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आबादी के इस आकलन में एक से दो प्रतिशत की गलती हो सकती है, जिसका मतलब हुआ कि 31 अक्टूबर को दुनिया की आबादी सात अरब से करीब साढ़े पांच करोड़ ज्यादा या कम हो सकती है। ऐसे में इस बहस का क्या अर्थ है कि सात अरबवां बच्चा कहां जन्मा है?” -गेरहार्ड हिलिक (प्रमुख, संयुक्त राष्ट्र आबादी आकलन समिति)

दुनिया की आबादी सात अरब हो गई है। इस बीच, दुनियाभर में सात अरबवें बच्चे के जन्म को लेकर अलग-अलग दावे किए जा रहे हैं। विश्व के हर कोने में मीडिया का इस्तेमाल सात अरबवें बच्चे को स्थानीय बनाने में किया जा रहा है।

संयुक्त राष्ट्र ने फिलीपींस की राजधानी मनीला में जन्मी बच्ची को सांकेतिक रूप से सात अरबवां माना है। फिलीपींस में जन्मी बच्ची का नाम डानिका मे कमाचो रखा गया है। संयुक्त राष्ट्र के अधिकारियों ने बच्ची को केक भी भेंट किया। वहीं भारत की एक गैर सरकारी संस्था ‘प्लान इंडिया’ ने लखनऊ के माल इलाके में एक सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में सोमवार को पैदा हुई बच्ची नरगिस को दुनिया के सात अरबवें बच्चे के रूप में मान्यता दी है।

उधर, रूस ने अपने यहां पैदा हुए एक बच्चे को दुनिया का सात अरबवां इंसान बताया है। समाचार एजेंसी ‘आरआईए नोवोस्ती’ के अनुसार, इस बच्चे का जन्म पेट्रोपावलोवस्क-कामचातस्की शहर में रात हुआ। बच्चे का नाम अलेक्जेंडर रखा गया है। उसकी मां मरीना बोगदानोवा को बच्चे के सात अरबवें इंसान होने का प्रमाण-पत्र भी दिया गया है।

हालांकि फिलीपींस में संयुक्त राष्ट्र ने आधिकारिक तौर पर समारोह भी मनाया, लेकिन  दुनिया के सात अरबवें इंसान के रूप में अलग-अलग दावों को लेकर संयुक्त राष्ट्र का कहना है कि ऐसे दावे बेमतलब हैं। ‘बीबीसी’ के अनुसार, संयुक्त राष्ट्र में आबादी का आकलन करने वाली इकाई के प्रमुख गेरहार्ड हिलिक ने कहा कि यह कहना काफी मुश्किल है कि दुनिया का सात अरबवां बच्चा कहां पैदा हुआ होगा। आबादी के आकलन में एक से दो प्रतिशत की गलती हो सकती है। यानी 31 अक्टूबर को दुनिया की आबादी सात अरब से करीब साढ़े पांच करोड़ ज्यादा या कम हो सकती है। उन्होंने बढ़ती आबादी को लेकर चिंता भी जताई।

‘प्लान इंडिया’ द्वारा लखनऊ में पैदा हुई बच्ची को सात अरबवें इंसान के रूप में मान्यता देने के पीछे वजह कन्या भ्रूण हत्या की समस्या को सामने लाना माना जा रहा है। समझा जा रहा है कि इससे लोगों को लड़कियों को भी समान अधिकार देने की प्रेरणा मिलेगी।

लेकिन किस्सा अभी यहीं खत्म होने नहीं जा रहा। संयुक्त राष्ट्र ने कहा है कि गणना में गलती संभव है इसलिए इस बार प्रत्येक देश को अपना सात अरबवां बच्चा घोषित करने की छूट है। उधर अमेरिकी जनसंख्या ब्यूरो के मुताबिक, यह आंकड़ा अगले साल अप्रैल में पहुंचेगा, जबकि वाशिंगटन स्थित प्राइवेट पॉपुलेशन रेफ्रेंस ब्यूरो की मानें तो कई सप्ताह पहले ही आबादी इस आंकड़े को पार कर चुकी है। एक और संस्थान- एप्लाइड इंस्टीटय़ूट फॉर सिस्टम एनालाइसेज के अनुसार, यह आंकड़ा अगले साल जुलाई से 2013 के जनवरी के बीच छुएगा।

अभी तो ये शुरुआत है। आगे-आगे देखिए सात अरब की जनसंख्या का जश्न मीडिया कितने दिनों तक और किस उद्देश्य के साथ कहां-कहां मनवाता है।

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By admin

मीडिया दरबार के मॉडरेटर 1979 से पत्रकारिता से जुड़े हैं. एक साप्ताहिक से शुरूआत के बाद अस्सी के दशक में स्वतंत्र पत्रकार बतौर खोजी पत्रकारिता में कदम रखा, हिंदी के अधिकांश राष्ट्रीय अख़बारों में हस्ताक्षर. उसी दौरान राजस्थान के अजमेर जिले के एक सशक्त राजनैतिक परिवार द्वारा एक युवती के साथ किये गए खिलवाड़ पर नवभारत टाइम्स के लिए लिखी रिपोर्ट वरिष्ठ पत्रकार श्री मिलाप चंद डंडिया की पुस्तक "मुखौटों के पीछे - असली चेहरों को उजागर करते पचास वर्ष" में भी संकलित की गयी है. कुछ समय के लिए चौथी दुनियां के मुख्य उपसंपादक रहे किन्तु नौकरी कर पाने के लक्खन न होने से तेईस दिन में ही चौथी दुनिया को अलविदा कह आये. नब्बे के दशक से पिछले दशक तक दूरदर्शन पर समसामयिक विषयों पर प्रायोजित श्रेणी में कार्यक्रम बनाते रहे. अब वैकल्पिक मीडिया पर सक्रिय.

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