/* */

ये जनता के दिल का गुबार है, निकल जाने दीजिए वर्ना थप्पड़ तैयार है

Page Visited: 16
0 0
Read Time:4 Minute, 36 Second

फेसबुक पर फेस बचाने के लिए सोशल नेटवर्किंग साइटों पर रोक लगाने की मंशा के लिए कांग्रेसी नेता और आईटी मंत्री कपिल सिबल ने उनकी बैठक क्या बुलाई, उन पर शब्दबाणों के बौछार पड़ने लगे हैं। कोई उन्हें कायर कह रहा है तो कोई बेतुका, लेकिन आश्चर्य की बात यह है कि उनके धुर विपक्षी दल यानी भारतीय जनता पार्टी ने भी इस मुद्दे पर उनका साथ देने का फैसला किया है।

साफ है लोगों की गालियां सुनने में सभी दलों के नेताओ को लगभग बराबरी का दर्ज़ा हासिल है। इंटनेट एक फ्री प्लेटफॉर्म है और इस पर लिखे गए कमेंट या की गई निंदा को पढ़ना जितना आसान है हटाना उतना ही मुश्किल। कई बार सोशल नेटवर्किंग साइटों पर लिखे गए लेखों या कमेंटों का जवाब देना भी संभव नहीं होता।

दरअसल कुछ सोशल नेटवर्किंग साइट्स पर कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह को लेकर अश्लील तस्वीरें और अपशब्द जारी हुए थे। लाख कोशिशों के बावजूद जब कांग्रेस समर्थक आईटी विशेषज्ञ उन्हें हटा नहीं पाए तो उन्होंने आई टी मंत्री कपिल सिब्बल का दरवाजा खटखटाया।

उधर सोशल नेटवर्किंग साइट्स ऐसी किसी निगरानी के तहत काम नहीं करना चाहतीं। गूगल जैसी कंपनी ने साफ इन्कार करते हुए कहा है कि वह सिर्फ इसलिए किसी सामग्री को नहीं हटाएगी, कि वह विवादास्पद है। गूगल ने कहा है कि वह कानून का पालन कर रही है। साइबर कानून के विशेषज्ञों का भी मानना है कि इस तरह की निगरानी व्यावहारिक नहीं होगी।

वैसे तो किसी भी आम या खास हस्ती की सोशल नेटवर्किंग साइट पर धज्जियां उड़ाई जा सकती है, लेकिन इन दिनों राजनेता खास निशाने पर हैं। इन साइटों के जरिए महंगाई, कुशासन, घोटालों और अपराध से त्रस्त आम आदमी अपना गुस्सा उतारने के लिए इन राजनेताओं को आइना दिखाने की कोशिश करता है।

कई राजनेताओं ने अपने लिए आईटी विशेषज्ञों को रख कर खास साइबर प्रचार विभाग तक बना लिए हैं। ये विशेषज्ञ सोशल नेटवर्किंग साइटों पर उनके खिलाफ हुई टिप्पणियों को हटाने या उनका जवाब देने का काम करते हैं। अश्लील टिप्पणियों के लिए लगभग हर नेटवर्किंग साइट में ‘रिपोर्ट ऐब्यूज़’ जैसे ऑप्शन मौजूद हैं, लेकिन यह रिपोर्ट इस बात की गारंटी नहीं होते की उक्त टिप्पणी को वास्तव में हटा ही लिया जाएगा, और फिर इसमें भी अच्छा खासा वक्त लगता है। खास बात यह है कि ये रिपोर्ट केवल टिप्पणी या लेख के अश्लील होने की दशा में ही काम करता है, शालीन भाषा में किए गए चरित्रहनन पर नहीं।

अब सवाल यह उठता है कि अखबार और टीवी को पेड न्यूज़ जैसे उपायों से मैनेज़ करने की आदत रखने वाले ये नेता करें तो क्या करें? हर राज्य में अलग-अलग पार्टियों की सरकार है। कोई यहां पब्लिक के गुस्से का शिकार है तो कोई वहां।

जनता को खुश रखने के लिए बढ़िया काम करने की बजाय इन नेताओं को सबसे बढ़िया उपाय एक कानूनी चाबुक ही लग रहा है, लेकिन वे शायद भूल रहे हैं कि अगर आम-आदमी को अपनी भड़ास निकालने के लिए फेसबुक और गूगल प्लस जैसे ऑप्शन नहीं दिए गए तो हर दिन किसी न किसी गली में कोई न कोई नौजवान किसी न किसी राजनेता को थप्पड़ रसीद करता नजर आएगा।

About Post Author

admin

मीडिया दरबार के मॉडरेटर 1979 से पत्रकारिता से जुड़े हैं. एक साप्ताहिक से शुरूआत के बाद अस्सी के दशक में स्वतंत्र पत्रकार बतौर खोजी पत्रकारिता में कदम रखा, हिंदी के अधिकांश राष्ट्रीय अख़बारों में हस्ताक्षर. उसी दौरान राजस्थान के अजमेर जिले के एक सशक्त राजनैतिक परिवार द्वारा एक युवती के साथ किये गए खिलवाड़ पर नवभारत टाइम्स के लिए लिखी रिपोर्ट वरिष्ठ पत्रकार श्री मिलाप चंद डंडिया की पुस्तक "मुखौटों के पीछे - असली चेहरों को उजागर करते पचास वर्ष" में भी संकलित की गयी है. कुछ समय के लिए चौथी दुनियां के मुख्य उपसंपादक रहे किन्तु नौकरी कर पाने के लक्खन न होने से तेईस दिन में ही चौथी दुनिया को अलविदा कह आये. नब्बे के दशक से पिछले दशक तक दूरदर्शन पर समसामयिक विषयों पर प्रायोजित श्रेणी में कार्यक्रम बनाते रहे. अब वैकल्पिक मीडिया पर सक्रिय.
Happy
Happy
0 %
Sad
Sad
0 %
Excited
Excited
0 %
Sleepy
Sleepy
0 %
Angry
Angry
0 %
Surprise
Surprise
0 %
Facebook Comments

Average Rating

5 Star
0%
4 Star
0%
3 Star
0%
2 Star
0%
1 Star
0%

2 thoughts on “ये जनता के दिल का गुबार है, निकल जाने दीजिए वर्ना थप्पड़ तैयार है

प्रातिक्रिया दे

आपका ईमेल पता प्रकाशित नहीं किया जाएगा. आवश्यक फ़ील्ड चिह्नित हैं *

This site uses Akismet to reduce spam. Learn how your comment data is processed.

%d bloggers like this:
Visit Us On TwitterVisit Us On FacebookVisit Us On YoutubeVisit Us On LinkedinCheck Our FeedVisit Us On Instagram