इस्‍तीफे के बाद मायावती ने कहा – मुसलमान और मीडिया ने हरा दिया बसपा को

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लखनऊ : बसपा प्रमुख एवं सीएम मायावती ने बुधवार को राज्‍यपाल बीएल जोशी को अपना इस्‍तीफा सौंप दिया। मीडिया से बचती-बचाती वे इस्‍तीफा देने के लिए राजभवन पहुंचीं। इस्‍तीफे के बाद उन्‍होंने मीडिया को संबोधित किया। इस दौरान उन्‍होंने हमेशा की तरह लिखित बयान पढ़ा। मायावती ने बसपा के हार के कारणों को तो गिनाया ही साथ ही उन्‍होंने इसके लिए मीडिया को भी जिम्‍मेदार बताया। उन्‍होंने कहा कि भाजपा-कांग्रेस के चलते यूपी अब गलत हाथों में पहुंच गया है। इसके बाद उन्‍होंने शब्‍दश: जो कहा वो नीचे है।

”उत्तर प्रदेश के नतीजे घोषित हो चुके हैं और ये हमारी पार्टी के अनुकूल न आने के कारण आज मैंने विधान सभा भंग करने की सिफारिश करने के साथ-साथ अपने मुख्यमंत्री के पद से भी इस्तीफा महामहिम राज्यपाल को सौंप दिया है। हालांकि मेरी इस सरकार के बारे में वैसे आप लोगों को ये भी मालूम है कि मैंने सन 2007 में हर स्तर पर कितनी ज्यादा खराब हालातों में प्रदेश की सत्ता अपने हाथों में ली थी, जिन्हें सुधारने में मेरी सरकार को काफी ज्यादा मेहनत करनी पड़ी है जबकि इस मामले में मेरी सरकार को सहयोग देने में विरोधी पार्टियों की तरह केंद्र सरकार का भी रवैया ज्यादातर नकारात्मक रहा है। इस सबके बावजूद भी मेरी सरकार ने अपनी पार्टी की सर्वजन-हिताय व सर्वजन-सुखाय की नीति के आधार पर चलकर यहां विकास व कानून व्यवस्था के साथ-साथ सर्व समाज में गरीबों, मजदूरों, छात्राओं, कर्मचारियों आदि के हितों के लिए हर मामले में व हर स्तर पर महत्वपूर्ण व ऐतिहासिक कार्य किए हैं। प्रदेश में बिजली की खराब स्थिति को सुधारने के लिए ऐतिहासिक कदम उठाए गए हैं जिनका फायदा 2014 तक प्रदेश की जनता को मिल जाएगा।

दुख की बात यह है कि प्रदेश में अब सत्ता ऐसी पार्टी के हाथों में आ रही है जो सभी विकास कार्यों को ठंडे बस्ते में डालकर एक बार फिर प्रदेश को कई वर्ष पीछे ले जाएगी। इसके लिए हमारी पार्टी बीजेपी और कांग्रेस के गलत स्टैंड को ही जिम्मेदार मानकर चलती है। इस बारे में आप लोगों को यह भी मालूम है कि कांग्रेस पार्टी ने प्रदेश में विधानसभा आम चुनाव घोषित होने के तुंरत बाद ही अपने राजनीतिक स्वार्थ के लिए जब मुस्लिम समाज के पिछड़े हुए लोगों को ओबीसी के कोटे में से आरक्षण देने के बात कही, तब बीजेपी ने उसका काफी डंटकर विरोध किया था। इतना ही नहीं बल्कि इस मुद्दे की आड़ में बीजेपी ने भी अपने राजनीतिक स्वार्थ के लिए प्रदेश में अग्रणी समाज के साथ-साथ ओबीसी वोटों को भी अपने ओर खींचने की कोशिश की थी, जिसके बाद प्रदेश के मुस्लिम समाज को यह डर सताने लगा था कि कहीं प्रदेश में फिर बीजेपी की सत्ता न आ जाए। इसी स्थिति में कांग्रेस को कमजोर देखते हुए, आरक्षण के मुद्दे पर बीएसपी से अपर कास्ट समाज व पिछडे़ वोटों को बीजेपी में जाने के डर से मुस्लिम समाज ने सपा को वोट किया। इसी कारण से प्रदेश के मुस्लिम समाज ने कांग्रेस और बसपा को अपना वोट न देकर अपना 70 फीसदी वोट इकतरफा तौर पर सपा को दे दिया। यही कारण है कि सिर्फ मुस्लिम वोटों के कारण ही सपा के ओबीसी, अग्रणी समाज और अन्य समुदायों के लोगों का वोट भी जुड़ जाने के कारण सपा के प्रत्याशी चुनाव जीते। मुस्लिम बाहुल्य सीटों पर सपा के मुसलमान उम्मीदवार इस बार आसानी से चुनाव जीत गए।

प्रदेश में दलितों के वर्ग को छोड़कर ज्यादातर हिंदू समाज में से खास तौर पर अपर कास्ट समाज का वोट कई पार्टियों में बंट जाने के कारण सपा के उम्मीदवारों को ही मिला। कुछ अपर कास्ट हिंदू वोट बसपा को मिले, कुछ कांग्रेस को और बाकी बीजेपी को मिला। अपर कास्ट समाज का वोट बंटने के बाद सपा के समर्थन में परिणाम आने के बाद से प्रदेश का अग्रणी हिंदू समाज दुखी महसूस कर रहा है। लेकिन फिर भी हमारी पार्टी के लिए इस चुनाव में पहले से भी ज्यादा संतोष की बात यह रही है कि विरोधी पार्टियों के हिंदू-मुस्लिम वोटों के चक्कर में बीएसपी का अपना दलित बेस वोट बिलकुल भी नहीं बंटा है। दलित वर्ग के लोगों ने पूरे प्रदेश में अपना इकतरफा वोट बीएसपी के उम्मीदवारों को दिया है। इसी कारण हमारी पार्टी इस चुनाव में दूसरे नंबर पर बनी रही। वरना हमारी पार्टी बहुत पीछे चली जाती। मैं अपने दलित समाज के लोगों का दिल से धन्यवाद और आभार प्रकट करती हूं। इसके साथ-साथ मैं अपनी पार्टी से जुड़े मुस्लिम समाज व अन्य पिछड़ा वर्ग और अग्रणी जाति समाज के उन लोगों का भी दिल से शुक्रिया अदा करती हूं, जो इस चुनाव में किसी भी लहर में गुमराह नहीं हुए और बहकावे में नहीं आए और हमारी पार्टी से जुड़े रहे। हमारी पार्टी में सर्वसमाज के 80 उम्मीदवार चुनाव जीतकर आए हैं।

इसके साथ ही यहां मैं यह भी कहना चाहती हूं कि अब हमारी पार्टी दलितों की तरह यहां प्रदेश में अन्य सभी समाज के लोगों को भी कैडर के जरिए हिंदू-मुस्लिम मानसिकता से बाहर निकालने की भी पूरी-पूरी कोशिश करेगी ताकि इस बार के चुनाव की तरह आगे अन्य किसी भी चुनाव में हमारी पार्टी को इस तरह का कोई भी नुकसान न पहुंच सके। अंत में मेरा यही कहना है कि अब प्रदेश की जनता बहुत जल्द ही सपा की कार्यशैली से तंग आकर, जिसकी शुरुआत कल से हो चुकी है, बीएसपी के सुशासन को जरूर याद करेगी और मुझे यह पूरा भरोसा है कि अगली बार प्रदेश की जनता फिर से बसपा को पूर्ण बहुमत से सत्ता में लाएगी।

मैं प्रदेश की पुलिस और प्रशासन से जुड़े सभी छोटे-बड़े अधिकारियों का दिल से शुक्रिया अदा करती हूं, पूरी अवधि में उन्होंने मुझे सरकार चलाने में सहयोग किया और 2009 के लोकसभा चुनाव और प्रदेश में 2012 के आम चुनाव करवाने में सहयोग का भी आभार प्रकट करती हूं। भ्रष्टाचार का मेरे शासन के जाने से कोई लेना देना नहीं है। बसपा को मुस्लिम वोटों के ध्रुविकरण के कारण नुकसान पहुंचा। कांग्रेस और बीजेपी और मीडिया जिम्मेदार हैं। प्रदेश की जनता के साथ अब जो भी होगा उसके लिए जनता कांग्रेस और बीजेपी के साथ-साथ मीडिया को भी कोसेगी।”

उनके लिखित भाषण के बाद पत्रकारों ने उनसे कई सवाल पूछे परन्‍तु उन्‍होंने ज्‍यादातर सवालों के जवाब नहीं दिए। पत्रकारों के एक सवाल के जवाब में कहा कि जनता में उनकी सरकार के प्रति गुस्‍सा नहीं था, बल्कि भाजपा-कांग्रेस की गलत नीतियों के चलते मुसलमानों के वोट एकमुश्‍त सपा को चले गए, जिसके चलते बसपा कम सीटें मिलीं। उन्‍होंने कहा कि अगर जनता नाराज होती तो बसपा का हाल बिहार में लालू की पार्टी जैसा हो जाता। उन्‍होंने उत्‍तराखंड में बसपा के कदम के बारे में पूछे गए जवाब को भी टाल दिया तथा कहा कि आप सबको इसकी जानकारी प्रेस नोट से मिल जाएगी।

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2 thoughts on “इस्‍तीफे के बाद मायावती ने कहा – मुसलमान और मीडिया ने हरा दिया बसपा को

  1. किसी की कोई गलती नहीं थी न मीडिया न मुसलमान मायावतीजी के शासन से लेकर प्रशासन तक छोटे कार्यकर्त्ता से लेकर बड़े नेता तक कोई भी छोटे से छोटा कार्य बगैर पैसे के नहीं करना चाहता था, कई पुलिस अधिकारी छोटे स्तर के नहीं आई.जी स्तर के जो बहजी द्वारा ही पदासीन किये गए थे | ताकतवर व प्रभावशाली लोगों की ही मदद करते थे और किसी को भी बिना जांच बिना पक्ष सुने अपमानित कर देते थे | ऐसी घटना मेरे एक मित्र के साथ भी हुई, उनको ” एक पुलिस अधिकारी द्वारा न सिर्फ फोन द्वारा अभद्र टिप्पड़ियाँ करते हुए अपमानित किया गया बल्कि कार्यालय बुलाकर रिश्तेदार और मित्रों के सामने NDPS एक्ट जैसे गंभीर आरोप के तहत जेल भेजने की धमकी भी दी ” उन्होने उनका पक्ष नहीं सुना ”! आज तक उनकी समस्या का समाधान नहीं हुआ क्यों कि सामने वाला एक बहुत बड़ी और प्रभाशाली कंपनी का अधिकारी था |उससे ज्यादा आश्चर्य कि बात तो ये थी उक्त कंपनी की ताकत और प्रभाव का अंदाज इसी बात से लगाया जा सकता है कि अपराध, गुंडागर्दी व भ्रष्टाचार पर आवाज़ उठाने वाली मीडिया, न्यूज़ चैनल, न्यूज़ पेपर आदि और न ही सामाजिक संगठन या कार्यकर्त्ता ने कोई आवाज नहीं उठाई जैसे सब बिके हुए थे | उन्होंने टीम अन्ना के प्रत्येक सदस्य को मेल किया लेकिन किसी ने जवाब देना भी जरुरी नहीं समझा |
    भ्रष्टाचार,लोकपाल,जनलोकपाल पर मंच से भाषण देना,न्यूज़ पेपर में,न्यूज़ चैनल में सुर्ख़ियों में छाये रहकर अपने हितो के लिए ही हो हल्ला करना ,लेकिन क्या वास्तविकता में ये समाज के लोगों के न्याय हित में कुछ कर सकते हैं ? शायद नहीं ! आपकी निष्पक्षता, निडरता,निष्ठां और ईमानदारी के विचारों से प्रभावित होकर मै यह लिख रहा हूँ |

    Hari Kishor

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