोरदार प्रदर्शन किया..  देर रात हुए प्रदर्शन में पत्रकारों की एकजुटता देखकर ही प्रशासन में बैठे हुक्मरानों ने ‘दोषी’ पुलिस अफसरों के खिलाफ कार्रवाई का फरमान सुना दिया.. ‘लोकतंत्र’ पर हुए इस ‘हमले’ के बाद लखनऊ के पत्रकारों ने ऐसी एकजुटता की मिसाल पेश की जो हमेशा यादगार रहेगी..  उस रात पत्रकारों द्वारा एकजुटता दिखा कर यह सन्देश भी देने की कोशिश की गई है कि निजी जीवन में भले ही पत्रकार एक दूसरे से कितना भी खुन्नस क्यों न रखते हों,  जब बात ‘पत्रकारिता’ की होती है तो सब हमेशा एक जुट ही दिखेंगे..

(यह रिपोर्ट कई सूत्रों पर आधारित है तथा इसमें कई बातें ऐसी भी हैं जो कई पत्रकारों को कड़वी लग सकती हैं। इस रिपोर्ट के खिलाफ कई ऐसी तल्ख टिप्पणियां आई हैं जिन्हें सुधारने के बावजूद प्रकाशित नहीं किया जा सकता। हम हर तरह की टिप्पणियों का स्वागत करते हैं और हर किसी को अपनी बात रखने का अवसर भी देना चाहते हैं, लेकिन टिप्पणी करने वालों से अनुरोध है कि वे अपनी भाषा संयमित रखें तभी हम उन्हें प्रकाशित कर पाएंगे। – मॉडरेटर)

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23 thoughts on “शलभमणि पर हमला क्यों? क्या पुलिसिया कार्रवाई की कोई और थी वज़ह?

  1. खबर की तह तक पहुँच कर खबर निकालने के लिए मीडिया दरबार का बहुत-बहुत शुक्रिया…इस मारपीट को सचान मर्डर केस से जब जोड़ा गया था…तभी से कुछ शंका बढ़ गयी थी…कि आज कल तो मामला ऊपर के लेवल के सेटिंग से दब जाता है तो पुलिस वाले राह चलते ऐसा क्यों करेंगे…वैसे ये बात तो सच है कि मीडिया भी दलालों की मंडी बनती जा रही है…मीडिया के कुछ लोग सरकारी मशीनरी के साथ मिलकर लाखों-करोड़ों बना रहे हैं…स्क्रीन पर बढ़िया-बढ़िया बातें करने वाले इन तथाकथित पत्रकारों ने ही मीडिया की कब्र खोदनी शुरू कर दी है…अब तो धीरे-धीरे मीडिया से लोगों का भरोसा भी उठ रहा है…जो इसके लिए अच्छा संकेत तो हरगिज़ नहीं है…

  2. KYA SAB TV CHANNEL WALE PUBLIC KO BATAYENGE KI INKO KITNI PAY DETE HAIN MONTHLY OR INKE PASS KYA KYA ASSETS HAIN ?BLACK MAILING , FAVOURISM OR DALALI KARKE KOI MP ( rajiv shukla ) BAN JATA HAI,KOI RADIA KE SATH MIL KAR DALALI KARTA HAI ( prabhu+vir singhvi ) INKI PROPERTY DEKHOGE TOH DANG REH JAOGE. KUCHH DIN TV SE GAYAB REHNE BAAD FIR DIKHAI DENE LAGE HAI, AGAR NISHPAKSH HO TO RADIA TAPE KO KYON PURE PURE DIN NAHI DIKHAI,KYON STING OPERATION NAHI KARTE APNE BHAIYON KA ?

  3. aap sahi ho sakte hai.lko ke hi nahi pure desh ke patrakaro me paisa kamane ki daur jari hai.bare kahe jane wale patrakar dalalo se bhi do nahi sau kadam aage hai.meri 40 saal ki patrakarita ki jindagi me hajaro “salabh” aaye unme kai to mere shisya bhi hai.aap ki kahani ko subut nahi kewal Dr.ashok ki baat hojaye to murkho ki badjubani band ho jayegi. Ram Varama,editor,PRIYANKA.Lko.

  4. IBN7 को क्या सूझ गया की पुनर्जन्म और स्वर्ग के रस्ते की ख़बरें और तंत्र मंत्र की ख़बरों को छोड़कर ये कहाँ जुट गए

  5. bhartiya patrakarita bhi samaz ke dusare ango ke saman bharst ho chuki balaki isaki jimedari बौधिक है इs लिए इspar जायदा विचार करना होगा डीdr b p ashok k bare lucknow ke kafee niwasi jante hai vo ek parbhudh tatha imandaar pulice adhikari hai bhartiya patrakarita ka vikas to dr ashok jaise vaiktiyo davara isme samil hone se hoga ibn ७ ki vishvniyata un dono ghatia tathakathi patrakaro ki vajah se kam hui hai

  6. (झूठो ने झूठो से कहा सच बोलो )
    सस्ती लोकप्रियता और इमानदार
    बनने के लिए ऐसी खबरों को न प्रकशित करे
    जिससे पुरे समूह पर प्रश्नचिन्ह लग जाये |
    अब भगवान् ही भला करे इस बिरादरी का
    पत्रकार भी अब राजनितिज्ञो जैसे बर्ताव करने लगे है

  7. क्या पत्रकारों के लिए संविधान में अलग से क़ानून बना है ? जब तक
    ‘ पत्रकारों दलाली छोड़ो और दलालों पत्रकारिता छोड़ो ” पर आवाज नहीं उठेगी तब तक ऐसे ही चलता रहेगा .

    1. तुम पत्रकार हो नहीं न तो ये बकवाश बंद करो……..

  8. इस खबर में बस एक झोल है गुरुभक्त ने जिस महिला के साथ कहासुनी की, उसका नाम पता फोटो अगर होता तब एकदम यह पुख्ता होती, पुलिस अधिकारी अशोक के लिए और उनकी बहाली के लिए भे वह एक मजबूत सबूत होगी. दूसरी बात, पत्रकार कोइ दूसरे गृह के प्राणी नही है वह भी इसे भ्रष्ट्र व्यवस्था और समाज के अभिन्न अंग गई. मिशन के साथ काम करने वाले बहुत कम है..आज कितने लोग गणेश शंकर विद्यार्थी को जानते और उन्हें अपना आदर्श मानते?

  9. शलभमनि त्रिपाठी का यह षड़यंत्र है की बहिन मायावती सरकार को बदनाम करो, जिस पुलिस अधिकारी डॉ बी पी अशोक के विरुद्ध कार्यवाही हुई है वह सर्वसमाज,युवाओं और भले लोगों के लिए एक आदर्श है I लखनऊ की जनता ,उत्तर प्रदेश के लोग,पूरे देश के भले लोग डॉ बी पी अशोक और अनूप कुमार के साथ है.बहनजी से प्रार्थना है की सर्वसमाज के मनोबल और पुलिस के मनोबल को ठीक करने के लिए अपने महान और दृढ व्यक्तित्व को सिद्ध करने के लिए इन पुलिस अधिकारीयों को वहीँ नियुक्त करें जहाँ वे थे Iआई .बी.एन .7 के अलावा सभी पत्रकारों की सहानुभूति पुलिस के साथ है Iआप पत्रकारों की मोहताज नहीं है यदि इस बार आप दबाव में आ गई तो शलभमनि त्रिपाठी ही पचास लोगों के साथ सरकारी निर्णय करेंगें.

  10. let NBA report come out…it will be clear “ki mamla kya hain”….tab jo log in dalao ko sahid bhagat singh bata rahe hain unko jawab dena muskil ho jayega…

  11. अब चाहे लोग कुछ भी कहे ……..यहाँ तो दाल में काला ही काला नजर आता है ….वकील और पत्रकार का कोई सानी नहीं …..सरकार भी इनसे खौफ खाती है

  12. पत्रिकारिता अब सिर्फ और सिर्फ दलाली का नाम है क्योंकि पत्रकारों को कोई वेतन तो मिलता नहीं इसलिए वे जम कर दलाली और ब्लाच्क्मैलिंग करते है…….और आजकल तो वे कांग्रेस की खुलकर दलाली कर रहे है……..

  13. शलभ और मनोज सर के लिए जो कहा गया वो सिर्फ एक वकवास है.. जिस नीच पत्रकार ने आपको यह मेल किया है. वो बहुत घटिया किसम पत्रकार है..

      1. सच पूरी दुनिया के सामने उसे आप भी समझे तो बेहतर होगा….

  14. patkarita ab dalali lagti hai . iskey naam par karobar ho raha hai .police kuch karey to badnam na karey to badnam .

  15. अबे **** मीडिया दरबार का मंच पत्रकारिता की माँ बहन करने के लिए बनाया है ….जिस दिन तुम लोग पीटे जाओगे तब पूछूँगा कि तुम लोगो ने कौन सी दलाली कि है

    1. महाशय, मीडिया दरबार की किसी व्यक्ति विशेष से न तो रिश्तेदारी है न ही कोई दुश्मनी. हाँ, हम गलत को गलत और सही को सही कहने में कभी गुरेज़ नहीं करेंगे. खबर चाहे पुलिस के खिलाफ हो या मीडिया के, मीडिया दरबार दोनों को बराबर तरज़ीह देगा. और जहाँ तक हमारे पिटने का सवाल है, तो दोस्त इतना बता देना चाहेंगे की जितनी उम्र आपकी है उससे शायद कुछ ज्यादा ही समय हमें पत्रकारिता करते गुजर गया है और इस दौरान हमने हर दौर देखा है पर किसी का सहारा लिए बिना उस दौर से खुद के बूते पर विजय पाई है. इसे कोई अतिश्योक्ति न समझें. एक निवेदन है आपसे कि अपनी भाषा पर संयम रखें.
      मॉडरेटर

      1. Modeator mahoday, in ghatiya logo ka comment publish hi kyun kerte hain.. Apne uper padti hai to baukhla jaate hain. mera to kehna hai ki Media ke corruption ko khatm kerna sabse jaroori hai.. Iske liye bhi Anna Hazare ko bulana hoga.

          1. शलभ जी मनोज जी पहले सरकार से लड़े फिर गद्दार से ……लाखो करोडो की कमाई के आरोप लगाने वालो शर्म करो .. माया सरकार और आई बी एन का रिश्ता जग जाहिर है विगत करीब चार साल में कई बार आई बी एन को प्रदेश में बंद कार्य गया … शलभ जी पर हरिजन एक्ट का मुकदमा एक साल पहले दर्ज कराया गया, हर तरीके से मनोबल तोड़ने की कोशिश की गयी , अब पुलिस ने सीधे हमला कर दिया … क्या निर्भीक पत्रकारिता अपराध है शलभ जी और मनोज जी से जलने वालो अगर उन जैसा नहीं बन सकते तो कीचड मत उछालो क्योकि सूरज पर कीचड फेकने पर खुद मुह काला हो जायेगा | दस बीस रुपये में बिकने वाली और अपनी दरिंगी बेईमानी के लिए कुख्यात यू पी पुलिस के कृत्य को जायज ठहरा रहे हो .. पैसा तो तुम लोगो ने सरकार से खाया है | इसी लिए पत्रकार बन कर ऐसे हालात में पुलिस अधिकारी और सरकार की भाषा बोल रहे हो | और तुम्हे ऐसे मौको के आलावा पूछता भी कौन है |कर लो दलाली बेटा …कुछ करने की छमता नहीं तो यही कर लो…क्यों की यूं सरकार और पुलिस तो क्या अपने जमीर से भी हारे हुए हो… इब बहादुर और इमानदार लोगो की जय करो नहीं तो तुम्हे पूछता और पहचानता ही कौन है ………..

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