”क्यों नहीं किया जवाब तैयार?” अदालत ने पूछा गूगल से, सभी वेबसाइट्स को दिया 15 दिनों का नोटिस

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सोशल नेटवर्किंग साइट्स पर आपत्तिजनक कंटेंट मामले पर दिल्‍ली की रोहिणी कोर्ट ने अपना रुख कड़ा कर लिया है। अदालत ने सोमवार को फेसबुक, याहू, गूगल समेत 22 ऐसी वेबसाइट्स को आपत्तिजनक सामग्री हटाने के मसले पर 15 दिनों के अंदर लिखित बयान दायर करने का निर्देश दिया है। कोर्ट ने अपने आदेश में इन साइटों से पूछा है कि उन्‍हें जो आपत्तिजनक कंटेंट हटाने का जो आदेश दिया गया था उस मामले में क्‍या कार्रवाई की गई है।

सुनवाई के दौरान फेसबुक, याहू तथा माइक्रोसाफ्ट ने अदालत से कहा कि उनके खिलाफ कार्रवाई का कोई कारण नहीं है। साथ ही गूगल इंडिया ने अदालत से कहा कि उसने कुछ पृष्ठों को वेबसाइट से हटा दिया है। वेबसाइट से आपत्तिजनक सामग्री हटाने के दिल्ली की एक अदालत के आदेश के मद्देनजर फेसबुक इंडिया ने अनुपालन रिपोर्ट जमा की।
अदालत ने फेसबुक तथा 21 अन्य वेबसाइट को आपत्तिजनक सामग्री हटाने के निर्देश दिए थे। गूगल इंडिया ने भी अदालत से कहा कि उसने नेट पर अपनी साइटों पर से उन पृष्ठों को हटा दिया है जिसको लेकर याचिकाकर्ताओं ने आपत्ति जताई थी।

इस बीच, फेसबुक, याहू तथा माइक्रोसाफ्ट ने अदालत से कहा कि इस मामले में उनकी कोई भूमिका नहीं है और इस सिलसिले में उनके खिलाफ कार्रवाई करने का कोई औचित्य नहीं है। अतिरिक्त न्यायाधीश प्रवीण सिंह ने याचिकाकर्ता मुफ्ती एजाज अरशद काजमी की तरफ से मामले में पेश वकील से यह पूछा कि क्या ब्लॉग पर किसी व्यक्ति द्वारा कोई सामग्री या सूचना पोस्ट किए जाने से सेवा प्रदाता कंपनियों को पक्ष बनाया जा सकता है।

अदालत ने गूगल से यह भी पूछा कि वह ‘उपयुक्त’ तरीके से जवाब के साथ क्यों नहीं आई। अदालत ने कंपनी की इस दलील को खारिज कर दिया कि उसे फैसले तथा मामले से जुड़े अन्य दस्तावेज की प्रति शुक्रवार को मिली थी। अदालत ने कहा, ”आप यह मत कहिए कि आपको दस्तावेज की प्रति शुक्रवार को मिली। इस मामले में पिछले कुछ महीने से होहल्ला हो रहा है, ऐसे में आपको इसके लिए तैयार रहना चाहिए था।”

अदालत ने याचिकाकर्ता से उन सभी दस्तावेज की प्रति प्रतिवादियों को उपलब्ध कराने को कहा जिसके आधार पर उन्होंने अर्जी दायर की है। इससे पहले, अदालत ने 20 दिसंबर को आदेश जारी कर 22 सामाजिक नेटवर्किंग वेबसाइट को सम्मन भेजा और फोटोग्राफ्स, वीडियो या अन्य रूप में मौजूदा ‘धर्म एवं समाज विरोधी’ सामग्रियों को हटाने का निर्देश दिया था।

अदालत ने 24 दिसंबर को वेबसाइटों के लिए आदेश का अनुपालन करने को लेकर छह फरवरी की समय सीमा निर्धारित की थी। जिन वेबासाइटों को आपत्तिजनक सामग्री हटाने का निर्देश दिया गया था, उनमें फेसबुक इंडिया, फेसबुक, गूगल इंडिया प्राइवेट लिमिटेड, गूगल आर्कुट, यूट्यूब, ब्लॉगस्पाट, माइक्रोसाफ्ट इंडिया प्राइवेट लि., माइक्रोसाफ्ट इंडिया, माइक्रोसाफ्ट जोंबी टाइम, एक्सबोई, बोर्डरीडर, आईएमसी इंडिया, माई लॉट, शाइनी ब्लाग तथा टॉपिक्स शामिल हैं।

सोशल नेटवर्किंग साइट्स फेसबुक और गूगल ने कोर्ट के इस आदेश पर अपनी सफाई पेश की है। गूगल और फेसबुक ने अपनी सफाई में कहा है कि आपत्तिजनक कंटेंट को साइट से हटाया जा चुका है। इन दोनों साइट्स का कहना है कि आपत्तिजनक कंटेंट हटाने के बाद कोई वजह नहीं बचती है कि उनके खिलाफ कोई कार्रवाई की जाए।
गौरतलब है कि दि‍ल्‍ली की पटियाला कोर्ट ने इन सोशल नेटवर्किंग साइट्स को आपत्तिजनक कंटेंट को लेकर समन जारी किया था। इन साइटों पर आपत्तिजनक कंटेंट रखने का आरोप है।

भारत सरकार पहले ही इन साइटों पर पड़े आपत्तिजनक कंटेंट पर अपनी तीखी प्रतिक्रिया व्‍यक्‍त कर चुकी है। सरकार ने आपत्तिजनक कंटेंट मामले में इन साइटों पर मुकदमा चालने की स्‍वीकृति दे दी है। अब कोर्ट के सख्‍त रवैये के बाद गूगल और फेसबुक जैसी सोशल नेटवर्किंग साइटों ने आपत्तिजनक कंटेंट को हटाने का फैसला किया है।

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मीडिया दरबार के मॉडरेटर 1979 से पत्रकारिता से जुड़े हैं. एक साप्ताहिक से शुरूआत के बाद अस्सी के दशक में स्वतंत्र पत्रकार बतौर खोजी पत्रकारिता में कदम रखा, हिंदी के अधिकांश राष्ट्रीय अख़बारों में हस्ताक्षर. उसी दौरान राजस्थान के अजमेर जिले के एक सशक्त राजनैतिक परिवार द्वारा एक युवती के साथ किये गए खिलवाड़ पर नवभारत टाइम्स के लिए लिखी रिपोर्ट वरिष्ठ पत्रकार श्री मिलाप चंद डंडिया की पुस्तक "मुखौटों के पीछे - असली चेहरों को उजागर करते पचास वर्ष" में भी संकलित की गयी है. कुछ समय के लिए चौथी दुनियां के मुख्य उपसंपादक रहे किन्तु नौकरी कर पाने के लक्खन न होने से तेईस दिन में ही चौथी दुनिया को अलविदा कह आये. नब्बे के दशक से पिछले दशक तक दूरदर्शन पर समसामयिक विषयों पर प्रायोजित श्रेणी में कार्यक्रम बनाते रहे. अब वैकल्पिक मीडिया पर सक्रिय.
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