नीता अंबानी और बीएचयू

नीता अंबानी और बीएचयू

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बनारस हिंदू विश्वविद्यालय में नीता अंबानी को विजिटिंग प्रोफेसर बनाने पर विवाद उठ खड़ा हुआ है। नीता अंबानी की गिनती देश की अग्रणी महिलाओं में होती है। क्योंकि वे व्यापार के साथ खेल, समाजसेवा, शिक्षा आदि अनेक क्षेत्रों में सक्रिय हैं। वे रिलायंस इंडस्ट्रीज की कार्यकारी निदेशक और रिलायंस फाउंडेशन की अध्यक्ष हैं। निश्चित ही इन उपलब्धियों में उनकी अपनी मेहनत शामिल है। लेकिन इस तथ्य से इंकार नहीं किया जा सकता कि वे देश के अग्रणी उद्योगपति मुकेश अंबानी की पत्नी हैं। और इस वजह से भी उनका ओहदा इतना ऊंचा है। अगर वे किसी साधारण परिवार की होतीं और फिर इन ऊंचाइयों को छूतीं तो उनकी उपलब्धियां बेहद खास मानी जाती। तब वे किसी विश्वविद्यालय में विजिटिंग प्रोफेसर नियुक्त होतीं तो इससे उनकी प्रतिष्ठा के साथ-साथ उस विश्वविद्यालय की प्रतिष्ठा भी बढ़ती। लेकिन अभी नीता अंबानी को विजिटिंग प्रोफेसर बनाए जाने पर बीएचयू के छात्र नाराज हैं।

दरअसल विश्वविद्यालय के सामाजिक विज्ञान संकाय के महिला अध्ययन और विकास केंद्र की ओर से 12 मार्च को रिलायंस इंड्रस्टीज की कार्यकारी निदेशक नीता अंबानी को विश्वविद्यालय में विजिटिंग प्रोफेसर बनाए जाने के लिए प्रस्ताव भेजा गया था। संकाय के डीन कौशल किशोर मिश्रा ने कहा कि नीता अंबानी के अलावा प्रीति अडानी और ऊषा मित्तल जैसी महिलाओं को भी विजिटिंग प्रोफेसर बनाने के लिए प्रस्ताव भेजा जाएगा। कौशल किशोर मिश्रा ने कहा कि ग्रैजुएशन और पोस्ट-ग्रैजुएशन कोर्स के अलावा महिला सशक्तिकरण के संबंध में हम अकादमिक और शोध कार्य करते हैं।

परोपकारी उद्योगपतियों को विश्वविद्यालय से जोड़ने की पुरानी परंपरा के तहत हमने रिलायंस फाउंडेशन को पत्र भेजकर पूछा था कि क्या नीता अंबानी महिला अध्ययन केंद्र में विजिटिंग प्रोफ़ेसर के तौर पर शामिल हो सकती हैं ताकि हम उनके अनुभव का लाभ ले सकें। हमने ऐसा इसलिए किया क्योंकि रिलायंस फ़ाउंडेशन ने महिला सशक्तिकरण के क्षेत्र में बहुत काम किया है।

गौरतलब है कि बीएचयू समेत दुनिया के लगभग सभी उच्च शिक्षण संस्थानों में विजिटिंग प्रोफेसर नियुक्त किए जाते हैं। इससे छात्रों को अलग-अलग क्षेत्रों के विशेषज्ञों के अनुभव का लाभ मिलता है, उनसे सीधे संवाद का अवसर मिलता है। लेकिन इस नियुक्ति में विषय पर विशेषज्ञता सबसे बड़ा पैमाना होना चाहिए। सामाजिक विज्ञान और महिला अध्ययन व विकास आदि पर नीता अंबानी की क्या योग्यता है, वे इस क्षेत्र पर कितना अकादमिक और कितना व्यावहारिक ज्ञान रखती हैं, यह जानना दिलचस्प होगा।

वैसे नीता अंबानी ने वाणिज्य की पढ़ाई की है और वे प्राथमिक स्कूल में शिक्षिका भी रही हैं। रिलायंस फाउंडेशन के तहत समाजसेवा के अनेक कार्यों में सक्रिय हैं। इस तरह की उपलब्धियां और भी कई महिलाओं ने हासिल की हैं। लेकिन बीएचयू ने नीता अंबानी को विजिटिंग प्रोफेसर बनाना चाहा, तो उसके पीछे निश्चित ही उनका एक बड़े औद्योगिक घराने से संबद्ध होना है। बीएचयू के छात्र इसी का विरोध कर रहे हैं।

मंगलवार को कुछ छात्र कुलपति आवास के बाहर धरने पर बैठ गए। उन्होंने आरोप लगाया कि विश्वविद्यालय में योग्यता नहीं बल्कि पूंजीपतियों को जोड़ा जा रहा है। इसके लिए उनके घर की महिलाओं को विश्ववविद्यालय में विजिटिंग प्रोफेसर बनाने का प्रस्ताव भेजा जा रहा है। धरने पर बैठे छात्रों से मिलने कुलपति राकेश भटनागर पहुंचे और छात्रों के मुताबिक, कुलपति श्री भटनागर ने उन्हें ये आश्वासन दिया है कि ऐसे किसी को भी विश्वविद्यालय में विजिटिंग प्रोफेसर नहीं बनाया जाएगा। लेकिन अब इस मामले में एक नया मोड़ आ गया है। रिलायंस इंडस्ट्रीज लिमिटेड के प्रवक्ता ने कहा कि बनारस हिंदू विश्वविद्यालय में विजिटिंग प्रोफेसर बनाई जाने की खबरें फर्जी हैं। नीता अंबानी को विश्वविद्यालय से कोई प्रस्ताव नहीं मिला है। नीता अंबानी की ओर से आए इस खंडन से उनकी नियुक्ति पर उठ रहे सवाल तो शांत हो जाएंगे।

लेकिन एक नया सवाल खड़ा हो रहा है कि आखिर सच कौन बोल रहा है। बीएचयू ने क्या वाकई नीता अंबानी को विजिटिंग प्रोफेसर बनाने के लिए कोई औपचारिक प्रस्ताव भेजा था या केवल किसी मौखिक बातचीत के आधार पर सारी बातें तय मान ली गई थीं। अगर ऐसा था तो क्या बीएचयू के स्तर के विश्वविद्यालय को इतने हल्के अंदाज में किसी बड़ी हस्ती को विजिटिंग प्रोफेसर बनाने जैसी बात करना चाहिए। क्या नीता अंबानी की ओर से किसी विवाद से बचने के लिए प्रस्ताव का खंडन किया गया है। अगर बीएचयू ने वाकई लिखित में कोई प्रस्ताव भेजा है, तो उसे बतौर साक्ष्य तत्काल प्रस्तुत करना चाहिए ताकि विश्वविद्यालय की साख पर सवाल न उठें।

बीएचयू का यह विवाद किस मोड़ पर जाकर खत्म होगा, ये देखना होगा। वैसे यह देखना दुखद है कि देश का एक ख्यातिनाम शिक्षण संस्थान पिछले कुछ समय से गलत कारणों से सुर्खियों में रहा है। छात्रा के साथ छेड़खानी, छात्रों और डाक्टरों के बीच मारपीट जैसे विवादों के अलावा 2019 में बीएचयू में संस्कृत विद्या एवं धर्म विज्ञान संकाय के साहित्य विभाग में डॉक्टर फिरोज खान की नियुक्ति का छात्रों ने विरोध किया था। अब एक बार फिर बीएचयू में प्राध्यापक की नियुक्ति पर विवाद उठा है। इसका कारण चाहे जो हो, लेकिन बीएचयू समेत देश के कई विश्वविद्यालयों में अध्ययन और शोध से अधिक विवादों की गूंज सुनाई देने लगे, तो देश के शैक्षणिक क्षेत्र के लिए अच्छे दिन नहीं आए हैं, ये मान लेना चाहिए।

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