Home गौरतलब किसानों पर कहर बरपाना बन्द करे सरकार..

किसानों पर कहर बरपाना बन्द करे सरकार..

रणदीप सिंह सुरजेवाला, महासचिव, भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस द्वारा जारी बयान.. धान की सरकारी खरीद टालने का निर्णय अन्नदाता से क्रूर मजाक.. समय पर खरीद न करना MSP खत्म करने का भाजपाई षडयंत्र.. धरती पुत्र किसान पर रही मौसम व सरकार, दोनों की मारभाजपा-जजपा सरकार ने किया धान-बाजरा बोने वाले किसान से धोखा..

मोदी व खट्टर सरकारों का किसान विरोधी, क्रूर व निर्दयी चेहरा एक बार फिर उजागर हो गया है। आए दिन नए-नए षडयंत्रकारी मनसूबों से किसान के पेट पर लात मारना अब मोदी-खट्टर-दुष्यंत चौटाला सरकारों की फितरत बन गई है।

धान खरीद टालने का निर्णय है किसान पर वज्रपात

हरियाणा में धान की सरकारी खरीद 25 सितंबर से शुरू होनी थी। इस बारे सरकारी पत्र भी जारी कर दिया गया (संलग्न A1)। लाखों क्विंटल धान 20 सितंबर से ही मंडियों में आना शुरू हो गया। 11 दिन बीत जाने के बाद भी एक फूटी कौड़ी धान की MSP पर सरकारी खरीद नहीं हुई।

अन्नदाता किसान पर वज्रपात करते हुए मोदी सरकार ने 30 सितंबर, 2021 को MSP पर धान की सरकारी खरीद की तिथि को टालकर अब 11 अक्टूबर, 2021 कर दिया है (संलग्न A2)।

हरियाणा की मंडियों में 20 लाख क्विंटल से अधिक धान खुले में पड़ा है। उदाहरण के तौर पर जिला अंबाला की मंडियों में लगभग 4.50 लाख क्विंटल धान, जिला कुरुक्षेत्र की मंडियों में लगभग 5.50 लाख क्विंटल धान, जिला यमुना नगर की मंडियों में लगभग 2.25 क्विंटल धान, जिला कैथल की मंडियों में लगभग 2 लाख क्विंटल धान व जिला करनाल की मंडियों में लगभग 1.75 लाख क्विंटल धान की आवक हो चुकी है। हजारों किसान सरकार की ओर टकटकी बांधे देख रहे तथा MSP पर खरीद की आस लगाये बैठे हैं। हरियाणा और देश का अन्नदाता अब कहां जाए?

धान की फसल समय पर खरीद न होने के कारण किसान नेता गुरनाम सिंह की हरियाणा सरकार को चेतावनी।

जालिम खट्टर सरकार व उसके उप मुख्यमंत्री, श्री दुष्यंत चौटाला ने अहंकार से कह दिया कि सरकार 3 अक्टूबर के बाद कोई निर्णय लेगी। सवाल यह है कि बेमौसमी बारिश और तूफान की मार सह रहा किसान अपनी फसल कैसे बचाए, कहां लेकर जाए और किसे बेचकर आए?

मौसम और मोदी सरकार, दोनों ही मिलकर अन्नदाता को मारने पर जुटे हैं। MSP पर धान खरीद को 11 अक्टूबर तक टालने का निर्णय साफ तौर से चोर दरवाजे से MSP खत्म करने का षडयंत्र है और खेती विरोधी काले कानून लागू करने की साजिश है।

धान व खरीफ फसलों के साल 2020-21 के ‘खरीद मापदंड’ न जारी करना भी MSP बंद करने तथा मंडियों पर तालाबंदी करने का भाजपाई षंडयंत्र

मोदी सरकार व भाजपा का किसान विरोधी चेहरा एक और षडयंत्र से बेनकाब होता है। आज तक भी मोदी सरकार ने धान, बाजरा व अन्य खरीफ फसलों के साल 2021-22 के ‘खरीद मापदंड’ जारी नहीं किए। तो फिर सरकारी एजेंसियां MSP पर खरीद कैसे करेंगी? सच्चाई यह है कि मोदी सरकार षडयंत्रकारी तरीके से खरीफ फसलों में दशकों से निर्धारित नमी की मात्रा, दाना सिकुड़ने व रंग बदलने के मापदंड इत्यादि इतना कम करना चाहती है कि MSP पर खरीद हो ही न सके और अपने आप MSPचोर दरवाजे से खत्म हो जाए। इस बारे मोदी सरकार ने एक ड्राफ्ट सर्कुलर भी जारी किया है, जिसका किसान यूनियन, आढ़तियों, व अन्य लोगों ने पुरजोर विरोध किया है। इसीलिए, खरीद के मापदंड ही जारी नहीं किए गए।

अनुसूचित जाति-पिछड़े वर्गों के मंडी मजदूरों की रोजी-रोटी पर आक्रमण

यही नहीं, मंडी में फसल उतारने, सफाई व बोरी इत्यादि भरने का काम करने वाले अनुसूचित जाति तथा पिछड़े वर्गों के हजारों-लाखों मजदूरों के पेट पर भाजपा-जजपा सरकार ने लात मारने का निर्णय किया है। मंडियों में मजदूरों को दी जाने वाली प्रति बैग मजदूरी के दाम ₹12.76 प्रतिबैग से घटाकर ₹8.56 प्रति बैग कर दिए गए हैं। यानि हर मंडी मजदूर को प्रति बैग ₹4.20 कम भुगतान होगा। डूबती अर्थव्यवस्था व कोरोना महामारी के बीच ये गरीब अपना पेट कैसे पालेंगे? नतीजा यह है कि करनाल, कैथल, कुरुक्षेत्र व अन्य मंडियों में मजदूर हड़ताल पर हैं तथा किसान भारी संकट का सामना कर रहे हैं।

प्राईवेट राईस मिलर्स से खरीद में भी लगाई अड़चन

हरियाणा में प्राईवेट राईस मिलर धान की मिलिंग कर पब्लिक डिस्ट्रीब्यूशन सिस्टम के लिए सप्लाई करते हैं। अब उन पर भी 5 प्रतिशत सिक्योरिटी की शर्त लगा उस खरीद को भी संदेह के घेरे में डाल दिया गया है। राईस मिलर खरीद के लिए तैयार नहीं तथा हड़ताल पर हैं। सरकारी एजेंसियां खरीद नहीं कर रहीं। मंडियां धान से अटी पड़ी हैं। तो किसान कहां जाए?

बाजरे की सरकारी खरीद बंद करना है खेती पर हमला

खट्टर-दुष्यंत सरकार ने इस साल एक और किसान विरोधी फैसला लिया है। पिछले साल हरियाणा में बाजरे की 7,76,909 मीट्रिक टन सरकारी खरीद हुई। इस साल उसमें 80 प्रतिशत कटौती करने का निर्णय कर दिया गया है और सरकार केवल 1,25,000 मीट्रिक टन बाजरा खरीदेगी। किसान को ₹2250 प्रति क्विंटल MSP की बजाय मुश्किल से ₹1200-₹1300 प्रति क्विंटल भाव मिल रहा है। भावांतर योजना में ₹600 प्रति क्विंटल का भुगतान अगर जोड़ भी दिया जाए, तो भी किसान को MSP से ₹450-₹500 प्रति क्विंटल कम भाव मिलेगा। MSP खत्म करने का षडयंत्र साफ है।

भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस मांग करती है किः

  1. धान व बाजरा की MSP पर सरकारी खरीद आज से ही शुरू की जाए।
  2. धान, बाजरा व अन्य खरीफ फसलों के ‘खरीद मापदंड’ आज ही जारी किए जाएं तथा उनमें कोई संशोधन न हो।
  3. MSP खत्म करने का भाजपाई षंडयंत्र बंद किया जाए।
  4. बेमौसमी बारिश तथा खरीद में देरी को देखते हुए धान और बाजरा खरीद में नमी की मात्रा में छूट दी जाए।

भाजपा-जजपा सरकार 15 दिनों के अंदर ‘खराबे’ का पूरा मुआवज़ा किसान को दे। झज्झर, रोहतक व अन्य इलाकों में हजारों एकड़ फसल, जो पानी से डूबी है, पानी निकासी का इंतजाम हो तथा मुआवज़ा मिले।

श्री मनोहर लाल खट्टर- श्री दुष्यंत चौटाला या तो उपरोक्त मांगें मानें या गद्दी छोड़ें।

(प्रेस नोट)

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