क्राइम ब्रांच ने जिग्‍ना वोरा को हत्‍यारन तो ठहराया, लेकिन नहीं मिला कोई अहम सुबूत

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अंग्रेजी दैनिक ‘मिड-डे’ के क्राइम एडिटर (इनवेस्‍टीगेशन) ज्योतिर्मय डे की बीते साल जून में हुई हत्या के मामले में गिरफ्तार महिला एशियन एज की पत्रकार जिग्ना वोरा के खिलाफ मुम्बई पुलिस की क्राइम ब्रांच ने मकोका अदालत में पूरक आरोप पत्र दाखिल कर दिया है। जिग्ना के ऊपर आईपीसी की 302, 34, 301, 120 (बी) के तहत मामला दर्ज किया गया है। क्राइम ब्रांच ने ये भी कहा है कि दोनों पत्रकारों के बीच पेशेवर प्रतिद्वंद्विता के चलते ही जेडे की हत्‍या हुई। इस मामले की अगली सुनवाई 12 मार्च को होगी।

अतिरिक्‍त पुलिस उपायुक्‍त अपराध शाखा देवेंद्र भारती ने बताया कि पुलिस ने मकोका की अदालत में पत्रकार जिग्‍ना बोरा के खिलाफ मामला बनाने के लिए पर्याप्‍त सबूत जुटाए हैं। जिग्‍ना के खिलाफ आरोप पत्र 1400 पृष्‍ठों का है, इसमें उन सभी सबूतों को शामिल किया गया है, जिसे क्राइम ब्रांच की टीम ने जुटाया है। हालांकि सूत्रों का कहना है कि इस आरोप पत्र में उन सुबूतों को नहीं शामिल किया गया है जिनका जिक्र पुलिस पहले करती रही है।

सूत्रों का कहना है कि पूरक आरोप पत्र में जिन सूबूतों को शामिल किया गया है उनसे आरोप साबित करने में मुश्किलें आएंगी। सूत्र ये भी बताते हैं कि जिग्ना के खिलाफ वास्तव में कोई मामला बन ही नहीं रहा था, लेकिन डे के रिश्तेदारों और समर्थकों के दबाव में ये आरोप लगाए गए हैं।

ग़ौरतलब है कि जिग्ना मुम्बई के अंग्रेजी अखबार एशियन एज़ में के लिए उप ब्यूरो प्रमुख के तौर पर कार्यरत थी। उसे ‘मिड-डे’ के सम्पादक जे.डे की पिछले वर्ष 11 जून को हुई हत्या के सिलसिले में बीते साल ही 25 नवम्बर को गिरफ्तार किया गया था। मुम्बई पुलिस ने पिछले वर्ष दिसम्बर में इस मामले से जुड़े 12 आरोपियों के खिलाफ आरोप पत्र दाखिल किया था, जिसमें जिग्ना वोरा का नाम नहीं जोड़ा गया था। क्राइम ब्रांच ने अनूपूरक आरोप पत्र दाखिल करने की जानकारी मकोका कोर्ट को दी थी।

क्राइम ब्रांच ने अपनी नई रिपोर्ट में आरोप लगाया है कि जिग्‍ना वोरा ने ही डे का मोबाइल नंबर, बाइक का नंबर और उनके घर का पता फरार माफिया डॉन राजन को मुहैया कराया था। पिछले आरोप पत्र में माफिया डॉन छोटा राजन तथा नयन सिंह के खिलाफ भी इल्ज़ाम लगाए गए थे, लेकिन ये दोनों फरार हैं। मकोका की विशेष अदालत में दाखिल 3,055 पृष्ठों के आरोप-पत्र में डे की हत्या में शामिल 10 लोगों की भूमिका का विस्तृत ब्यौरा दिया था।

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मीडिया दरबार के मॉडरेटर 1979 से पत्रकारिता से जुड़े हैं. एक साप्ताहिक से शुरूआत के बाद अस्सी के दशक में स्वतंत्र पत्रकार बतौर खोजी पत्रकारिता में कदम रखा, हिंदी के अधिकांश राष्ट्रीय अख़बारों में हस्ताक्षर. उसी दौरान राजस्थान के अजमेर जिले के एक सशक्त राजनैतिक परिवार द्वारा एक युवती के साथ किये गए खिलवाड़ पर नवभारत टाइम्स के लिए लिखी रिपोर्ट वरिष्ठ पत्रकार श्री मिलाप चंद डंडिया की पुस्तक "मुखौटों के पीछे - असली चेहरों को उजागर करते पचास वर्ष" में भी संकलित की गयी है. कुछ समय के लिए चौथी दुनियां के मुख्य उपसंपादक रहे किन्तु नौकरी कर पाने के लक्खन न होने से तेईस दिन में ही चौथी दुनिया को अलविदा कह आये. नब्बे के दशक से पिछले दशक तक दूरदर्शन पर समसामयिक विषयों पर प्रायोजित श्रेणी में कार्यक्रम बनाते रहे. अब वैकल्पिक मीडिया पर सक्रिय.
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