/* */

शहीदों को शर्मिंदा करने की अपराधी है ये टीम अन्ना

Page Visited: 177
0 0
Read Time:7 Minute, 36 Second

-सतीश चन्द्र मिश्र ||

9 माह तक देश में चले जनलोकपाली ड्रामे का विश्वासघाती शर्मनाक पटाक्षेप 29 दिसम्बर की रात्रि को हो गया. लोक्संभा में लंगड़े-लूले अधकचरे लोकपाल बिल को जैसे तैसे पास करके, राज्यसभा में उसको अजन्मी संतान का जीवन देकर केंद्र की कांग्रेस गठबंधन सरकार ने अपना वायदा पूरा करने की औपचारिकता अत्यंत कुटिलता पूर्वक पूर्ण करने में सफलता पायी. इस अजन्मी संतान की दाई के रूप में पिछले 9 महीनों से चीख पुकार मचाती रही टीम अन्ना और उसके सरगना अन्ना हजारे इस अजन्मी संतान के जन्म के इस निर्णायक अवसर से ठीक पहले मैदान छोड़ कर भाग खड़े हुए थे. उनके इस कायरतापूर्ण पलायन ने सरकारी साजिश की सफलता की राह बहुत आसान कर दी थी. इस टीम अन्ना की प्रत्येक गतिविधि पर सतर्क नज़र रखते रहे देश के जागरूक नागरिकों को निर्णायक मौके पर इस टीम द्वारा मैदान छोड़ कर भाग खड़े होने की करतूत पर कोई आश्चर्य नहीं हुआ है. 

पिछले दिनों दिल्ली में बढ़ी जबर्दस्त ठंड से घबरा कर अन्ना हजारे और “अन्ना टीम” अपना “लोकपाली मजमा” लगाने सजाने के लिए मुंबई पहुंची थी. ये है हमारे कलियुगी विवेकानंद-भगत सिंह-सुखदेव-राजगुरु उर्फ़ अन्ना हजारे उर्फ़ अन्ना गैंग का सच.

ध्यान रहे कि ये “अन्ना टीम” और स्वयं अन्ना हजारे देश के सामने अपनी बडबोली बयानबाजी के द्वारा बार बार लगातार खुद को छत्रपति शिवाजी और अमर शहीद भगत सिंह, सुखदेव राजगुरु जैसा ही बताने की कोशिश करते रहे है. खुद को उन अज़र अमर शहीदों का वास्तविक वारिस, असली अनुयायी भी बताते रहे हैं. “दिल दिया है जाँ भी देंगे, ऐ वतन तेरे लिए” सरीखे फिल्मी गाने भी अपने मंचों से खुद अन्ना हजारे तथा “अन्ना टीम” गाती-बजाती रही है. इसलिए इन निर्लज्जों को स्मरण कराना आवश्यक है कि शिवाजी और भगत सिंह तथा उनके अमरशहीद बलिदानी साथियों ने देश के लिए खुद को हँसते-हँसते बलिदान कर दिया था. वे अमर बलिदानी इन जनलोकपाली जालसाजों कायरों-किन्नरों की तरह ठंड से डर कर भाग खड़े होने वाले गद्दार नहीं थे, अतः उन शहीदों के समकक्ष खुद को खड़ा करने के धूर्त प्रयास कर के इस पूरे गैंग ने उन अमर बलिदानियों की अनमोल अद्वितीय अदभुत “बलिदान कथाओं” को कलंकित और अपमानित ही किया है.

प्रश्न स्वाभाविक है कि इस  कलियुगी  विवेकानंद-भगत सिंह-सुखदेव-राजगुरु उर्फ़ अन्ना हजारे उर्फ़ अन्ना टीम को जब दिल्ली की ठंड से घबरा कर दिल्ली से कहीं बहुत दूर जाकर ही अनशन करना था तो ये अनशन करने अपने गाँव रालेगन सिद्धि में ही क्यों नहीं बैठे….?  क्योंकि खुद अन्ना हजारे और टीम अन्ना का तो दावा है की पूरा देश, यानि 121 करोड़ देशवासी इसके “जन लोकपाली” ड्रामे के दीवाने हैं और इस गिरोह द्वारा छल बल झूठ फरेब के सहारे बेचे जा रहे घोर असंवैधानिक ”जनलोकपाली” भांग के प्याले…!!! के नशे में चूर हैं,  तो फिर तो इनके गाँव में भी जनलोकपाली नशेड़ियों की भीड़ लग ही जाती…!!! लेकिन इनको मालूम था की लाखों झूठ फरेब के बावजूद भी इस देश के अधिकांश देशवासी इनके जनलोकपाली भांग के प्याले को पसंद नहीं करते हैं बल्कि उस से

नफरत करते हैं. इसलिए इनको अपने गाँव में रालेगन सिद्धि में रहने वाले डेढ़ दो हज़ार “बंधुआ” लोगों के अतिरिक्त अन्य समर्थकों की तलाश करने में छींकें आ जाती. इसके विपरीत इस टीम को यह पूर्ण विश्वास था कि डेढ़ से दो करोड़ की आबादी वाली मुंबई में अन्ना हजारे के पुराने “यार” राज ठाकरे के दस पांच हज़ार लफंगों के साथ ही साथ दस पंद्रह हज़ार की कुछ और भीड़ का जुगाड़ आसानी से हो जाएगा क्योंकि मुंबई में फुटपाथों और रेलवे स्टेशनों पर सोकर रात बिताने वालों की संख्या ही लाखों में हैं, ऐसे लोगों को दो तीन दिनों तक मुफ्त के खाने के साथ ही गीत संगीत से सजे उत्सवी वातावरण में उठने-बैठने सोने का यह जनलोकपाली “जुगाड़” काफी पसंद आएगा. ध्यान रहे कि अगस्त में रामलीला मैदान के जनलोकपाली मजमें में 15 रुपये लीटर वाली मिनरल वाटर की बोतल तथा बेहतरीन लंच और डिनर पैकेट ताज़े फलों के साथ पूरे 12 दिनों तक अपार दरियादिली से निशुल्क बांटे गए थे. लेकिन अगस्त से दिसम्बर के बीच इस पूरे गैंग की असलियत देश भली-भांति देख सुन रहा था. इनकी देश विरोधी करतूतों से परिचित हो रहा था.  और इस गैंग के विषय में फैसला भी कर  चुका था. परिणाम स्वरुप जब भारत माता के शीश काश्मीर को काट कर पाकिस्तानी गोद में डाल देने की जिद्द करने वाले गद्दारों, पाकिस्तानी आतंकियों के हमदर्दों, अफज़ल गुरु की जान पर अपनी जान छिड़कने वाले राष्ट्र विरोधी पाकिस्तानी एजेंटों, भारतीय सेना को अन्तराष्ट्रीय मंचों पर अपमानित लांक्षित करने और गालियाँ देने वाले राष्ट्रविरोधी दलालों और देवाधिदेव महादेव भगवान् शंकर का उपहास उड़ाने वाले दानवों के साथ अन्ना हजारे का जनलोकपाली जमावड़ा जब बहुत बड़े मीडियाई तामझाम के साथ मुंबई पहुंचा और केवल तीन दिनों के लिए 19 लाख रुपये…!!! के किराये परआलीशान 5 स्टार मैदान पंडाल सजाकर अपने जनलोकपाली मजमे का गोरखधंधा शुरू किया तब  जनता ने उसको, उसके जमावड़े को तथा उनके द्वारा की जा रही जनलोकपाली भांग के प्याले की मार्केटिंग को अपनी जोरदार ठोकर के साथ ठुकरा दिया

About Post Author

admin

मीडिया दरबार के मॉडरेटर 1979 से पत्रकारिता से जुड़े हैं. एक साप्ताहिक से शुरूआत के बाद अस्सी के दशक में स्वतंत्र पत्रकार बतौर खोजी पत्रकारिता में कदम रखा, हिंदी के अधिकांश राष्ट्रीय अख़बारों में हस्ताक्षर. उसी दौरान राजस्थान के अजमेर जिले के एक सशक्त राजनैतिक परिवार द्वारा एक युवती के साथ किये गए खिलवाड़ पर नवभारत टाइम्स के लिए लिखी रिपोर्ट वरिष्ठ पत्रकार श्री मिलाप चंद डंडिया की पुस्तक "मुखौटों के पीछे - असली चेहरों को उजागर करते पचास वर्ष" में भी संकलित की गयी है. कुछ समय के लिए चौथी दुनियां के मुख्य उपसंपादक रहे किन्तु नौकरी कर पाने के लक्खन न होने से तेईस दिन में ही चौथी दुनिया को अलविदा कह आये. नब्बे के दशक से पिछले दशक तक दूरदर्शन पर समसामयिक विषयों पर प्रायोजित श्रेणी में कार्यक्रम बनाते रहे. अब वैकल्पिक मीडिया पर सक्रिय.
Happy
Happy
0 %
Sad
Sad
0 %
Excited
Excited
0 %
Sleepy
Sleepy
0 %
Angry
Angry
0 %
Surprise
Surprise
0 %
Facebook Comments

Average Rating

5 Star
0%
4 Star
0%
3 Star
0%
2 Star
0%
1 Star
0%

2 thoughts on “शहीदों को शर्मिंदा करने की अपराधी है ये टीम अन्ना

प्रातिक्रिया दे

आपका ईमेल पता प्रकाशित नहीं किया जाएगा. आवश्यक फ़ील्ड चिह्नित हैं *

This site uses Akismet to reduce spam. Learn how your comment data is processed.

%d bloggers like this:
Visit Us On TwitterVisit Us On FacebookVisit Us On YoutubeVisit Us On LinkedinCheck Our FeedVisit Us On Instagram