Home गौरतलब जो सरकार चूल्हे से गैस खिंच ले, वो देश को विकास का इंजन कैसे देगी ?

जो सरकार चूल्हे से गैस खिंच ले, वो देश को विकास का इंजन कैसे देगी ?

-हिना ताज॥

कोरोना काल की मार झेल रहे देश के नागरिक महंगाई और बेरोजगारी के मुद्दों से भी जूझ रहे हैं। इस बीच आज प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने उत्तर प्रदेश के महोबा में उज्ज्वला योजना के दूसरे चरण की शुरुआत कर दी है। उत्तर प्रदेश में इसी जगह से साल 2016 में ‘स्वच्छ ईंधन, बेहतर जीवन’ के नारे के साथ जब इस योजना का पहला चरण शुरू किया गया था तब रसोई गैस की कीमत 423 रुपये थी। शासन से मिल रहे मुफ्त कनेक्शन के चक्कर में घरों में फूंके जाने वाले चूल्हे घटने लगे लेकिन ये सब कुछ समय के लिए होगा ऐसा मोदी को भगवान बनाकर सिर आंखों पर बैठाने वाली जनता ने सोचा नहीं था। क्योंकि गरीबों के लिए शुरू की गई उज्ज्वला योजना के गैस सिलेंडर अब रसोई घर की महज शोभा बढ़ा रहे हैं। देश में लगातार बढ़ती महंगाई, पेट्रोल सब्ज़ियों के दामों के साथ रसोई की कीमतें भी आसमान छू रही हैं। आज बाज़ार में कमर्शियल एलपीजी सिलेंडर 1687 रुपए से अधिक तो घरेलू सिलेंडर 850 रुपए का हो गया है। सिर्फ इस साल में अब तक घरेलू गैस सिलेंडर का दाम 138.50 रुपए तक बढ़ा दिया गया है। सरकार पहले गैस की कीमतें बढ़ाती थी तो बढ़ी हुई कीमत सब्सिडी के रूप में मिल जाती थी। पर सरकार ने अब सब्सिडी लगभग पूरी तरह से खत्म ही कर दी है जिससे गैस काफी महंगी पड़ती है। ऐसे में उज्जवला के दूसरे चरण को शुरू कर देने से क्या बदलने वाला है, देश को कौनसी नई ऊर्जा या विकास को कौन सी रफ्तार मिलने वाली है ? ये एक बड़ा सवाल है।

हालांकि उज्जवला का दूसरा चरण कई आकर्षक ऑफर्स के साथ शुरू किया गया है, जैसे इस चरण में LPG कनेक्शन के अलावा पहले सिलेंडर की रीफिलिंग भी फ्री होगी। इसके साथ ही गैस चूल्हा भी मुफ्त में दिया जाएगा। वहीं आवेदन के लिए जरूरी पेपरवर्क और डॉक्यूमेंट को भी कम किया गया है। केवाईसी के लिए किसी नोटरी या हलफनामे की जरूरत नहीं होगी। साथ ही दूसरी जगह पर रह रहे लोगों के पास अगर मूल निवास प्रमाण पत्र नहीं है, तो उन्हें सेल्फ डिक्लेरेशन का ऑप्शन भी मिलेगा। इसलिए माना जा सकता है कि देश में लकड़ी के चूल्हों से गैस पर खिसके करोड़ों उपभोक्ताओं में रसोई गैस के प्रति तेज़ी से हुए मोह भंग को दुरुस्त करने के लिए मोदी सरकार इन भारी भरकम रियायतों के साथ मैदान में लौटी है। उज्जवला योजना के दूसरे चरण की शुरुआत करते हुए मोदी जी ने कहा कि रसोई ठीक होगी तो बेटियां घर से निकल राष्ट्र निर्माण में सहयोगी बनेंगी लेकिन हालात ये हैं कि कई ग्रामीण इलाकों में 4 से 5 दिन भटकने के बाद भी महिलाओं के गैस सिलेंडरों की रीफिलिंग नहीं हो पा रही है, जिसके चलते उन्हें मज़दूरी से भी वंचित रहना पड़ रहा है।

देश को विकास के इंजन पर दौड़ता तो हर कोई देखना चाहता है लेकिन उसके लिए ज़रूरी है कि प्रधानमंत्री आम जनता की बुनियादी ज़रूरतों में आड़े आ रही समस्याओं को पहले दुरुस्त करें या वह सत्ता के 7 साल गुज़र जाने के बाद भी सड़क, बिजली पानी, स्वास्थ्य, अस्पताल, स्कूल को लेकर समाधान ही खोजते रहेंगे। कोरोना के बाद देश गरीबी से जूझ रहा है। लाखों लोग वापिस गरीबी रेखा के नीच चले गए हैं। बेरोजगारी सदी के चरम पर है। बढ़ती महंगाई से आम आदमी दुखी और त्रस्त है। रोजगार को लेकर पूरे देश में रोजी रोटी का संकट खड़ा हुआ है। ऐसे में फ्री गैस कनेक्शन बांटकर मोदी जी घायल जनता के ज़ख्मों पर कौन सा मरहम रख रहे हैं ? यदि उनका टारगेट देश को आत्मनिर्भर बनाना है तो पहले लोगों को रोजगार की गारंटी देनी होगी। पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह के समय शुरू की गई महात्मा गांधी नरेगा योजना ने भले ही ग्रामीण इलाकों में लोगों को काम दिया हो लेकिन अब ज़रूरत उससे भी ज़्यादा की है। क्योंकि अब देश में पढ़ा लिखा तबका खाली हाथ है और इन खाली हाथों से आत्मनिर्भर भारत तो दूर एक कमरे की नींव भी नहीं भरी जा सकती। इसलिए सही समय पर सही नीति निर्धारण कर मोदी को गांवों की तर्ज पर शहरों में भी रोजगार गारंटी के लिए कानून लागू करना चाहिए। सिर्फ एक बार कि गैस और मुफ्त चूल्हे से बात नहीं बनेगी। जब तक रिफिल के पैसे जनता की जेब तक पहुंच नहीं बनाते तब तक मोदी सरकार का शासन भी महिलाओं के हाथ में थमाए गए प्रतिकात्मक सिलेंडरों की तरह ही दिखावे का साबित होगा।

Facebook Comments

Leave a Reply

Your email address will not be published.

This site uses Akismet to reduce spam. Learn how your comment data is processed.