प्रेस क्लब के चुनावी नतीजों में पुराने पैनल को मिली भारी जीत

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राजधानी दिल्ली के प्रेस क्लब ऑफ इंडिया के इस बार के चुनावी नतीजों ने साबित कर दिया है कि अगर इमानदारी और समझदारी से काम किया जाए तो पत्रकार भी उन्हें सर आंखों पर बिठाते हैं। पिछले साल परवेज अहमद और पुष्पेंद्र कुलश्रेष्ठ के पैनल को कुप्रबंधन और भ्रष्टाचार की सजा देने वाले सदस्यों ने सत्ता में आई नई टीम को दोबारा भारी बहुमत से जिता दिया है। माना जा रहा है कि कमेटी के साल भर के अच्छे कामों को पसंद किया गया है और इसी अंदाज में काम करते रहने का जनादेश दिया है।

प्रेसीडेंट पद पर सत्ताधारी पैनल के रामचंद्रन उर्फ राम जीते हैं जबकि जनरल सेक्रेट्री के महत्वपूर्ण पद पर इसी पैनल के अनिल आनंद आसीन हुए हैं। रामचंद्रन जी फाइल्स नामक अंग्रेजी पत्रिका में काम करते हैं जबकि अनिल आनंद ग्रेटर कश्मीर नामक जम्मू के अखबार के दिल्ली ब्यूरो के चीफ हैं। अध्यक्ष के लिए लड़ रहे पंकज सिंह और जगदीश यादव की हार हुई है। वरिष्ठ फोटो जर्नलिस्ट जगदीश यादव के बारे में माना जा रहा है कि वे पुष्पेंद्र पैनल की तरफ से अध्यक्ष पद के प्रत्याशी थे। जनरल सेक्रट्री पद पर नीलम महाजन सिंह भी लड़ रही थीं, जो कि हार गई हैं।

वाइस प्रेसीडेंट के पद पर अरुण केसरी (यूनीवार्ता) विजयी हुए हैं। उन्होंने सविता श्रीवास्तव को हराया। ज्वाइंट सेक्रेट्री के पद पर टाइम्स आफ इंडिया की महुआ चटर्जी विजयी हुई हैं। ये भी सत्ताधारी पैनल की उम्मीदवार थीं। महुआ चटर्जी ने एनडीटीवी के राजीव रंजन को हराया। ट्रेजरॉर उर्फ कोषाध्यक्ष पद पर जैसा कि पहले से तय मना जा रहा था इमानदार छवि वाले एनडीटीवी के नदीम काजमी रिपीट हुए हैं।

मैनेजिंग कमेटी के कुल 16 सदस्यों में करीब दर्जन भर से ज्यादा सदस्य सत्ताधारी पैनल के जीत रहे हैं। सबसे ज्यादा वोट राष्ट्रीय सहारा के नेशनल ब्यूरो में कार्यरत संजय सिंह को मिले हैं। वे पिछले कार्यकाल में भी मैनेजिंग कमेटी मेंबर थे। इसके अलावा अनंत भटनागर (सकाल), अदिति टंडन (ट्रिब्यून), अवतार नेगी (डीडी न्यूज़), दिनेश तिवारी (हिन्दुस्तान), जीएन झा (एशियन एज), जीतेन्द्र कुमार (सी-वोटर), जॉमी थॉमस (मलयाला मनोरमा), कमलनैन नारंग (बिजनेस लाइन) संजीव उपाध्याय (डीडी), पारुल चंद्रा (एशियन एज), संतोष कुमार (दैनिक भास्कर), मनन कुमार (डीएनए) सुधी रंजन सेन (एनडीटीवी), सौभाग्य कार (ऑल इंडिया रेडियो) आदि के मैनेजिंग कमेटी मेंबर के लिए जीतने की खबर है।

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मीडिया दरबार के मॉडरेटर 1979 से पत्रकारिता से जुड़े हैं. एक साप्ताहिक से शुरूआत के बाद अस्सी के दशक में स्वतंत्र पत्रकार बतौर खोजी पत्रकारिता में कदम रखा, हिंदी के अधिकांश राष्ट्रीय अख़बारों में हस्ताक्षर. उसी दौरान राजस्थान के अजमेर जिले के एक सशक्त राजनैतिक परिवार द्वारा एक युवती के साथ किये गए खिलवाड़ पर नवभारत टाइम्स के लिए लिखी रिपोर्ट वरिष्ठ पत्रकार श्री मिलाप चंद डंडिया की पुस्तक "मुखौटों के पीछे - असली चेहरों को उजागर करते पचास वर्ष" में भी संकलित की गयी है. कुछ समय के लिए चौथी दुनियां के मुख्य उपसंपादक रहे किन्तु नौकरी कर पाने के लक्खन न होने से तेईस दिन में ही चौथी दुनिया को अलविदा कह आये. नब्बे के दशक से पिछले दशक तक दूरदर्शन पर समसामयिक विषयों पर प्रायोजित श्रेणी में कार्यक्रम बनाते रहे. अब वैकल्पिक मीडिया पर सक्रिय.
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