भगवान कृष्ण की नगरी वृंदावन में पत्रकारों के आगे घुटने टेकने पड़े ओपरा को

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वाह ताज..! मथुरा के बाद आगरा पहुंची ओपरा विनफ्रे

भारत के अपने पहले दौरे में अमेरिकी टॉक शो क्वीन ओपरा विनफ्रे का बेशक जोरदार स्वागत हुआ हो, भगवान कृष्ण की नगरी वृंदावन में उन्हें पत्रकारों के आगे घुटने टेकने ही पड़े। ओपरा भारतीय विधवा महिलाओं की कथित दुर्दशा पर नए टीवी कार्यक्रम की शूटिंग कर रही थीं। इसी दौरान उनके बाडीगार्डों की स्थानीय पत्रकारों के साथ झड़प हो गई।

पुलिस ने बताया कि विनफ्रे के दौरे को कवर कर रहे मीडियाकर्मियों की कुछ वीडियो कैमरा कथित रूप से टूटने की शिकायत के बाद विनफ्रे के तीन भारतीय सुरक्षाकर्मियों को गिरफ्तार कर लिया गया। बाद में सुरक्षाकर्मियों ने पत्रकारों से लिखित माफी मांगी, तब जा कर उन्हें रिहा कर दिया गया।

ओपरा विनफ्रे दो अमेरिकी सुरक्षाकर्मियों और एक दर्जन से अधिक भारतीय सुरक्षाकर्मी के साथ वृंदावन पहुंची थी। उन्होंने तड़के पत्थरपुरा स्थित ‘भगवान भजनाश्रम’ पहुंचकर विधवा महिलाओं पर वृत्तचित्र फिल्माया। वह अपने नये शो ‘नेक्स्ट चैप्टर’ की शूटिंग के सिलसिले में भारत में हैं।

उन्होंने बताया कि बाद में ‘मां धाम’ (विधवा एवं परित्यक्त महिलाओं के लिये संचालित आश्रय) गई। वहां सुबह आठ बजे से ही कड़ाके की ठंढ में सभी महिलाओं को लॉन में बैठा कर शूटिंग की जा रही थी। पुलिस के अनुसार, दो अमेरिकी सुरक्षागार्डों सहित दर्जन भर से अधिक सुरक्षाकर्मियों ने मीडियाकर्मियों को ‘मां धाम’ से
निकाल दिया।

अपर पुलिस अधीक्षक राम किशोर के मुताबिक दोनों ही स्थल शूटिंग के लिये प्रतिबंधित नहीं है, जबकि बांके बिहारी मंदिर आदि कुछ स्थानों पर शूटिंग में आपत्ति है तो वहां बिना इजाजत ऐसी शूटिंग नहीं की जा सकती है। उन्होंने बताया कि इसके बाद ओपरा विनफ्रे की टीम शूटिंग के लिये आगरा रवाना हो गई।

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मीडिया दरबार के मॉडरेटर 1979 से पत्रकारिता से जुड़े हैं. एक साप्ताहिक से शुरूआत के बाद अस्सी के दशक में स्वतंत्र पत्रकार बतौर खोजी पत्रकारिता में कदम रखा, हिंदी के अधिकांश राष्ट्रीय अख़बारों में हस्ताक्षर. उसी दौरान राजस्थान के अजमेर जिले के एक सशक्त राजनैतिक परिवार द्वारा एक युवती के साथ किये गए खिलवाड़ पर नवभारत टाइम्स के लिए लिखी रिपोर्ट वरिष्ठ पत्रकार श्री मिलाप चंद डंडिया की पुस्तक "मुखौटों के पीछे - असली चेहरों को उजागर करते पचास वर्ष" में भी संकलित की गयी है. कुछ समय के लिए चौथी दुनियां के मुख्य उपसंपादक रहे किन्तु नौकरी कर पाने के लक्खन न होने से तेईस दिन में ही चौथी दुनिया को अलविदा कह आये. नब्बे के दशक से पिछले दशक तक दूरदर्शन पर समसामयिक विषयों पर प्रायोजित श्रेणी में कार्यक्रम बनाते रहे. अब वैकल्पिक मीडिया पर सक्रिय.
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