लोकतंत्र की अहमियत समझना जरूरी..

लोकतंत्र की अहमियत समझना जरूरी..

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खास लोगों की आवाजाही आम लोगों पर किस कदर भारी पड़ती है, इसका ताजा उदाहरण कानपुर से सामने आया है। राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद इस वक्त कानपुर में अपने पैतृक आवास के दौरे पर हैं। दिल्ली से कानपुर तक की यात्रा महामहिम ने रेल से संपन्न की। हालांकि राष्ट्रपति की रेल यात्रा भी खास तरीके की होती है।  राष्ट्रपति की यात्रा से पहले कानपुर सेंट्रल और रेलवे स्टेशन के आसपास सुरक्षा के चाक चौबंद इंतजाम किए गए थे। यातायात मार्ग में परिवर्तन किया गया।

स्टेशन के आसपास की दुकानों, ई रिक्शा, आटो आदि पर कुछ वक्त का प्रतिबंध लगाया गया। इससे बेशक आम लोगों को तकलीफ हुई होगी, लेकिन मुद्दा देश के प्रथम नागरिक की सुरक्षा का था। इसलिए आम लोगों को ये तकलीफ सहनी पड़ी। राष्ट्रपति के कानपुर देहात जिले स्थित पैतृक गांव की यात्रा की मद्देनजर भी सुरक्षा इंतजाम किए गए और सड़क परिवहन को कई जगहों पर रोक दिया गया। लेकिन यह सुरक्षा इंतजाम एक बीमार महिला के लिए जानलेवा साबित हुआ।

वंदना मिश्रा नामक पीड़िता कोरोना संक्रमित थीं और शुक्रवार को उनकी तबियत अचानक बिगड़ गई, लेकिन उन्हें समय पर अस्पताल नहीं पहुंचाया जा सका, जिससे उनकी मौत हो गई। दरअसल राष्ट्रपति के दौरे को देखते हुए जो सुरक्षा व्यवस्था की गई थी, उसके तहत वह रास्ता भी बंद कर दिया गया था, जिससे होकर वंदना मिश्रा को अस्पताल ले जाना था। रास्ता बंद होने के कारण वे आगे नहीं जा सकीं और अस्पताल पहुंचने के पहले ही उनकी मौत हो गई। इस घटना पर कानपुर पुलिस के प्रमुख असीम अरुण ने इस पर माफी मांगी है। उन्होंने ट्वीट किया कि, ‘वंदना मिश्रा की मौत पर कानपुर पुलिस और ख़ुद अपनी ओर से मैं माफी मांगता हंू। इससे हमने शिक्षा ली है।  हम भविष्य में ऐसा रूट तैयार करेंगे कि लोगों को कम से कम समय के लिए रुकावट का सामना करना पड़े और इस तरह की वारदात दुबारा न हो।’

अच्छी बात है कि कानपुर पुलिस को अपनी गलती का अहसास हुआ है, लेकिन माफी मांगने से मृत व्यक्ति में प्राण नहीं लौटाए जा सकते। कानपुर पुलिस प्रमुख ने इस घटना से शिक्षा लेने की बात कही है, ताकि भविष्य में ऐसी घटना फिर न हो। लेकिन यह पहली बार नहीं है जब किसी वीआईपी दौरे में आम आदमी की जान पर न बन आई हो। यूपीए सरकार के वक्त भी डॉ.मनमोहन सिंह के चंडीगढ़ दौरे के वक्त एक एंबुलेंस जाम में फंस गई थी, जिसमें मरीज की मौत हो गई थी। पुलिस तो ऐसी घटनाओं से सबक ले भी ले, लेकिन उस सबक का कोई सदुपयोग तब तक नहीं होगा, जब तक देश में वीआईपी संस्कृति हावी रहेगी। पुलिस प्रशासन पर किसी भी वीआईपी दौरे को लेकर काफी दबाव रहता है। इस दबाव के कारण ही कई बार वह अतिरिक्त सख्ती बरतती है और जरूरतमंदों के लिए भी कोई रियायत नहीं करती। ऐसा शायद ही कोई वीआईपी दौरा होगा, जिसमें आम आदमी को तकलीफ न उठाना पड़े। लेकिन यह तकलीफ चर्चा का मुद्दा तभी बनती है, जब किसी की जान जाने जैसी बड़ी घटना हो जाए।

वीआईपी वाहन पर लालबत्ती रहे न रहे, लेकिन खास और आम के बीच फर्क करने वाला मिजाज अब भी देश की राजनीति पर हावी है। वैसे राष्ट्रपति कोविंद ने कानपुर की इस घटना की जानकारी होने पर पीड़िता के परिजनों के लिए दुख जतलाया है। राष्ट्रपति जब अपने पैतृक गांव परौंख पहुंचे और हैलीपैड से उतरते ही उन्होंने जिस तरह जमीन को झुक कर प्रणाम किया, उससे काफी भावुक माहौल बन गया। एक ट्वीट में राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने कहा, मैं कहीं भी रहूं, मेरे गांव की मिट्टी की खुशबू और मेरे गांव के निवासियों की यादें सदैव मेरे हृदय में विद्यमान रहती हैं। अपनी मातृभूमि के लिए यह भावुकता स्वाभाविक है। एक अन्य ट्वीट में महामहिम ने कहा, मैंने सपने में भी कभी कल्पना नहीं की थी कि गांव के मेरे जैसे एक सामान्य बालक को देश के सर्वोच्च पद के दायित्व-निर्वहन का सौभाग्य मिलेगा, लेकिन हमारी लोकतांत्रिक व्यवस्था ने यह करके दिखा दिया। निश्चित ही राष्ट्रपति कोविंद ने हाईकोर्ट से राष्ट्रपति भवन तक का एक लंबा सफर तय किया है और इसमें उनकी प्रतिभा के साथ-साथ देश की लोकतांत्रिक व्यवस्था की अहम भूमिका है।

श्री कोविंद ने जरूर भावावेश में यह कहा है कि उन्होंने कभी कल्पना नहीं की थी कि एक सामान्य बालक को देश के सर्वोच्च पद के दायित्व निर्वहन का मौका मिलेगा। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी भी अक्सर अपने चाय बेचने के दिनों को भावुकता के साथ याद करते हैं। लेकिन उनसे पहले लाल बहादुर शास्त्री से लेकर डॉ. मनमोहन सिंह और एपीजे अब्दुल कलाम जैसे कई लोग बेहद साधारण और गरीब पृष्ठभूमि से निकलकर देश में उच्च पदों तक पहुंचे। यह वाकई हिंदुस्तान के लोकतंत्र का ही कमाल है।

अब जबकि लोकतंत्र का महत्व नजर आ ही रहा है, तो सरकार को यह सुनिश्चित करना चाहिए कि लोकतंत्र के मूल्यों की हर तरीके से रक्षा हो। वीआईपी दौरे से लेकर किसान आंदोलन तक लोक के हितों को प्राथमिकता दी जाए।

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