CNN-IBN के पुरस्कार समारोह में चेक लेंगे करोड़पति सुशील: कहा, ”नहीं हुई धांधली”

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कौन बनेगा करोड़पति-5 (केबीसी-5) के विजेता सुशील कुमार ने मंगलवार को उन खबरों को खारिज किया जिनमें कहा जा रहा था कि उन्हें पांच करोड़ रुपये की पुरस्कार राशि नहीं दी जा रही है। सुशील का कहना है कि शो के प्रसारक सोनी चैनल के अधिकारी उनके लगातार सम्पर्क में हैं और उन्हें उन पर पूरा विश्वास है।

बिहार के मोतिहारी के रहने वाले सुशील ने कहा, “मैंने ऐसा कभी नहीं कहा कि मुझे पुरस्कार राशि का एक सिक्का भी नहीं मिला। चैनल ने मुझसे पहले ही कह दिया था कि 60 दिन के अंदर मुझे पुरस्कार राशि दी जाएगी और अभी यह अवधि पूरी नहीं हुई है।”

इसी सप्ताह कुछ अखबारों में प्रकाशित रिपोर्टों के मुताबिक सुशील ने कहा था कि जब से उन्होंने शो में इतनी बड़ी राशि जीती है, तब से वित्तीय मदद के लिए लोग लगातार उनसे सम्पर्क कर रहे हैं। दूसरी ओर अब तक उन्हें कोई पैसा नहीं मिला है इसलिए वह किसी की मदद नहीं कर पा रहे हैं। इतना ही नहीं, इंडिया टीवी समेत कई चैनलों ने उनकी इस बाइट को काट कर भी बार-बार चलाया था जिससे लोगों के मन में तरह-तरह के सवाल उठने लगे थे।

यह रिपोर्ट आने के बाद से लोग फेसबुक और ट्विटर पर इस संबंध में सवाल पूछने लगे थे। कुछ लोगों ने शो के सुपर स्टार होस्ट अमिताभ बच्चन से बी सवाल पूछ लिया था। अमिताभ ने ट्विटर पर जवाब दिया था, “लोग पूछ रहे हैं कि सुशील कुमार को केबीसी के विजेता के रूप में उनके द्वारा जीती गई राशि क्यों नहीं दी गई, लेकिन वह सीएनएन-आईबीएन पुरस्कार समारोह में 16 तारीख को यह चेक ग्रहण करना चाहते थे।”

उन्होंने लिखा, “सोनी टीवी के नियमों व शर्तों के मुताबिक शो के प्रसारण के बाद 60 दिन के अंदर सुशील को यह चेक दिया जाना है। अभी चेक देने की तय अवधि समाप्त नहीं हुई है।”

सुशील शो में पांच करोड़ रुपये की राशि जीतने वाले पहले प्रतिभागी बनकर नवंबर में सुर्खियों में छा गए थे। अब खुद सुशील ने इस रिपोर्ट को खारिज किया है। उन्होंने कहा, “चैनल अधिकारी लगातार मेरे सम्पर्क में हैं और मुझे जानकारियां देते रहते हैं। प्रक्रिया जारी है। मैंने कभी नहीं कहा कि चैनल की ओर से मेरे पास कोई जानकारी नहीं है या उन्होंने मुझसे सम्पर्क नहीं किया। मुझे चैनल पर पूरा विश्वास है कि मुझे वहां से पैसा मिलेगा।”

केबीसी में जीत हासिल करने से पहले सुशील एक कम्प्यूटर ऑपरेटर के तौर पर काम करते थे और ट्यूशन पढ़ाते थे। वह मुश्किल से प्रतिमाह 6,000 रुपये कमा पाते थे।

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मीडिया दरबार के मॉडरेटर 1979 से पत्रकारिता से जुड़े हैं. एक साप्ताहिक से शुरूआत के बाद अस्सी के दशक में स्वतंत्र पत्रकार बतौर खोजी पत्रकारिता में कदम रखा, हिंदी के अधिकांश राष्ट्रीय अख़बारों में हस्ताक्षर. उसी दौरान राजस्थान के अजमेर जिले के एक सशक्त राजनैतिक परिवार द्वारा एक युवती के साथ किये गए खिलवाड़ पर नवभारत टाइम्स के लिए लिखी रिपोर्ट वरिष्ठ पत्रकार श्री मिलाप चंद डंडिया की पुस्तक "मुखौटों के पीछे - असली चेहरों को उजागर करते पचास वर्ष" में भी संकलित की गयी है. कुछ समय के लिए चौथी दुनियां के मुख्य उपसंपादक रहे किन्तु नौकरी कर पाने के लक्खन न होने से तेईस दिन में ही चौथी दुनिया को अलविदा कह आये. नब्बे के दशक से पिछले दशक तक दूरदर्शन पर समसामयिक विषयों पर प्रायोजित श्रेणी में कार्यक्रम बनाते रहे. अब वैकल्पिक मीडिया पर सक्रिय.
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