Home गौरतलब नेहरूजी नहीं तो, टूलकिट ही सही

नेहरूजी नहीं तो, टूलकिट ही सही

देश में कोरोना की दूसरी लहर के कारण जो तबाही आई है, उसकी दर्दनाक तस्वीरें मीडिया पर रोजाना प्रसारित हो रही हैं। अस्पतालों के बाहर मरीज लाइन लगाकर अपनी बारी का इंतजार कर रहे हैं। मरीजों को परिजन कहीं कंधे पर लेकर, कहीं रिक्शे या ठेले पर अस्पताल ले जा रहे हैं। वैक्सीन की कमी के कारण टीकाकरण कार्यक्रम बार-बार रुक रहा है। दवाओं और आक्सीजन सिलेंडरों की कालाबाजारी खुलेआम हो रही है। निजी अस्पताल इलाज के नाम पर मनमानी फीस ले रहे हैं।

श्रद्धांजलियों की बाढ़ सी आ गई है, क्योंकि हर दिन 4 हजार से अधिक मौतें हो रही हैं। श्मशानों और कब्रिस्तानों में भी अंतिम संस्कार के लिए लाइन लगने लगी, तो लोग अब नदियों के किनारे लाशों को दफना रहे हैं या नदी में बहा रहे हैं। इस बीच कोरोना से लड़ने के नाम पर बने पीएम केयर्स फंड में आई करोड़ों की राशि का क्या उपयोग हुआ, सरकार ने इसकी कोई साफ-साफ जानकारी नहीं दी। अलबत्ता इस फंड से जो वेंटिलेटर्स की आपूर्ति हुई, उनमें खामियां पाई गईं। देश में तबाही का ऐसा मंजर पहले कभी नहीं देखा गया, न ही इतनी आपदा में सरकार को गायब देखा गया।

भारतीय मीडिया का बड़ा हिस्सा तो सरकार का पिठ्ठू है, इसलिए वह सरकार की खबर नहीं ले रहा है। अलबत्ता विदेशों में मोदी सरकार की विफलता, उसकी नीतियों की खामियों और लापरवाही पर कई बड़े प्रकाशनों ने खुलकर लिखा है। कोरोना के खतरे के बावजूद कुंभ मेले का आयोजन या पांच राज्यों में विधानसभा चुनाव और उत्तरप्रदेश में पंचायत चुनाव करवाना किस कदर घातक साबित हुआ, इस पर कई लेख लिखे गए। देश में भी सरकार से बेखौफ कई स्वतंत्र विचारकों, पत्रकारों और नेताओं ने इस जानलेवा लापरवाही की खूब आलोचना की। लेकिन अपनी गलती मानने या सुधारने की जगह भाजपा ने आलोचकों पर ही उंगली उठाना शुरु कर दी। भाजपा ने अब कांग्रेस पर आरोप लगाया है कि वह टूलकिट के जरिए मोदीजी को बदनाम करने का अभियान चला रही है। भाजपा प्रवक्ता संबित पात्रा ने इस संबंध में एक प्रेस कांफ्रेंस कर तथाकथित कांग्रेसी टूलकिट को दिखाया, जिसमें कुंभ को सुपर स्प्रेडर और इंडियन स्ट्रेन को मोदी स्ट्रेन कहा जा रहा है। भाजपा का आरोप है कि राहुल गांधी जो ट्वीट करते हैं, वह इसी टूलकिट का हिस्सा है।

संबित पात्रा के आरोपों को सुनकर गालिब का शेर याद आता है कि इस सादगी पे कौन न मर जाए ऐ खुदा, लड़ते हैं और हाथ में तलवार भी नहीं है। भाजपा इतनी मासूम और इतनी भोली कैसे हो गई कि एक मामूली सा विपक्षी दल, जिसे वह खत्म मान चुकी है, टूलकिट के जरिए मोदीजी जैसे शक्तिशाली नेता को बदनाम कर दे। याद कीजिए इससे पहले किसान आंदोलन में किसानों के पक्ष में आवाज उठाने वाली पर्यावरण कार्यकर्ता दिशा रवि को भी टूलकिट के जरिए साजिश फैलाने के आरोप में भाजपा सरकार ने रातोंरात गिरफ्तार किया था। उस वक्त टूलकिट प्रकरण से भाजपा को कोई खास लाभ हासिल नहीं हुआ, उसके खिलाफ आवाज उठाने वाले न डरे न झुके। और अब भी माहौल वैसा ही लग रहा है। कांग्रेस ने झूठे आरोप लगाने पर संबित पात्रा के खिलाफ कानूनी कार्रवाई का फैसला लिया है। वैसे भाजपा का यह कदम एक ओर मोदीजी की छवि बचाने की कोशिश है, तो दूसरी ओर जनता का ध्यान भटकाने की साजिश भी लगता है। 

गौरतलब है कि मोदी जी हिंदुत्व, राष्ट्रवाद और सोशल मीडिया के कंधों पर चढ़कर केंद्र की सत्ता तक पहुंचे हैं। भाजपा के पास सोशल मीडिया की बाकायदा फौज है, जिसमें उसके सिपाही चौबीसों घंटे सरकार के पक्ष में प्रचार करते हैं और विरोधियों पर किसी भी हद तक नीचे गिरकर वार करते हैं। अगर इसमें कहीं कमी रह जाए तो फर्जी तरीके से सरकार की विशालकाय छवि बनाने में जुट जाते हैं। पिछले दिनों द डेली गार्जियन नाम की वेबसाइट में मोदीजी की तारीफ वाला लेख इस बात का सबूत है। इस लेख में कहा गया था कि मोदीजी कड़ी मेहनत कर रहे हैं। लोगों को एकबारगी इस के नाम से भ्रम हो गया कि यह इंग्लैंड का गार्जियन अखबार है, जबकि यह वेबसाइट भाजपा के एक कार्यकर्ता ने उत्तरप्रदेश में बनाई थी। इसी तरह कोरोना की दूसरी लहर के लिए जब सीधे-सीधे मोदीजी पर उंगली उठने लगी कि उन्होंने किस गुमान में कोरोना से जंग जीतने का दावा किया था, तो जवाब में मोदी समर्थकों ने सिस्टम को दोषी ठहराने का अभियान छेड़ दिया। ताकि जनता मोदीजी की जगह सिस्टम की असफलता को याद रखे।

टूलकिट का हौव्वा खड़ा कर भाजपा एक बार फिर कांग्रेस के सिर ही हालात बिगड़ने का ठीकरा फोड़ना चाहती है। अब तक देश में हुई सारी गड़बड़ियों के लिए नेहरू-गांधी परिवार, कांग्रेस सरकार और खासकर पं. नेहरू को दोषी ठहराने का काम भाजपा ने किया है। कोरोना महामारी के इस दौर में न नेहरूजी हैं, न कांग्रेस सत्ता में है, तो बजरिए टूलकिट भाजपा ने अपना दोष कांग्रेस पर मढ़ना चाहा है। देखना होगा कि जनता इस कथित टूलकिट का सही विश्लेषण कर पाती है या नहीं।

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