खत्म हुई UID पर तकरार, लेकिन अब भी NPR ही बनेगा ‘आधार’ का आधार

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यूआईडी को मंजूरी बेशक मिल गई हो, लेकिन इसे अब तक ठंढे बस्ते में डाल देने वाले गृह मंत्रालय ने आखिरकार अपनी प्रभुता को बनाए ही रखा। नंदन निलेकनी की टीम को अभी भी अपने फाइनल डैटाबेस के लिए एनपीआर पर ही भरोसा करना पड़ेगा। सभी एक-दूसरे की पीठ थपथपाने में जुटे हैं, लेकिन इस बात का जवाब किसी के पास नहीं है कि अगर दोनों ही एजेंसी एक ही तरह का डैटा जमा कर रही है तो 5500 करोड़ खर्च करने का ‘आधार’ क्या है? ”

देश में रहने वाले सभी लोगों को चिप बेस्ड स्मार्ट कार्ड जारी करने के मसले पर मतभेद खत्म हो गए हैं। केंद्र सरकार ने यूनीक आइडेंटिफिकेशन अथॉरिटी ऑफ इंडिया (यूआईडीएआई) के 16 राज्यों के 40 करोड़ और लोगों का एनरोलमेंट करने के अलावा 5791 करोड़ रुपये की अतिरिक्त रकम को मंजूरी दे दी है।

प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट की बैठक में तय हुआ कि यूआईडीएआई और नैशनल पॉपुलेशन रजिस्टर (एनपीआर) दोनों मिलकर पंजीकरण का काम जून 2013 तक पूरा करेंगे। बायोमीट्रिक डेटा जुटाने के लिए बीच का रास्ता अपनाया गया है। यह फैसला लिया गया है कि अन्य राज्यों में उंगलियों के निशान और आंखों की पुतलियों की पहचान लेने का यह काम राष्ट्रीय जनसंख्या रजिस्टर (एनपीआर) के तहत होगा। एनपीआर उन तटवर्ती क्षेत्रों में डैटा जुटाने का काम जारी रखेगा, जहां पर यूआईडीएआई की पहुंच नहीं है। यूआईडीएआई 13 राज्यों में बायोमीट्रिक डैटा जुटाएगा। फिर इस डैटा को एक-दूसरे से शेयर किया जाएगा।

कैबिनेट की बैठक के बाद गृह मंत्री पी. चिदंबरम, योजना आयोग के उपाध्यक्ष मोंटेक सिंह आहलूवालिया और यूआईडीएआई के प्रमुख नंदन नीलेकणि ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में बताया कि आधार कार्ड बनाने की प्रक्रिया जारी रखने पर सहमति बन गई है। गृह मंत्री पी चिदंबरम ने दावा किया कि कार्ड जारी करने को लेकर योजना आयोग से कोई मतभेद नहीं है। उन्होंने कहा कि नई व्यवस्था उस हद तक सुरक्षित रहेगी जितना इंसान के हाथ में है। उन्होंने हालांकि कहा, ”यूआईडीएआई आंकड़े और एनपीआर आंकड़ों में अंतर पाए जाने पर एनपीआर के आंकड़ों को ही माना जाएगा।”

चिदंबरम ने कहा कि बेशक दोनों संस्थानों के साथ काम करने से कुछ खामियां सामने आ सकती हैं, उन्हें एनपीआर के डेटा के मुताबिक ठीक कर लिया जाएगा। यूआईडीएआई द्वारा जारी आधार स्वैच्छिक है जबकि एनपीआर अनिवार्य है। यह सरकारी कार्यक्रम है। एनपीआर द्वारा जारी कार्ड में हर व्यक्ति की 15 डिटेल दर्ज होंगी जबकि यूआईडीएआई 5 डिटेल दर्ज करेगा। उन्होंने कहा कि इस प्रोजेक्ट पर अब कुल खर्च बढ़कर 8850 करोड़ रुपये होने का अनुमान है।

यूआईडी और एनपीआर को लेकर गृह मंत्रालय और यूआईडीएआई में मतभेद सामने आए थे। गृह मंत्रालय का कहना था कि एनपीआर भी बायोमीट्रिक डेटा जुटा रहा है। ऐसे में एक ही काम को दो संस्थानों द्वारा करना तर्कसंगत नहीं है। नीलेकणि ने कहा कि गृह मंत्री द्वारा जताई गई चिंताओं का समाधान किया जाएगा। दोनों एजेंसियां अगले साल जून तक प्रक्रिया पूरी कर लेंगी। (एजेंसी)

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मीडिया दरबार के मॉडरेटर 1979 से पत्रकारिता से जुड़े हैं. एक साप्ताहिक से शुरूआत के बाद अस्सी के दशक में स्वतंत्र पत्रकार बतौर खोजी पत्रकारिता में कदम रखा, हिंदी के अधिकांश राष्ट्रीय अख़बारों में हस्ताक्षर. उसी दौरान राजस्थान के अजमेर जिले के एक सशक्त राजनैतिक परिवार द्वारा एक युवती के साथ किये गए खिलवाड़ पर नवभारत टाइम्स के लिए लिखी रिपोर्ट वरिष्ठ पत्रकार श्री मिलाप चंद डंडिया की पुस्तक "मुखौटों के पीछे - असली चेहरों को उजागर करते पचास वर्ष" में भी संकलित की गयी है. कुछ समय के लिए चौथी दुनियां के मुख्य उपसंपादक रहे किन्तु नौकरी कर पाने के लक्खन न होने से तेईस दिन में ही चौथी दुनिया को अलविदा कह आये. नब्बे के दशक से पिछले दशक तक दूरदर्शन पर समसामयिक विषयों पर प्रायोजित श्रेणी में कार्यक्रम बनाते रहे. अब वैकल्पिक मीडिया पर सक्रिय.
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