Home गौरतलब भ्रष्टाचार के साथ यह कैसा धर्म.??

भ्रष्टाचार के साथ यह कैसा धर्म.??

भारतीय राजनीति में अयोध्या विवाद भाजपा के लिए वो सीढ़ी बना, जिस पर चढ़कर पार्टी सत्ता तक पहुंच पाई। दो लोकसभा सीटों से 3 सौ सीटों का सफर रथयात्रा, हिंदू-मुस्लिम, मंदिर वहीं बनाएंगे जैसे जाप करते हुए तय किया गया और भारत की धर्मभीरू, भावुक जनता ने इस जाप में भाजपा का लगातार साथ दिया। जनता यह मानने लगी थी कि भाजपा ही उसके आराध्य राम की जन्मभूमि पर मंदिर निर्माण करवा सकती है। दशकों से अदालत में खिंचता चल रहा मामला आखिरकार अंतिम फैसले पर पहुंचा कि जहां बाबरी मस्जिद तोड़ी गई थी, वहां राम मंदिर बनेगा। मस्जिद के लिए अलग से जगह दी गई।

अदालत ने यह तो माना कि मस्जिद तोड़ना गलत था, लेकिन इस गलत काम को अंजाम देने वालों को कोई सजा नहीं हुई। अदालत ने मंदिर निर्माण के लिए एक ट्रस्ट भी बना दिया और प्रधानमंत्री मोदी ने कोरोना महामारी के बीच मंदिर का शिलान्यास भी कर दिया। जनता खुश थी कि भाजपा ने अपना चुनावी वादा पूरा किया। जनता खुश थी कि अब उसके और उसके आराध्य के बीच कोई नहीं आ सकता। रामलला शिविर से निकल कर दुनिया के सबसे भव्य मंदिर में वास करेंगे। जनता खुश थी कि उसकी आस्था के साथ सत्तारुढ़ भाजपा ने न्याय किया है। जनता की इसी खुशी को भुनाते हुए राम मंदिर के लिए घर-घर घूमकर पिछले महीनों में चंदा भी इकट्ठा किया गया। मगर ऐसा लगता है कि जनता की खुशी को अभी मुकम्मल होने में थोड़ा वक्त है।

दरअसल अयोध्या में श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट पर भ्रष्टाचार के गंभीर आरोप लगे हैं। समाजवादी पार्टी के नेता और पूर्व विधायक तेजनारायण पांडेय उर्फ पवन पांडेय ने अयोध्या में और आप पार्टी के प्रदेश प्रभारी राज्यसभा सांसद संजय सिंह ने लखनऊ में प्रेस कांफ्रेंस कर आरोप लगाया है कि ट्रस्ट द्वारा 10 मिनट पहले खरीदी गई दो करोड़ की जमीन का रजिस्टर्ड एग्रीमेंट 18.5 करोड़ रुपये में करा लिया गया। आरोप लगाया गया कि बैनामा व रजिस्ट्री एक ही दिन हुई और दोनों में गवाह रहे ट्रस्टी डॉ. अनिल मिश्रा व अयोध्या महापौर ऋषिकेश उपाध्याय। पवन पांडेय ने बताया कि अयोध्या के बाग बिजेस्वर में 12080 वर्ग मीटर जमीन का बैनामा इसी साल 18 मार्च, 2021 को शाम 07:05 बजे बाबा हरिदास ने व्यापारी सुल्तान अंसारी व रवि मोहन तिवारी को दो करोड़ रुपये में किया था।

चम्पत राय

10 मिनट बाद 7:15 बजे इसी भूमि का रजिस्टर्ड एग्रीमेंट सुल्तान अंसारी व रवि मोहन तिवारी से श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट ने 18.5 करोड़ में करा लिया। ट्रस्ट ने 17 करोड़ रुपये सुल्तान व रवि मोहन के खाते में आरटीजीएस के माध्यम से ट्रांसफर किए हैं। उन्होंने सवाल किया कि जब पहले से ही इस जमीन का दाम ट्रस्टी व महापौर को मालूम था तो ऐसी कौन सी परिस्थिति आ गई कि दो करोड़ में बैनामा कराई गई जमीन को 10 मिनट बाद ही 18.5 करोड़ में खरीदना पड़ा। जबकि संजय सिंह ने कहा कि ‘लगभग 5.5 लाख रुपये प्रति सेकंड जमीन का दाम बढ़ गया। हिंदुस्तान क्या दुनिया में कहीं कोई जमीन एक सेकंड में इतनी महंगी नहीं हुई होगी।

भ्रष्टाचार के ये आरोप सेंत-मेंत में खारिज नहीं किए जा सकते। न ही इस पर धार्मिक आस्था की आड़ ली जा सकती है। कोई भी धर्म बिना नैतिकता या ईमानदारी के मायने नहीं रखता है। बाबरी मस्जिद तोड़ने वालों ने इतिहास की घटनाओं को लेकर कई तरह के आरोप दूसरे धर्मावलंबियों पर मढ़े, और हमेशा अपने धर्म की ध्वजा ऊंची रखने की दुहाई दी। हिंदुस्तान में समाज का बंटवारा मंदिर-मस्जिद के नाम पर हो गया। और अब जब मंदिर की नींव तैयार हो रही है, तो क्या उसमें बेईमानी की ईंटों के लिए जगह होना चाहिए, यह सवाल हरेक सच्चे रामभक्त को खुद से करना चाहिए और उन लोगों से जवाब मांगना चाहिए जो मंदिर निर्माण का श्रेय लेना चाहते हैं।

कांग्रेस पार्टी ने भ्रष्टाचार के इन आरोपों को लोगों की आस्था से छल बताया है, जो सही ही है। साथ ही कांग्रेस चाहती है कि प्रधानमंत्री मोदी को इस पर बयान देना चाहिए। हालांकि यह उम्मीद कभी पूरी होगी, इसमें संदेह है। प्रधानमंत्री मोदी अपनी सुविधा से बयान देने के अब जाने जाते हैं। वैसे ट्रस्ट का गठन सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद किया गया है, इसलिए अगर न्यायालय की निगरानी में इस मामले की जांच हो, तो बेहतर है।

वैसे श्रीराम जन्मभूमि तीर्थक्षेत्र ट्रस्ट ने बयान जारी कर रहा है कि जमीन खरीदारी में करोड़ों के घोटाले के आरोप राजनीतिक हैं, और द्वेष की भावना से लगाए गए हैं। ट्रस्ट का कहना है कि 9 नवंबर 2019 के मंदिर के बारे में सुप्रीम कोर्ट का फैसला आने के बाद अयोध्या में जमीन खरीदने के लिए विभिन्न लोग आने लगे और उत्तर प्रदेश सरकार भी अयोध्या के विकास के लिए जमीन खरीद रही है, इस कारण अयोध्या में जमीनों के दाम बढ़ गए हैं। उक्त भूमि को खरीदने के लिए वर्तमान विक्रेतागणों ने वर्षों पूर्व जिस मूल्य पर अनुबंध कराया था उस मूल्य पर उन्होंने 18 मार्च 2021 को बैनामा कराया तत्पश्चात ट्रस्ट के साथ अनुबंध किया।

लेकिन ट्रस्ट ने यह स्पष्ट नहीं किया कि आखिर 10 मिनट पहले 2 करोड़ में खरीदी गई जमीन ट्रस्ट ने 18.5 करोड़ में क्यों और कैसे खरीद ली। ट्रस्ट के महामंत्री चंपत राय ने तो इस पर बड़ी बेतुकी बात कही कि हम पर तो गांधी जी की हत्या का भी आरोप लगा है… हम पर तो सौ साल से आरोप लग रहे हैं…। उनकी यह खीझ अपने आप में कई सवाल खड़े करती है। वैसे मंदिर निर्माण के लिए पहले भी चंदे की हेर-फेर की बात उठती रही है। 80 के दशक में 14 सौ करोड़ की हेराफेरी का आरोप विहिप पर लगा था। देखना होगा कि इस बार आरोप कहां तक खिंच पाते हैं।  इनका उत्तरप्रदेश चुनाव तक सियासी लाभ लिया जाएगा या फिर धर्म के साथ नैतिकता को बचाया जाएगा।

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