मत बनिए साइबर-मुजरिम और ना ही हों शिकार..


-सुनील कुमार।।

चंडीगढ़ के एक निजी विश्वविद्यालय में कल से भूचाल आया हुआ है। वहां लड़कियों के हॉस्टल में एक लडक़ी ने साठ लड़कियों के नहाते हुए वीडियो बना लिए, और उन्हें अपने एक दोस्त को भेज दिया। उस दोस्त ने ये वीडियो फैला दिए। कल जब यह मामला उजागर हुआ तो आठ छात्राओं की खुदकुशी की कोशिश करने की खबर है। इनमें से कुछ की हालत गंभीर है, कुछ बेहोश हैं। हालांकि कुछ खबरों में पुलिस का यह बयान भी है कि आत्महत्या की कोशिश किसी ने नहीं की है, लड़कियां महज बेहोश हैं। विश्वविद्यालय में देर रात से छात्रों का प्रदर्शन चल रहा है। शुरुआती खबरों में बताया गया है कि वीडियो बनाने वाली छात्रा के दोस्त ने ये वीडियो इंटरनेट पर भी डाल दिए, और सामाजिक शर्मिंदगी के खतरे में शायद लड़कियों ने आत्महत्या की कोशिश की है।

इस मामले के कई पहलू हैं, जिन्हें समझने की जरूरत है। एक गल्र्स हॉस्टल के भीतर ऐसी नौबत कैसे आई कि कोई लडक़ी अपने साथ की साठ छात्राओं का नहाते हुए वीडियो बना सके? दूसरी बात यह कि चाहे इससे निजता खत्म होती है, नहाना कोई जुर्म नहीं है, और नहाते हुए वीडियो फैल जाने से अगर कई छात्राओं को आत्महत्या करना जरूरी लग रहा है, तो यह समाज के भी सोचने की बात है कि उसने अश्लीलता के कैसे पैमाने बना रखे हैं कि महज नहाने के वीडियो से लड़कियों को आत्महत्या को मजबूर होना पड़े। फिर एक बड़ी बात यह भी है कि किसी यूनिवर्सिटी की छात्रा और उसके दोस्त को यह काम करते हुए यह नहीं सूझा कि आज टेक्नालॉजी की मेहरबानी से किसी भी किस्म का साइबर क्राईम शिनाख्त से परे नहीं रह पाता। रोजाना अखबारों में साइबर-जुर्म के मुजरिमों की गिरफ्तारी की खबरें आती हैं, उसके बाद भी लोग ऐसा जुर्म करने का खतरा नहीं समझ पाते हैं। सिर्फ यही एक घटना नहीं है, हिन्दुस्तान में हर कुछ हफ्तों में लोग गिरफ्तार होते हैं कि उन्होंने बच्चों के सेक्स-वीडियो इंटरनेट पर पोस्ट किए हैं। हर दिन दर्जन-दो दर्जन लोग साइबर-ठगी में गिरफ्तार होते हैं। इन सबकी खबरें भी छपती हैं। मामूली जानकारी रखने वाले लोगों को भी पता है कि किसी भी तरह के जुर्म में, साइबर-जुर्म की शिनाख्त सबसे तेज और सबसे आसान रहती है, और उसके सुबूत भी अदालतों में खड़े रहते हैं। यह सब होने के बाद भी आज लोग अगर दूसरों के नग्न वीडियो पोस्ट करने का खतरा उठा रहे हैं, तो ऐसे लोगों की साइबर-समझ पर भी तरस आता है, और यह साफ लगता है कि हिन्दुस्तान के लोगों को साइबर-जुर्म, करने से, और उसका शिकार बनने से बचाने के लिए अधिक जनजागरण की जरूरत है।

अब दो बहुत ही मामूली औजारों के बारे में बात करना जरूरी है। आज हिन्दुस्तान के अधिकतर हाथों मेें ऐसे मोबाइल फोन हैं जिनसे तस्वीरें खींची जा सकती हैं, वीडियो बनाए जा सकते हैं, और बातचीत रिकॉर्ड की जा सकती है। जिंदगी की निजता को खत्म करने का यह एक बड़ा हथियार है, जो कि दिखता एक मासूम औजार है। लोगों को अपने फोन के ऐसे इस्तेमाल से बचना चाहिए जिसके खिलाफ कोई शिकायत होने पर उनके फोन और कम्प्यूटर सबसे पहले जब्त हो जाएं। आईटी एक्ट के तहत शिकायत होने पर पहली नजर में जुर्म दिखने पर तुरंत ही लोगों के ये उपकरण जब्त होते हैं, और शिकायतकर्ता से परे भी दर्जनों लोगों की निजी जानकारी किसी भी फोन या कम्प्यूटर पर हो सकती है। जांच एजेंसियों में भी लोगों के हाथ दूसरे लोगों की ऐसी जानकारी पहुंचना ठीक नहीं है। इसलिए ऐसी किसी भी नौबत के बारे में सोचकर लोगों को यह चाहिए कि वे अपने फोन, कम्प्यूटर, सोशल मीडिया अकाऊंट, ईमेल का इस्तेमाल सावधानी से करें क्योंकि कोई दूसरे लोग भी इनका बेजा इस्तेमाल करते हैं, तो सबसे पहले आप खुद फंसते हैं। और जिसकी शिकायत होगी उससे परे भी बहुत सारे लोगों की जिंदगी इससे मुश्किल हो सकती है।

हिन्दुस्तान में आज हालत यह है कि झारखंड के जामताड़ा नाम के गांव या कस्बे में रहने वाले सैकड़ों नौजवान रात-दिन मोबाइल फोन से लोगों को ठगने का काम कर रहे हैं। और इनमें से कोई नौजवान मामूली से अधिक पढ़े-लिखे नहीं हैं। दूसरी तरफ खासे पढ़े-लिखे लोग जिनमें कामयाब कारोबारी भी हैं, और बड़े-बड़े सरकारी ओहदों पर बैठे हुए लोग भी झांसे में आ रहे हैं, धोखा खा रहे हैं, और अपनी रकम लुटा दे रहे हैं। इससे पता लगता है कि साइबर-औजारों की समझ रखने वाले लोग, जनता के मनोविज्ञान को समझकर किस तरह जुर्म का कारोबार चला सकते हैं, और पढ़े-लिखे लोग अपना सब कुछ गंवा सकते हैं। इसलिए हिन्दुस्तान में निजी जीवन की निजता को सम्हालकर रखने से लेकर, अपने बैंक खातों की जानकारी को भी सम्हालकर रखने की ट्रेनिंग देने की बहुत जरूरत है। टेक्नालॉजी छलांगें लगाकर आगे बढ़ रही है, मुजरिमों की कल्पनाएं उन पर सवार होकर दूर-दूर का सफर कर रही है, बस लोग ही, पढ़े-लिखे लोग भी, अज्ञानी बने बैठे हैं जिन्हें खतरे समझ ही नहीं आ रहे। इन सब बातों के बारे में लोगों को जागरूक करना सिर्फ सरकार की जिम्मेदारी नहीं है, सोशल मीडिया पर सक्रिय या जानकार लोग भी इसका अभियान चला सकते हैं।

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