आंखें खोल देने वाली दो हिंसक घटनाएं घटी एक ही दिन में..

-सुनील कुमार॥

लोगों की जिंदगी मेें मोबाइल फोन की दखल इतनी अधिक बढ़ चुकी है कि उसके बिना जिंदगी की कल्पना नहीं की जा सकती। पिछले दो बरस में लॉकडाउन और ऑनलाईन पढ़ाई के चलते हुए बच्चों के हाथ में भी मोबाइल पहुंच गए हैं, और बहुत गरीब लोग भी अपने बच्चों की पढ़ाई को बचाने के लिए किसी न किसी तरह से मोबाइल फोन जुटाकर उन्हें दे रहे हैं। मोबाइल फोन वैसे तो अपने आपमें एक औजार है जैसा कि चाकू होता है, और उसका इस्तेमाल किस तरह से हो, यह उन हाथों के पीछे के इंसान पर निर्भर करता है जो उससे काम ले रहे हैं। ऐसे में छत्तीसगढ़ की कल की ही दो खबरें यह बतलाती हैं कि यह औजार कमसमझ या नासमझ बच्चों के हाथ में कैसा हथियार बन रहा है, और उन उससे बचने के लिए क्या किया जाना चाहिए।

एक खबर छत्तीसगढ़ के रायगढ़ जिले की है जहां पर एक महिला की हत्या हुई, और जांच में पता लगा कि उसकी दो नाबालिग भतीजियों ने ही उसे कुल्हाड़ी से काट डाला क्योंकि बुआ अपने मोबाइल फोन के बेजा इस्तेमाल से नाराज थी, और परिवार की इन नाबालिग लड़कियों को डांटती थी। लड़कियां बुआ की मर्जी के खिलाफ उसके फोन से अपने दोस्तों से बात करती रहती थी, और जब एक दिन डांट अधिक पड़ी तो दोनों बहनों ने मिलकर बुआ को निपटा देने की साजिश बनाई। सत्रह और पन्द्रह साल की इन बहनों ने देर रात सोती हुई बुआ को कुल्हाड़ी से काट डाला। दूसरा मामला छत्तीसगढ़ के अम्बिकापुर जिले का है जहां पर एक परिवार के भीतर नाबालिग बच्चों के हाथ पढ़ाई के लिए दिया गया स्मार्टफोन सब लोग मिलकर इस्तेमाल करते थे। सात बरस से तेरह बरस तक के आधा दर्जन लडक़े मोबाइल पर किसी तरह पोर्नो फिल्म देखने लगे, और अपनी ही आठ बरस की एक बहन के साथ सेक्स करने लगे। यह सिलसिला दो महीने तक चला और परिवार के भीतर लोग यही समझते रहे कि ये बच्चे पढ़ाई कर रहे हैं। इस हरकत में इन लडक़ों ने परिवार के बाहर के अपने एक दोस्त को भी शामिल कर लिया। पुलिस अपनी शुरुआती जांच में यह पाया कि इन बच्चों को दिए गए इन मोबाइल फोन पर किसी तरह की अश्लील चीजें देखने का कोई इतिहास नहीं था। मतलब यह कि ये बच्चे ही खुद किसी तरह ऐसी वेबसाईटों पर पहुंचे और उसे देखकर घर की ही बहन के साथ इस तरह का सामूहिक बलात्कार करते रहे।

ये दोनों घटनाएं बिल्कुल अलग-अलग किस्म की हैं लेकिन इन दोनों का मोबाइल फोन से लेना-देना है। फोन की जरूरत बच्चों को पड़ रही है, वहां तक तो ठीक है, लेकिन जरूरत के इस औजार का किस-किस तरह का बेजा इस्तेमाल भी साथ-साथ चल रहा है, यह देखना भयानक है। अब परिवार की ही बहन से इस तरह सिलसिलेवार बलात्कार करने वाले इन नाबालिग लडक़ों सहित इस लडक़ी की जिंदगी भी तबाह हुई है, और इन सबका ऐसे हादसे और ऐसी वारदात से उबरना इस जिंदगी में शायद ही मुमकिन हो पाएगा। दूसरी तरफ मोबाइल फोन के अधिक इस्तेमाल से रोकने पर परिवार की ही अधेड़ रिश्तेदार को इतने हिंसक तरीके से काट डालने की बात भी लोगों की कल्पना से परे की है, लेकिन ये दोनों मामले पुलिस की दी गई जानकारी के मुताबिक पुख्ता हैं।

अब सवाल यह है कि महामारी के लॉकडाउन से परे भी अब स्मार्टफोन जिंदगी की हकीकत बन चुका है और गरीब परिवार भी मजदूरी या कामकाज के सिलसिले में स्मार्टफोन रखने लगे हैं। चूंकि इंटरनेट लगातार आसानी से हासिल हो रहा है, और शहरों में कई जगहों पर उसे मुफ्त भी पाया जा सकता है, इसलिए बच्चे उसका किस तरह का इस्तेमाल कर सकेंगे, यह कल्पना आसान नहीं है, वैसे दूसरे हिसाब से देखें तो यह कल्पना बहुत मुश्किल भी नहीं हैं। चूंकि ये दोनों मामले बहुत बड़े जुर्म के हैं, इसलिए ये पुलिस तक पहुंचे हैं, और बड़ी-बड़ी खबर बने हैं। लेकिन चारों तरफ घरों में ऐसा बेजा इस्तेमाल हो रहा होगा जो कि खबर नहीं बन पाता है। सरकार और समाज इन दोनों को इस बारे में गौर करना चाहिए क्योंकि अलग-अलग परिवार ऐसी कोई रोकथाम नहीं कर पाएँगे और बच्चों को नहीं बचा पाएंगे।

देश भर में मोबाइल फोन या कम्प्यूटर से पोर्नो देख पाने पर कई किस्म की रोक लगाने की जरूरत है। हो सकता है कि वयस्क लोगों की जरूरत के मुताबिक हर पोर्नो वेबसाईट को ब्लॉक करना संभव न हो, और अब तो हिन्दुस्तान के भीतर भी वयस्क मनोरंजन के अश्लील या सेक्सी वीडियो बनाकर बेचने का कारोबार धड़ल्ले से चल रहा है और यह कारोबार घोषित धंधा है। अभी तक तो सरकार ऐसे धंधे पर भी रोक लगाने की तरकीब नहीं निकाल पाई है क्योंकि यह अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के तहत एक वयस्क मनोरंजन के दायरे में आ रहा है। लेकिन सरकार की सूचना तकनीक के तहत यह रास्ता निकालने की जरूरत है कि कम्प्यूटर और फोन पर जब तक कोई वयस्क व्यक्ति अपना पासवर्ड न डाले, तब तक इन उपकरणों से कोई वयस्क वेबसाईट न खुले। इसके अलावा लोगों के बीच यह जागरूकता फैलाना भी जरूरी है कि अगर वे अपने बच्चों के हाथ में जाने वाले कम्प्यूटर और स्मार्टफोन का खुद ऐसा कोई वयस्क इस्तेमाल करते हैं तो वे उन बच्चों को खतरे में डालते हैं, और वे बच्चे ऐसे किसी जुर्म में फंस सकते हैं। परिवार अपने आपमें शायद इस तरह के कम्प्यूटर रोक-टोक के रास्ते न निकाल पाएं, और इसके लिए सरकार को ही इंटरनेट कंपनियों के साथ मिलकर तुरंत ही वयस्क सामग्री को बच्चों की पहुंच से परे रखने का रास्ता निकालना पड़ेगा।

अब हर किस्म के परिवार को अपनी-अपनी परिस्थितियों और पारिवारिक स्थितियों को ध्यान में रखकर यह भी देखना चाहिए कि परिवार के बच्चे किसी अवांछित वयस्क या अश्लील, या हिंसक, सामग्री को देखने में फंस तो नहीं रहे हैं। टेक्नालॉजी जितनी सुलभ होती जा रही है, उतना ही यह खतरा बढ़ते जा रहा है। इतनी बड़ी हिंसा की वारदातों से कम हिंसक वारदातें बहुत सी होती होंगी या यह भी होता होगा कि बिना हिंसा के सिर्फ बच्चे अश्लीलता में फंस रहे होंगे। यह पूरा सिलसिला अगली पीढ़ी को खतरे मेें डालने वाला दिख रहा है, और इसके लिए तमाम तरह के उपकरणों और इंटरनेट पर तरह-तरह की रोक लगाने की जरूरत है ताकि वयस्क लोग जिन वेबसाईटों तक पहुंचते हैं, या जो वीडियो मैसेंजर सर्विसों पर पाते और भेजते हैं, उन तक बच्चों की पहुंच न हो सके।

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