ईरान में कुर्द वीरांगनाएं..

-राज ढल्ल।।


भारत-समेत दुनिया भर में नारी सशक्तिकरण और महिलाओं की बराबरी एक बड़ा मुद्दा है। दुनिया के बहुत से देशों में आज भी महिलाओं को कुछ खतरनाक सेवाओं में पुरुषवादी मानसिकता की वजह से नहीं रखा जाता है।

दूसरी तरफ कुर्द महिलाओ के कमांडो के दस्तों ने इन्ही ISIS के आतंकियों के मुख्य गढ़ में उनके दांत खट्टे किए..
आज इन खूबसूरत योद्धाओं का नाम दुनिया की सबसे खतरनाक योद्धाओं में शामिल है।

आखिर ये है कौन कुर्द.??

ईरान में कुर्द अपनी अलग पहचान के लिए लड़ते रहे हैं। 1979 की क्रांति के दौरान उन्होंने राजशाही के खिलाफ संघर्ष किया, लेकिन देश के इस्लामिक राष्ट्र बनने के बाद उनके लिए हालात और मुश्किल हो गए।

कुर्द लोग कुर्दिस्तान में तो बहुसंख्यक हैं, लेकिन ईरान में अल्पसंख्यक हैं। ईरानी और अजेरी मूल के लोगों के बाद ये तीसरी सबसे बड़ी आबादी हैं। देश में इनकी आबादी 80 लाख से एक करोड़ के बीच है।

सीरिया, ईरान, इराक और तुर्की में कुर्दों की करीब ढाई करोड़ आबादी है। ये लंबे समय से अपने लिए अलग राष्ट्र की मांग कर रहे हैं। ईरान के अलावा तुर्की और इराक में भी कुर्दों का हथियारबंद संघर्ष चल रहा है…

ISIS से किसी भी तरह का मुकाबला करने के लिए इन महिला कमांडो को हर तरह के हथियार और गोला-बारूद का प्रशिक्षण दिया गया। इराक की ये बहादुर कुर्दिश महिलाएं, कुर्दिश पेशमेर्गा फाइटर्स में शामिल थी..!! इराक के बर्लिन में इन्हें सैन्य प्रशिक्षण दिया गया..!!

आईएस लड़ाकों ने कभी सोचा भी नहीं होगा कि कुर्द दस्ते की ये लड़कियां उन पर इस कदर भारी पड़ेंगी। इन कुर्द लड़कियों ने चरमपंथियों के दांत खट्टे कर देंगी..

कुर्द, एक विवादास्पद इलाका है, जो इस्लामिक स्टेट के लड़ाकों से तो लड़ रहा है। ईरान, सीरिया और तुर्की सीमावर्ती इलाकों में कुर्द आबादी को अपने लिए खतरा मानते हैं। इन महिलाओं का कहना है कि कुर्दिस्तान एक है। उन्होंने इलाके के सारे कुर्दों की हिफाजत के लिए हथियार उठाए हैं।

कुर्द की इन महिला लड़ाकों के अनुसार वह दो मोर्चे पर लड़ रही हैं। पहला दुश्मन और दूसरा यौन हिंसा। कुर्द लड़ाके महिलाओं और पुरुषों के बीच भेदभाव नहीं करते हैं। महिला कुर्द लड़ाका कहती हैं कि वह किसी से कमजोर नही हैं। वह किसी भी परिस्थिति में और कहीं भी लड़ सकती हैं।

इन महिला योद्धाओं का आईएस लड़ाकों में कितना खौंफ था, इसका अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि फेशमेर्गा स्थित इनका ट्रेनिंग कैंप इस्लामिक स्टेट के प्रभाव वाले इलाके से महज 800 मीटर दूर है। बावजूद आईएस लड़ाके इनके कैंप के आसपास भी नहीं फटकते थे..!!

गोलियां की आवाज और बम धमाकों के बीच दुनिया की ये सबसे खतरनाक महिला सैनिक कुछ ऐसे पल भी निकाल लेती हैं, जब इनके चेहरे पर मुस्कुराहट दिखाई दे जाती है।

तनाव के इन मुश्किल पलों में भी इन खूबसूरत योद्धाओं की एन्ज्वॉय करती फोटो अक्सर सोशल मीडिया पर दिख जाती है..

2017 में आईएस ने इन्हीं कुर्द लड़ाकों में शामिल एक 23 वर्षीय लड़की जोआना पलानी को मारने पर 10 लाख डॉलर का ईनाम रखा था। इस लड़की ने अकेले आईएस के 100 से ज्यादा आतंकियों को ठिकाने लगाया है। कुर्दिश मूल की डैनिश महिला पलानी ने 2014 में पढ़ाई छोड़ दी थी। इसके बाद वह आईएस के खिलाफ जंग में उतर गई।

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