लाशें विपक्ष की तरह खूब बोली, विपक्ष लाशों की तरह रहा ख़ामोश

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सियासत के सरताज अपनी मस्ती में मस्त हैं..


-तौसीफ़ क़ुरैशी॥


दुनिया कोरोना वायरस कोविड-19 के क़हर से कराह रही हैं लेकिन सियासत के सरताज अपनी मस्ती में मस्त रहें। विपक्ष की ख़ामोशी और लाशें खूब चिल्ला रही थी फिर भी सियासत दा अपनी गोटियाँ फ़िट करने में मशगूल रही या रहे हैं। हम बात करते हैं देश के सबसे बड़े राज्य उत्तर प्रदेश की। इस साल की शुरुआत से यूपी की सत्ता हासिल करने के लिए सियासत के सूरमाओं ने अपनी चौसर की चालों को चलना और समझना शुरू कर दिया है। यूपी में सियासी बिसात बिछने के साथ बड़े नेताओं के बीच जारी मनमुटावों को कैसे दूर किए जाए इस पर भी अंदर खाने एक्सरसाइज़ हो रही हैं।

ख़ैर जब हम यूपी की सियासत की बात करें और क्षेत्रीय दलों का ज़िक्र न हो यह संभव नहीं है। बसपा, सपा व रालोद यह तीन दल यूपी की सियासत को पिछले तीस सालों से अपने इर्द-गिर्द घूमाते रहे हैं अब आम आदमी पार्टी भी हाथ पैर मार राज्य की सियासत में अपने पैर ज़माने की कोशिश कर रही हैं। हालाँकि उनको अभी मोदी की भाजपा की बी टीम होने के टैग की भी सफ़ाई देनी पड़ रही हैं, साथ ही राष्ट्रीय पार्टी कांग्रेस भी प्रियंका गाँधी के नेतृत्व में अपनी खोई ज़मीन वापस पाने के लिए जी-तोड़ मेहनत कर रही हैं। हम बात करते हैं सपा की, इस पार्टी में पारिवारिक मनमुटाव के कारण 2017 में पार्टी के वरिष्ठ नेता शिवपाल सिंह यादव का भतीजे अखिलेश यादव से तालमेल न बैठ पाने के चलते अलग पार्टी बना लेने से सपा को भारी नुक़सान पहुंचा चुके हैं। सपा मात्र 47 सीट पर ही सिमट गई थी जिसकी भरपाई पिता के कंधों पर सवार होकर यूपी की सत्ता हासिल करने वाले सपा के अखिलेश यादव नहीं कर पाए थे और बुरी तरह चुनाव हार गए थे। जबकि तमाम दावों के और बसपा से गठबंधन के बावजूद सपा 2019 के लोकसभा चुनाव में मात्र पाँच सीटों पर ही जीत हासिल कर पायी थी।

इसी को ध्यान में रखते हुए सपा के संरक्षक पूर्व मुख्यमंत्री मुलायम सिंह यादव चाहतें है कि परिवार में चल रही रार को समाप्त कर एकजुटता के साथ 2022 का चुनाव एम-वाई के फ़ार्मूले पर लड़ा जाए। सूत्रों से मिल रही जानकारी के अनुसार मुलायम सिंह यादव ने अखिलेश यादव को मुसलमान और यादव के गठजोड़ को मज़बूत बनाने के साथ ही पिछड़ों पर फ़ोकस करने की नसीहत दी। चाचा भतीजे मुलायम सिंह यादव की मौजूदगी में हुई बैठक में ज़्यादा ना नुकर तो नहीं कर पाए लेकिन किसी ठोस नतीजे पर भी नहीं पहुँचे। सपा संरक्षक मुलायम सिंह यादव चाहतें है कि सपा खासकर सैनी , कुशवाह , शाक्य व मौर्य जातियों को साथ जोड़कर 2022 की चुनावी तैयारी करें। पूर्व मंत्री ओमप्रकाश राजभर ने एक गठबंधन बना रखा है जिसको भागीदारी संकल्प मोर्चा नाम दिया गया है। इसमें मीम के असदउद्दीन ओवैसी के भी शामिल होने का फ़ैसला हो चुका है। ओमप्रकाश राजभर का कहना है कि हमारा मोर्चा और भी छोटे दलों के साथ गठबंधन कर 2022 के चुनाव की तैयारी कर रहे हैं।

योगी सरकार में मंत्री रहे ओमप्रकाश राजभर को 2019 में मंत्री पद से बर्खास्त कर दिया गया था। उसके बाद से ही सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष ओमप्रकाश राजभर प्रदेश की सियासत को नई धार देने में लगे हैं। इनके मोर्चे में अभी तक आठ दल शामिल हो चुके हैं। इन दलों के नेता अलग-अलग जातियों का प्रतिनिधित्व करते हैं। कोरोना वायरस कोविड-19 के क़हर ने सरकारों की बदइंतज़ामी पर से तो पर्दा उठा दिया है लेकिन गोदी मीडिया ने सिस्टम शब्द का ईजाद कर मोदी की भाजपा सरकार को बचाने का प्रयास किया परन्तु जनता यह बात बख़ूबी महसूस कर रही हैं कि जिस सिस्टम को घुटनों पर चलने का रोना रोया जा रहा है उस सिस्टम का खेवनहार कौन हैं? क्या इसके लिए मोदी सरकार ज़िम्मेदार नहीं हैं? कोरोना वायरस कोविड-19 से आम जन बुरी तरह से प्रभावित हुआ लेकिन सरकारों के साथ-साथ विपक्ष लाशों की तरह ख़ामोश रहा और लाशें विपक्ष की तरह खूब बोलीं और इसका खामियाजा भाजपा को भोगना ही पड़ेगा तथा इसका फायदा उठाने के लिए विपक्षी दलों का महागठबंधन भी हो जाये तो कोई आश्चर्य नहीं।

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मीडिया दरबार के मॉडरेटर 1979 से पत्रकारिता से जुड़े हैं. एक साप्ताहिक से शुरूआत के बाद अस्सी के दशक में स्वतंत्र पत्रकार बतौर खोजी पत्रकारिता में कदम रखा, हिंदी के अधिकांश राष्ट्रीय अख़बारों में हस्ताक्षर. उसी दौरान राजस्थान के अजमेर जिले के एक सशक्त राजनैतिक परिवार द्वारा एक युवती के साथ किये गए खिलवाड़ पर नवभारत टाइम्स के लिए लिखी रिपोर्ट वरिष्ठ पत्रकार श्री मिलाप चंद डंडिया की पुस्तक "मुखौटों के पीछे - असली चेहरों को उजागर करते पचास वर्ष" में भी संकलित की गयी है. कुछ समय के लिए चौथी दुनियां के मुख्य उपसंपादक रहे किन्तु नौकरी कर पाने के लक्खन न होने से तेईस दिन में ही चौथी दुनिया को अलविदा कह आये. नब्बे के दशक से पिछले दशक तक दूरदर्शन पर समसामयिक विषयों पर प्रायोजित श्रेणी में कार्यक्रम बनाते रहे. अब वैकल्पिक मीडिया पर सक्रिय.
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