Home गौरतलब जब दुख के बादल छटेंगे और सही वक़्त आएगा, सब याद रखा जाएगा..

जब दुख के बादल छटेंगे और सही वक़्त आएगा, सब याद रखा जाएगा..

राजस्थान ब्यूरो रिपोर्ट॥

देशभर में कोरोना से स्थिति भयावह होती जा रही है। ऑक्सीजन को लेकर हाहाकार मचा है। मरीजों को ऑक्सीजन नहीं मिल रही है, जिससे उनकी जान जा रही है। ऑक्सीजन का संकट सबसे ज्यादा देश की राजधानी दिल्ली में है। दिल्ली के सर गंगा राम अस्पताल के चिकित्सा निदेशक ने कहा कि ऑक्सीजन की वजह से अस्पताल में पिछले 24 घंटे में 25 मरीजों की मौत हो गई है। बात राजस्थान के हालात की करें तो यहां मरीज़ 1 लाख का आंकड़ा पार कर गये हैं। कल 14 हज़ार 468 नए रोगी मिलने के साथ ही 59 मौतें भी दर्ज की गईं। राज्य सरकार ने अस्पतालों में ऑक्सीजन की पर्याप्त आपूर्ति के लिये 11 से अधिक ऑक्सीजन गैस औद्योगिक इकाइयों का अधिग्रहण कर लिया है। इसके अलावा अफसर ऑक्सीजन की किल्लत दूर करने की रणनीति में लगे हैं। औद्योगिक इकाइयों को भी ऑक्सीजन के ज़्यादा प्रोडक्शन के लिये कहा गया है। मुख्यमंत्री अशोक गहलोत अपनी सतत मॉनिटरिंग में इस काम को अंजाम दे रहे हैं। गहलोत सरकार की पूरी मशीनरी इस समय जीवनदायिनी दवाओं की उपलब्धता के लिये एड़ी चोटी का ज़ोर लगाए है। कल मंत्री रघु शर्मा ने केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री से बात की तो वहीं मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने कैबिनेट सेक्रेटरी और लोकसभा स्पीकर को समस्या से अवगत कराते हुए प्रदेश की ऑक्सीजन आपूर्ति के लिये प्रयास तेज़ करने का आह्वान किया है।

इन सब कोशिशों के बावजूद जो खबरें सामने आ रही हैं उनसे घृणा और क्रोध के सिवा मन में कोई अन्य भाव पैदा नहीं हो पा रहा है। प्रदेश में तमाम इंतज़ाम करने के बावजूद मरीज़ों की बढ़ती संख्या अस्पतालों की सांसे फुला रही है। राजस्थान एक्टिव रोगियों के मामले में देश में छठे नंबर पर पहुंच गया है लेकिन इस समय भी मोदी सरकार को राजनीतिक द्वेष दिखाई दे रहे हैं। खबरों के मुताबिक राज्यों को ऑक्सीजन देन में केंद्र की मोदी सरकार पक्षपात पर उतर आई है। 3 भाजपा शासित राज्यों गुजरात, हरियाणा और मध्यप्रदेश में जहां एक्टिव रोगी राजस्थान के मुकाबले कम हैं, वहां प्रदेश से अधिक ऑक्सीजन सप्लाई की जा रही है। जबकि राजस्थान को 17वें नंबर पर पटक दिया गया है। जो ये दर्शाता है कि मोदी सरकार महामारी में भी कुटिल राजनीति कर विपक्षी पार्टियों द्वारा रूलिंग राज्यों के साथ भेदभाव कर रही है। किसी अन्य राज्य से तो छोड़िए राजस्थान को उसके खुद के उत्पादन की महज़ 54 प्रतिशत ऑक्सीजन ही मिल पा रही है, जबकि गुजरात को उसके उत्पादन का क्षत प्रतिशत ऑक्सीजन इस्तेमाल करने का अधिकार केंद्र से मिला हुआ है। यही हाल बंगाल का है जिसे भी अपने उत्पादन का करीब आधा हिस्सा उत्तर प्रदेश, एमपी और छत्तीसगढ़ को देना है।

मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने पीएम मोदी के सामने इस मामले की ब्रीफिंग भी की है। उन्होंने आरोप लगाया है कि बीजेपी सरकार ऑक्सीजन और रेमडेसिवीर का आवंटन भेदभाव के आधार पर कर रही है। खैर मोदी सरकार जो करे सो कम। इस असंवेदनशील सरकार से बदले की राजनीति के सिवा क्या ही अपेक्षा की जा सकती है। हालांकि राहत देने वाली बात ये है कि राजस्थान में कोरोना प्रबंधन अब भी दूसरे राज्यों की तुलना में बेहतर है। सीएम गहलोत की बदौलत ऑक्सीजन के लिये राज्य सरकार तेज़ी से सक्रिय हुई है। अपने अफसरों के द्वारा सरकार ने महज़ 4 ही दिन में 270 मीट्रिक टन ऑक्सीजन की उपलब्धता हासिल कर ली है। यानी जो मांग राजस्थान के स्वास्थ्य मंत्री ने कल ही केंद्रीय मंत्री से की थी उसके लिये भी केंद्र पर निर्भरता प्रदेश ने स्वयं ही खत्म कर दी है। अब प्रदेश को दो दिन में 28 से 30 हज़ार ऑक्सीजन सिलेंडर मिल सकेंगे। इसके अलावा भी कुछ निजी कंपनियों से ऑक्सीजन लेने की कोशिशें जारी हैं ताकि अगले 5 दिनों में 370 मीट्रिक टन ऑक्सीजन का इंतज़ाम करवाया जा सके।

इस सबके बावजूद प्रदेश बीजेपी विदेशों को दान किये गये 6 करोड़ टीकों का आंकड़ा अनदेखा कर राज्य सरकार द्वारा 20 हज़ार रेमडेसिवीर इंजेक्शन पंजाब की मदद के लिये देने का दुखड़ा रो रही है। वह भी उस समय दिये गये थे जब राज्य के हालात बेहतर थे और कोरोना रिकवरी दर 98 प्रतिशत का आंकड़ा पार कर चुकी थी। लेकिन मोदी सरकार ने तो देश की ही मांग को अनदेखा कर अपनी पब्लिसिटी के लिये जनता की जानों को दांव पर लगा कर कोरोना वैक्सीन का निर्यात किया। इन हालातों में जबकि राजनीतिक मतभेदों को भुलाकर देश को एकजुटता के सूत्र में पिरोना चाहिये, मोदी सरकार और उसके नुमाइंदे आरोप प्रत्यारोप के गणित में उलझे हुए हैं। आज राज्य की या देश की स्थिति जो भी हो लेकिन कल जब परिदृश्य बदलेगा और जीवन एक बार फिर पटरी पर लौट जाएगा तब ये जनता याद रखेगी कि उसके आंसुओं से भीगी चिताओं पर बीजेपी बंगाल में ठहाकों का प्रचार कर रही थी। सांस के एक एक कतरे के लिये तरसते लोगों को इस मोदी सरकार ने अपने राजनीतिक द्वेष की भट्टी में झोंक दिया था। जब भी दुःख के बादल छटेंगे और सही वक़्त आएगा, सब याद रखा जाएगा।

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