Home गौरतलब उफ़! क्या लखनऊ में अलकायदा की पहुंच संभव है.?

उफ़! क्या लखनऊ में अलकायदा की पहुंच संभव है.?


-सुसंस्कृति परिहार।।

उत्तर प्रदेश में जब पंचायत चुनाव में समाजवादी पार्टी की बंपर जीत के बाद जिला पंचायत अध्यक्ष पदों पर भाजपा प्रत्याशी जिताए गए इसमें जो धांधली,गुंडई तथा नारीअस्मिता पर पतित राजनीति की ख़बरे मीडिया में जोर शोर से चल रही थीं तब लगता है अचानक मीडिया को एक जबरदस्त मसाला परोसा गया । इसकी ख़बर उन्हे पहले से थी और वे मौके की तलाश में थे। पुलिस को जब इशारा मिला और उन्होंने लोगों को इससे बड़े हमलावरों के आतंक की खबर देनी शुरू कर दी ताकि चुनावी धांधली के किस्से चर्चाओं से गायब हो जाएं। ऐसे समीकरण आमतौर पर भाजपा ने अक्सर किए हैं इसलिए कुछ लोग तो यह कहने से भी नहीं चूकते कि यह पूर्व प्रायोजित कार्यक्रम है।

क्योंकि सबसे बड़ा सवाल तो यह है कि जिस तरह का व्यवहार मुस्लिमों के साथ उत्तरप्रदेश पुलिस का हो रहा है वहां अलकायदा इतनी हिमाकत कैसे दिखा सकता है ? रक्षामंत्री राजनाथ सिंह के प्रदेश में इस तरह की दस्तक समझ में नहीं आती?आ बैल मुझे मार की रिस्क यहां अलकायदा क्यों लेगी? फिर उन्हें इतनी आसानी से पकड़ा जाना और उनका इतनी जल्दी प्लान को ओपन कर देना भी शंकाओं को जन्म देता है। कहीं ऐसा तो नहीं कि घटनाक्रम के ज़रिए वहां के मुस्लिमों को प्रताड़ित करना और डराना ही लक्ष्य हो।संघ प्रमुख भागवत जहां दोनों के डी एन ए एक बताकर ऊपरी तौर पर भाईचारा फैलाने का ढोंग रच रहे हैं वहीं अंदर अंदर उनकी ख़िलाफ़त का काम हो रहा है। यहां तो शफ्फाक तौर पर हाथी के दांत खाने के और ,दिखाने के और नज़र आ रहे हैं।

बहरहाल, आइए इस घटना को जान लें ,ख़बरों के मुताबिक अब तक अलकायदा के दो आतंकी गिरफ्तार किए जा चुके हैं कई राजनेताओं समेत अयोध्या-काशी की सुरक्षा बढ़ा दी गई है।ATS को ऑपरेशन के दौरान दो प्रैशर कुकर बम, टाइम बम और भारी मात्रा में अन्य हथियारों सहित ही कुछ दस्तावेज भी मिले हैं।वहीं कुछ नक्‍शों और दस्तावेजों को आरोपियों ने जला दिया. अब एटीएस इस बात की जांच कर रही है कि वे नक्‍शे और दस्तावेज किस से संबंधित थे।
उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में आतंकी संगठन अलकायदा से संबंधित जिस एक ग्रुप का खुलासा हुआ है, उसके सदस्यों की शहर और अन्य शहरों के भीड़ वाले इलाकों में आत्मघाती हमला करने की योजना थी. यह जानकारी पुलिस ने रविवार को दी. पुलिस ने बताया कि ऑपरेशन के तहत लखनऊ के रहने वाले मिनहाज अहमद और मसीरुद्दीन उर्फ मुशीर को गिरफ्तार किया गया है. इनके जरिए ही इनके गुट तक पहुंचा गया।
एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में वरिष्ठ पुलिस अधिकारी प्रशांत कुमार ने कहा, ‘एटीएस यूपी ने एक बड़े आतंकी मॉड्यूल का पर्दाफाश किया है। टीम ने अलकायदा के अंसार गजवा-उल-हिंद से जुड़े दो आतंकियों को गिरफ्तार किया है. हथियारों का जखीरा और विस्फोटक सामग्री बरामद की गई है.’साथ ही उन्होंने कहा, ‘आतंकी गतिविधियों को पेशावर और पाकिस्तान-अफगानिस्तान सीमा पर क्वेटा से अंजाम दिया जा रहा था।’

विदित हो,अलकायदा की स्थापना 1988 में सोवियत अफगान वार के दौरान हुई थी। वर्ष 2014 में अलकायदा के कमांडर अल जवाहिरी ने भारत में अपना नेटवर्क बनाना शुरु किया था। भारत में इसका कमांडर मूल रूप से संभल के रहने वाले असीम उमर को बनाया गया था, जो पाकिस्तान में शिफ्ट हो गया। वह 23 सितंबर 2019 को अमेरिका और अफगानिस्तान के संयुक्त आपरेशन में मारा गया। उसके बाद से उमर हलमंडी कमान संभाल रहा है। यह भी ज्ञात हुआ है 2017और 2019में भी इन क्षेत्रों से कुछ आतंकी पकड़े गए थे ।
अगर ये सत्य है तो कितना शर्मनाक है सब कुछ जानकारी होने के बावजूद उन पर रहम बरपा गया आखिरकार क्यों ? कहीं इनसे कोई अंदरूनी करार तो नहीं।अब जब इस तरह की घटनाएं घटित होती हैं इन पर यकीन मुश्किल से होता है क्योंकि कोई रहस्य लंबी अवधि तक नहीं छुपाया जा सकता ।इतना जखीरा और असबाब का मिलना ख़तरे से खाली नहीं।पुलवामा के बाद से तो अब विश्वास के परखच्चे उड़ गए हैं।रक्षा मंत्री का पद सुरक्षित रह जाना भी रहस्यमयता से पूर्ण है। अगर फिर भी ये सच है तो प्रदेश के मुख्यमंत्री और रक्षामंत्री के लिए शर्म का विषय है साथ ही नोटबंदी के बाद आतंकियों का खात्मा कहने वाले मोदी जी के लिए बड़ी चुनौती।

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