6जी के सपने और ताबड़तोड़ महंगाई..


भारतीय दूरसंचार विनियामक प्राधिकरण यानी ट्राई के रजत जयंती समारोह को संबोधित करते हुए प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने फिर अच्छे दिनों के ख्वाब देश को दिखाए हैं। उन्होंने कहा कि 21वीं सदी के भारत में कनेक्टिविटी, देश की प्रगति की गति को निर्धारित करेगी। इसलिए हर स्तर पर कनेक्टिविटी को आधुनिक बनाना ही होगा। श्री मोदी ने कहा कि 5जी प्रौद्योगिकी देश के शासन, जीवन की सुगमता और व्यापार की सुगमता में सकारात्मक बदलाव लाने वाली है और इससे खेती, स्वास्थ्य, शिक्षा, संरचना और हर क्षेत्र में प्रगति को बल मिलेगा। अब ये बात समझना होगा कि जो चीजें पहले से सुगम हैं, उनमें सकारात्मक बदलाव कैसे आएगा। कोई चीज खराब हो, तो उसे अच्छे के लिए बदला जा सकता है। अगर प्रधानमंत्री का ये मानना है कि देश में शासन, जीवन और व्यापार सब पहले से सुगम हैं, तो फिर उसमें और क्या अच्छा बदलाव होगा, ये देखना दिलचस्प होगा। प्रधानमंत्री ने ये भी कहा कि आने वाले डेढ़ दशकों में 5जी से भारत की अर्थव्यवस्था में 450 बिलियन डॉलर का योगदान होने वाला है। इससे प्रगति और रोजगार निर्माण की गति बढ़ेगी। 5 ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था का क्या हुआ, सभी भारतीयों के खाते में 15 लाख का क्या हुआ, काले धन की वापसी का क्या हुआ, ये तो पता नहीं, लेकिन अब अगले 15 सालों में 450 बिलियन डॉलर 5जी के जरिए आ जाएंगे, ये एक नया सपना दिखाना शुरु हो गया है। साल बीतते न बीतते इसकी हकीकत भी सामने आ ही जाएगी। वैसे 5जी के बाद इस दशक के अंत तक 6जी सेवा आरंभ हो पाए, इसके लिए एक कार्य बल काम करना शुरु कर चुका है, ऐसा दावा भी किया जा रहा है। इस अवसर पर पिछली सरकार को कोसने का मौका भी प्रधानमंत्री मोदी ने नहीं छोड़ा और 2जी को हताशा और निराशा का पर्याय बताते हुए पूर्ववर्ती सरकार के लिए कहा कि वह कालखंड भ्रष्टाचार और नीतिगत पंगुता के लिए जाना जाता था। गौरतलब है कि यूपीए सरकार के वक्त 2जी घोटाले का विवाद खड़ा हुआ था। सीएजी विनोद राय की रिपोर्ट के आधार पर यूपीए सरकार पर खूब उंगलियां उठी थीं। इस कथित भ्रष्टाचार को भाजपा ने अपने फायदे के लिए भुनाया और मनमोहन सिंह की सरकार सत्ता से बाहर हो गई। इस घोटाले के कोई आरोप साबित नहीं हो पाए। अब विनोद राय कल्याण ज्वेलर्स के चेयरमैन बन चुके हैं।
नैतिकता के 24 कैरेट खरेपन में सत्ता केन्द्रित राजनीति की मिलावट हो जाती है, तो फिर ऐसे ही बड़े शिगूफे खड़े किए जाते हैं और वक्त के साथ वो कहां गुम हो जाते हैं, पता ही नहीं चलता। बहरहाल मोदीजी के मुताबिक 3जी, 4जी, 5जी और 6जी की तरफ तेजी से हमने कदम बढ़ाए हैं। बात सही भी है, देश दूरसंचार के क्षेत्र में तो तेजी से एक-दूसरे से जुड़ रहा है, लेकिन समाज के रूप में हम भीतर से कितना बिखरते जा रहे हैं, इसकी सुध भी सरकार को ले लेनी चाहिए। तभी कोई भी तकनीकी क्रांति वाकई सकारात्मक बदलाव ला सकेगी। सरकार का ये दावा भी है कि 5जी से खेती, शिक्षा, स्वास्थ्य हर क्षेत्र में प्रगति होगी। ये सब कब होगा, और कैसे नजर आएगा, ये तो पता नहीं, फिलहाल महंगाई के आंकड़े आम आदमी को हर दिन बजट में कटौती करने मजबूर कर रहे हैं, ये जरूर दिख रहा है। सरकार ने मंगलवार को जो आंकड़े जारी किए हैं, उनके मुताबिक, अप्रैल में थोक महंगाई दर 15.08 प्रतिशत के उच्च स्तर पर पहुंच गई। जबकि मार्च में यह 14.55 प्रतिशत पर थी। पिछले साल की इसी अवधि में थोक महंगाई दर 10.74 प्रतिशत पर थी। यह लगातार 13 वां महीना है जब थोक महंगाई दोहरे अंक में रही है। बीते दिनों खुदरा मुद्रास्फीति भी आठ साल के उच्च स्तर पर पहुंच गई है। खुदरा महंगाई दर लगातार चौथे महीने रिजर्व बैंक के मुद्रास्फीति लक्ष्य से ऊपर रही है। खुदरा के बाद थोक महंगाई में हुए इस बड़े इजाफे पर वाणिज्य और उद्योग मंत्रालय ने बयान जारी कर कहा कि अप्रैल 2022 में मुद्रास्फीति की उच्च दर मुख्य रूप से खनिज तेलों, मूल धातुओं, कच्चे पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस, खाद्य पदार्थों, गैर-खाद्य वस्तुओं, खाद्य उत्पादों और रसायनों और रासायनिक उत्पादों की कीमतों में वृद्धि के कारण थी। मंत्रालय बयान जारी करने की औपचारिकता न निभाता तो भी जनता को पता है कि किस तरह तेल, गैस और बाकी उत्पादों की कीमतों में बढ़ोतरी का असर महंगाई पर पड़ रहा है।
महंगाई क्यों बढ़ रही है, यह जानना जनता के लिए महत्वपूर्ण नहीं है। उसके लिए ये बात मायने रखती है कि महंगाई कम कैसे होगी। अफसोस कि इस बारे में सरकार कोई बयान नहीं देती। न ही महंगाई कम करने के सपने दिखाती है। सार्वजनिक निकायों का निजीकरण कर सरकार अपने लिए तो धन जमा करती जा रही है, लेकिन आम आदमी की थाली का खालीपन बढ़ता जा रहा है। जिस यूपीए सरकार को प्रधानमंत्री आए दिन कोसते रहते हैं, उसमें भले ही 6जी की तेजी के सपने नहीं थे। लेकिन पढ़ना, खाना, इलाज कराना और सफर करना, सब आम आदमी के बजट में आ जाता था। क्या उन दिनों का चैन मोदी सरकार वापस दिला सकती है।

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