इमैजिन के बाद एनडीटीवी इंडिया बिकने की राह पर?

admin
Read Time:2 Minute, 57 Second

मीडिया के बाजार में सबकुछ बिकने को तैयार है। कोई अखबार, रेडियो चैनल या फिर टीवी.. आपकी जेब में पैसे भर होने चाहिए, आप किसी इंसान से उसका नाम तक खरीद सकते हैं।  कुछ साल पहले जब इंडिया टुडे ग्रुप ने अपने बहु प्रचारित रेडियो चैनल रेड एफएम बेचा तो किसी को यकीन नहीं हुआ कि इतना बड़ा ग्रुप भी एक स्थापित ब्रैंड नेम बेच सकता है। बाद में श्री अधिकारी ब्रदर्स ने अपने नाम का चैनल सब टीवी और एनडीटीवी ने एनडीटीवी-इमैजिन बेचा तब इस मुद्दे पर थोड़ी बहुत चर्चा हुई थी, लेकिन अब जो खबर आई है वह और भी चौंकाने वाली है। खबर है कि एनडीटीवी अपना हिंदी चैनल एनडीटीवी इंडिया बेचने की तैयारी में है। चर्चा है कि इस सफेद हाथी को खरीदने वाले और कोई नहीं, मैनेज़मेंट गुरु अरिंदम चौधुरी हैं चो पहले ही कई भाषाओं में छपने (और न बिकने) वाली पत्रिकाओं के मीडिया समूह के मालिक हैं।

दरअसल एनडीटीवी इंडिया सफेद हाथी इलनिए भी बन गया है कि वहां कई दर्ज़न महंगे लोगों की भरमार हो गई है। प्रणॉय रॉय की उदारवादी नीति का नतीज़ा यह है कि टीआरपी में कभी पांचवी सीढ़ी से उपर न चढ़ पाने वाले इस चैनल में करीब ढाई दर्ज़न लोग तीन लाख से उपर तनख्वाह पा रहे हैं। हालांकि एंट्री लेवल वालों की भी सैलेरी कम नहीं है, लेकिन उन्हें इस मोटी मलाई खाने वालों के मुकाबले कहीं ज्यादा काम करने पड़ता है। मनोरंजन भारती और रवीश कुमार को मिले वाले मोटे मेहनताने पर कम ही लोग नाक-भौंह सिकोड़ते हैं, लेकिन जब सिर्फ एक टॉक शो की एंकरिंग करने वाले अभिज्ञान प्रकाश को सिर्फ सीनीयरिटी के कारण तीन लाख से उपर की आमदनी मिलती है तो चैनल के किसी स्टाफ को गवारा नहीं गुजरता।

मिली जानकारी के मुताबिक अरिंदम चौधुरी ने खरीदने से पहले इस सफेद हाथी का वजन कम करने की शर्त रखी है और तभी वे इसे खरीदेंगे जब इसे चलाने पर आने वाला खर्च कम हो जाए। शायद एनडीटीवी में इन दिनों इसी दबाव के कारण जोर-शोर से छंटनी का काम जोरों से चल रहा है।

0 0

About Post Author

admin

मीडिया दरबार के मॉडरेटर 1979 से पत्रकारिता से जुड़े हैं. एक साप्ताहिक से शुरूआत के बाद अस्सी के दशक में स्वतंत्र पत्रकार बतौर खोजी पत्रकारिता में कदम रखा, हिंदी के अधिकांश राष्ट्रीय अख़बारों में हस्ताक्षर. उसी दौरान राजस्थान के अजमेर जिले के एक सशक्त राजनैतिक परिवार द्वारा एक युवती के साथ किये गए खिलवाड़ पर नवभारत टाइम्स के लिए लिखी रिपोर्ट वरिष्ठ पत्रकार श्री मिलाप चंद डंडिया की पुस्तक "मुखौटों के पीछे - असली चेहरों को उजागर करते पचास वर्ष" में भी संकलित की गयी है. कुछ समय के लिए चौथी दुनियां के मुख्य उपसंपादक रहे किन्तु नौकरी कर पाने के लक्खन न होने से तेईस दिन में ही चौथी दुनिया को अलविदा कह आये. नब्बे के दशक से पिछले दशक तक दूरदर्शन पर समसामयिक विषयों पर प्रायोजित श्रेणी में कार्यक्रम बनाते रहे. अब वैकल्पिक मीडिया पर सक्रिय.
Happy
Happy
0 %
Sad
Sad
0 %
Excited
Excited
0 %
Sleppy
Sleppy
0 %
Angry
Angry
0 %
Surprise
Surprise
0 %
Facebook Comments
No tags for this post.

Average Rating

5 Star
0%
4 Star
0%
3 Star
0%
2 Star
0%
1 Star
0%

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

This site uses Akismet to reduce spam. Learn how your comment data is processed.

Next Post

आज कुछ नहीं मेरे भाई आज सिर्फ महंगाई

विजय पाटनी – लो फिर दाम बढ़ गए है , सुना है हमारे मनमोहन सिंह जी  अर्थशास्त्री है , और वो व्यर्थ में कुछ करते नहीं है , सही है , अब कसाब भाई जान का और तिहाड़ में इतने बड़े बड़े vip लोग बैठे है तो उनका रोज का […]
Facebook
%d bloggers like this: