दुश्मन के लिए भी इस किस्म का हास्य-व्यंग्य बर्दाश्त हो तो कैसे हो!

दुश्मन के लिए भी इस किस्म का हास्य-व्यंग्य बर्दाश्त हो तो कैसे हो!

Page Visited: 1646
0 0
Read Time:7 Minute, 36 Second

खबरों की दुनिया में कभी सूखा नहीं रहता। दुनिया के किसी हिस्से में बाढ़ आई हुई रहती है, तो किसी दूसरे हिस्से में बर्फ इतनी जमती है कि बड़े-बड़े अमरीकी शहरों में पूरी कार पट जाती है। कहीं चुनाव चलते रहता है, तो कहीं जंग, कहीं हिंसा होती है, तो कहीं पर छोटी बच्चियां पढऩे के हक के लिए या पर्यावरण को बचाने के लिए बड़ी शहादत देते दिखती हैं। हिन्दुस्तान जैसा विविधताओं से भरा हुआ देश तो बारहमासी खबरदार रहता है, यानी खबरों से लबालब। ऐसे में चीन से एक बड़ी दिलचस्प खबर आई है..

-सुनील कुमार॥

चीन में बुद्ध की बहुत किस्म की प्रतिमाएं प्रचलन में हैं। इनमें से कुछ प्रतिमाओं के साथ कई किस्म के टोने-टोटके भी जुड़े रहते हैं। एक बहुत मोटे पेट वाले बड़े हॅंसते हुए बुजुर्ग की एक प्रतिमा लाफिंग बुद्धा नाम से जानी जाती है जिसके बारे में यह टोटका भी रहता है कि उसे अपने पैसों से नहीं खरीदा जाता, कोई दूसरा तोहफे में दे तो ही उस प्रतिमा को रखा जाता है। चीन के एक किस्म के वास्तुशास्त्र के मुताबिक इस प्रतिमा को किसी खास जगह या कोने पर रखकर उससे शुभ होने की उम्मीद भी की जाती है। ऐसे चीन में कल से एक नई प्रतिमा की खबर आई है जिसमें बुद्ध की मुद्रा में पिछले अमरीकी राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रंप बैठे दिख रहे हैं। वे अपने मिजाज के खिलाफ एक अभूतपूर्व शांत मुद्रा में दिख रहे हैं जो कि नामुमकिन किस्म की बात है, और उनकी ऐसी ही मुद्रा की वजह से यह प्रतिमा वहां दनादन बिक रही है। अब यह भी बुद्ध धर्म की एक उदारता है कि इस प्रतिमा को धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचाने वाला नहीं माना जा रहा है, और चीनी लोग ट्रंप के तमाम चीन-विरोध के बावजूद इस प्रतिमा को खरीद रहे हैं। खरीदने के पीछे लोगों का कहना है कि वे महज दिल्लगी के लिए इसे खरीद रहे हैं क्योंकि ट्रंप कभी शांत दिखता नहीं था, और इस प्रतिमा में वह शांत दिख रहा है। कुछ लोगों का कहना है कि वे मजाक के तौर पर इस प्रतिमा को रखने वाले हैं ताकि यह याद पड़ता रहे कि इंसानों को कैसा नहीं बनना चाहिए।

किसी ने ऐसी कल्पना की होती कि चीनी एक वक्त इतनी रफ्तार से ट्रंप की प्रतिमा खरीदेंगे, तो हो सकता है कि लोग उस पर हॅंसे होते। लेकिन आज तो ऐसा हो रहा है, और अमरीका का रूख चीन के लिए नए राष्ट्रपति के तहत भी कोई बहुत नर्म नहीं हुआ है। यह बात बताती है कि लोग प्रतीकों का तरह-तरह से इस्तेमाल कर सकते हैं। ट्रंप जैसे बदनाम और बेइंसाफ तानाशाह किस्म के आदमी को भी शांत बनाकर हास्य के रूप में या व्यंग्य के रूप में, सबक या सावधानी के रूप में सामने रखा जा सकता है। लोग खुले मन से, अपनी नफरत को परे रखकर ऐसे प्रतीकों का इस्तेमाल कर सकते हैं। और फिर यह भी याद रखने की जरूरत है कि यह चीन, फ्रांस की किसी पत्रिका की तरह, या योरप के दूसरे हिस्सों के मीडिया की तरह का अतिउदारवादी देश नहीं है, और वह वामपंथी विचारधारा के तहत चलने वाला, एक बहुत ही तंगदिल सरकार के तहत काम करने वाला देश है जहां पर राजनीतिक हॅंसी-मजाक की अधिक संभावना नहीं दिखती है। ऐसे देश में जब ट्रंप की प्रतिमा की शक्ल में यह नया हास्य-व्यंग्य चल रहा है, तो चीनी सरकार और चीनी जनता के इस बर्दाश्त पर गौर भी किया जाना चाहिए। साथ ही दुनिया भर में जहां-जहां धार्मिक भावनाओं के आहत होने की तोहमत लगाकर बड़े पैमाने पर हिंसा को जायज ठहराया जाता है, उन लोगों को भी यह सीखने की जरूरत है कि धार्मिक प्रतीकों का इस्तेमाल सामाजिक हास्य-व्यंग्य के लिए भी किया जा सकता है, और किया जा रहा है। जिस चीन में मुस्लिम अल्पसंख्यक समुदाय को अमानवीय हालात में रखकर उस नस्ल को खत्म करने की हर कोशिश हो रही है, उस चीन में यह नया सामाजिक कारोबारी-प्रयोग देखने लायक है क्योंकि चीन एक बौद्ध-बहुल देश है, और धर्म वहां योरप के कुछ देशों की तरह महत्वहीन नहीं हो गया है, वहां धर्म की अभी खासी भूमिका है। ट्रंप की इस प्रतिमा के, बुद्ध की तरह शांत बैठे हुए किरदार के सामाजिक इस्तेमाल के मायने सोचने की जरूरत है, हो सकता है दुनिया के दूसरे कट्टर और धर्मान्ध देश इससे कुछ सीख पाएं।

नेताओं की प्रतिमा की ही बात करें, तो योरप के बहुत से देशों में वहां के मौजूदा राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री, या चांसलर जैसे लोगों के मखौल उड़ाते हुए बड़े-बड़े बुत बनाए जाते हैं, और उन्हें झांकी की तरह सडक़ों पर निकाला जाता है। खुद अमरीका में ट्रंप के राष्ट्रपति रहते हुए ट्रंप के ऐसे गुब्बारेनुमा पुतले बनाए जाते थे जिन्हें सडक़ों से निकालते हुए लोग पीछे दौडक़र जाते थे, और उसे लात मारकर आते थे। पश्चिम की एक अलग उदार संस्कृति है जिसमें लोगों को दूसरों के अपमान करने की पूरी छूट है, और लोग उसका इस्तेमाल भी खुलकर करते हैं, और ऐसा किसी ने नहीं सुना कि राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रंप के पुतले को लात मारने वाले की गाड़ी का पुलिस ने चालान भी कर दिया हो। लेकिन चीन का हाल पश्चिम से बिल्कुल अलग है, वहां पर इस किस्म की प्रतिमा एक अलग मिजाज है, और अगर लोग उसे खरीदकर इसलिए सजाने वाले हैं कि उन्हें यह याद रहे कि उन्हें कैसा नहीं बनना है, तो यह एक नियंत्रित देश की फौलादी जकड़ के बीच व्यंग्य की एक नई अभिव्यक्ति है!

Happy
Happy
100 %
Sad
Sad
0 %
Excited
Excited
0 %
Sleepy
Sleepy
0 %
Angry
Angry
0 %
Surprise
Surprise
0 %
Facebook Comments

Average Rating

5 Star
0%
4 Star
0%
3 Star
0%
2 Star
0%
1 Star
0%

प्रातिक्रिया दे

आपका ईमेल पता प्रकाशित नहीं किया जाएगा. आवश्यक फ़ील्ड चिह्नित हैं *

This site uses Akismet to reduce spam. Learn how your comment data is processed.

Visit Us On TwitterVisit Us On FacebookVisit Us On YoutubeVisit Us On LinkedinCheck Our FeedVisit Us On Instagram