अन्ना हज़ारे का फेसबुक पेज़ गायब हुआ, समर्थकों ने कहा सरकार की ‘मिलीभगत’

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सोमवार को सोशल नेटवर्किग वेबसाइट फेसबुक और अन्ना समर्थकों में जम कर ठनी। फेसबुक ने इस आंदोलन की सारी सामग्री अपनी साइट से हटा कर इसका अकाउंट जाम कर दिया था। इस पर अन्ना समर्थक पूरे दिन दूसरी सोशल नेटवर्किग वेबसाइट ट्विटर के जरिए फेसबुक पर इसे बहाल करने का दबाव बनाते रहे।

दिलचस्प बात ये रही कि अन्ना समर्थक इसके लिए ट्विटर और दूसरी नेटवर्किंग साइटों पर सरकार को कोसते नजर आए। आखिरकार फेसबुक ने टीम अन्ना को ई-मेल कर भरोसा दिलाया कि यह सिर्फ तकनीकी कारण से हुआ। जल्दी ही वह इसे पहले की तरह चालू कर देगा। हालांकि देर रात पेज पूर्व स्थिति में आ गया था।

सोमवार की सुबह से फेसबुक पर ‘इंडिया अगेंस्ट करप्शन’ का कम्यूनिटी पेज ठप कर दिए जाने पर टीम अन्ना की सदस्य किरण बेदी ने हैरानी जताई है। इन्होंने ट्विटर पर लिखा, ”आंदोलन का फेसबुक पेज गायब है। क्यों हुआ पता नहीं? किसने किया पता नहीं? ये तो कमाल है..।” कम्युनिटी पेज को चलाने वाले शिवेंद्र सिंह चौहान कहते हैं उन्होंने सुबह साढ़े सात बजे ध्यान दिया कि लगातार कोशिश करने के बाद भी वे इस पर कुछ पोस्ट नहीं कर पा रहे। कुछ घंटे के बाद पूरा पेज ही गायब हो गया।

यह फेसबुक के दुनिया भर के सबसे लोकप्रिय पेज में से है। इसके पांच लाख चालीस हजार से भी अधिक चहेते हैं। फेसबुक अश्लील सामग्री परोसने वालों के अलावा किसी समुदाय या नस्ल के खिलाफ आक्रामक सामग्री डालने वालों के खाते भी अक्सर बंद कर दिया करती है। ऐसी आशंका के बारे में पूछे जाने पर शिवेंद्र ने कहा कि कोई भी कम्युनिटी पेज किसी की भी टिप्पणी के लिए खुला होता है। किसी भी दूसरे पेज की तरह हमारे पेज पर भी कोई ऐसी टिप्पणी कर सकता था। मगर हम यहां तक कि मजाकिया लहजे में डाली गई टिप्पणियों और तस्वीरों को भी तुरंत हटा दिया करते थे।

उधर, ट्विटर पर बड़ी संख्या में लोग ‘रीस्टोर आइएसी एफबी पेज’ संदेश ट्वीट कर एफबी के इस कदम का विरोध करते रहे। स्टॉकनिन्जा डॉट काम के सह संस्थापक सौरभ बघेल ने अपने ट्वीट में इसे सरकार की नई ‘वेब सेंसरशिप’ बताया है। वहीं एक समर्थक सूरज चोखानी ने लिखा है कि ‘ऐसी डर्टी ट्रिक से कुछ नहीं होगा। लोग दिल्ली को तहरीर चौक बना देंगे, तब क्या सरकार करोड़ों लोगों के मुंह सी देगी?’

उल्लेखनीय है कि पिछले दिनों विख्यात अंग्रेजी लेखक सलमान रुश्दी ने अपना फेसबुक खाता बंद कर दिए जाने के बाद वेबसाइट के संस्थापक मार्क जुकरबर्ग पर सीधे हमलावर टिप्पणियां की थीं। रुश्दी के दबाव के बाद फेसबुक ने यह खाता बहाल कर दिया था।

 

 

(पोस्ट जागरण पर आधारित)

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मीडिया दरबार के मॉडरेटर 1979 से पत्रकारिता से जुड़े हैं. एक साप्ताहिक से शुरूआत के बाद अस्सी के दशक में स्वतंत्र पत्रकार बतौर खोजी पत्रकारिता में कदम रखा, हिंदी के अधिकांश राष्ट्रीय अख़बारों में हस्ताक्षर. उसी दौरान राजस्थान के अजमेर जिले के एक सशक्त राजनैतिक परिवार द्वारा एक युवती के साथ किये गए खिलवाड़ पर नवभारत टाइम्स के लिए लिखी रिपोर्ट वरिष्ठ पत्रकार श्री मिलाप चंद डंडिया की पुस्तक "मुखौटों के पीछे - असली चेहरों को उजागर करते पचास वर्ष" में भी संकलित की गयी है. कुछ समय के लिए चौथी दुनियां के मुख्य उपसंपादक रहे किन्तु नौकरी कर पाने के लक्खन न होने से तेईस दिन में ही चौथी दुनिया को अलविदा कह आये. नब्बे के दशक से पिछले दशक तक दूरदर्शन पर समसामयिक विषयों पर प्रायोजित श्रेणी में कार्यक्रम बनाते रहे. अब वैकल्पिक मीडिया पर सक्रिय.
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