किरण बेदी के 18 और मामले छपे इंडियन एक्सप्रेस में, ट्रैवेल एजेंट ने भी पल्ला झाड़ा

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टीम अन्ना की अहम सदस्य और पूर्व आईपीएस अधिकारी किरण बेदी के किराया वापस कर देने के ऐलान के बाद भी विवाद थमने का नाम ही नहीं ले रहा। अपनी सभाओं के आयोजकों से ज्यादा हवाई किराया वसूलने के 12 मामलों की सफाई देने में लाचार बेदी के सामने 18 और मामलों की लिस्ट आ गई है। उनकी संस्था के सदस्य और ट्रैवेल एजेंट ने भी इस्तीफा देते हुए मीडिया को बताया है कि उसने कभी फर्ज़ी बिल नहीं बनाए, जैसा कि बेदी ने कहा था। उधर कांग्रेस ने उनकी किराया वापसी की घोषणा पर सवाल दागा है कि कनिमोझी के चैनल ने भी घोटाले में ली गई रकम लौटाने का सिलसिला शुरू कर दिया था, लेकिन वो जेल में क्यों हैं?

अंग्रेजी अखबार ‘ इंडियन एक्सप्रेस ‘ ने पहले के 12 मामलों के बाद मंगलवार को वैसे ही 18 और मामलों की लिस्ट छाप दी है। इस तरह अब तक कुल 30 मामले आ गए हैं जिनमें भ्रष्टाचार विरोधी मुहिम में बढ़-चढ़ कर हिस्सा लेने वाली किरण बेदी खुद आरोपों के घेरे में हैं। वहीं बेदी के करीबी सूत्रों का कहना है कि वह पहले ही कह चुकी हैं कि ज्यादा वसूला गया किराया लौटा दिया जाएगा, इसलिए जितने भी मामले हैं, यह सभी पर लागू होता है।

गौरतलब है कि किरण बेदी वीरता पुरस्कार से सम्मानित रह चुकी हैं और इसीलिए उन्हें एअर-इंडिया अपने हवाई किराए में 75% की रियायत देता है। किरण बेदी शुरु से इस छूट का इस्तेमाल कर रही थीं और रियायती किराए पर इकोनॉमी क्लास में सफर करती थीं, लेकिन जो भी संस्थाएं या शिक्षण संस्थान उन्हें अपने यहां वक्तव्य देने के लिए बुलाते थे, उनसे वह बिजनेस क्लास का पूरा किराया वसूलती थीं।

जब इंडियन एक्सप्रेस ने इस गड़बड़-झाले पर से 12 मामलों का हवाला दे कर पर्दा हटाया तो बेदी ने सफाई दी थी कि ज्यादा वसूला गया किराया उनकी जेब में नहीं जाता था। उस रकम से उनका एनजीओ गरीब बच्चों आदि की भलाई के काम करता है। यह अलग बात है कि उनके एनजीओ खुद पारदर्शिता नहीं बरतते। उनपर अपनी बेटी को बिना किसी चुनाव या कागजी कार्रवाई के एक संस्था का प्रमुख बना देने का आरोप है। हाल ही में उनकी दो संस्थाओं को इनकम टैक्स का नोटिस मिला था तो उन्होंने ट्विटर पर सवालों की झड़ी लगा दी थी।

ज्यादा किराया वसूलने के मामले पर मीडिया के साथ-साथ पूर्व मुख्य न्यायाधीश जस्टिस जे एस वर्मा और कर्नाटक के पूर्व लोकायुक्त संतोष हेगड़े ने भी सवाल कड़े किए तो किरण बेदी ने रकम लौटाने की बात कही थी। कांग्रेस महासचिव दिग्विजय सिंह ने सवाल किया था कि यदि ए. राजा कहें कि उन्होंने एनजीओ के लिए पैसा लिया और उसे लौटा रहे हैं, तो क्या वह सही हो जाएंगे?

इस बीच किरण बेदी की मुश्किलों को और बढ़ाते हुए फ्लाईवेल ट्रेवल के संचालक तथा उनके इंडिया विजन फाउंडेशन के ट्रस्टी अनिल बल ने एनजीओ छोड़ते हुए कहा कि अपने मेजबानों से अधिक वसूलने का बचाव करने से यह गलत संदेश गया है कि वह इसके लिए जिम्मेदार हैं।

कांग्रेस के एक अन्य नेता ने कहा कि 2जी स्पेक्ट्रम अलॉटमेंट के बाद कनिमोझी के टीवी चैनल के अकाउंट में शाहिद बलवा की कंपनी से 200 करोड़ रुपये की रकम आने का आरोप है। बाद में टीवी चैनल ने उस रकम को बतौर उधार लिया गया बता कर वापस करना भी शुरू कर दिया था, लेकिन कनिमोझी अब तक जेल में हैं, फिर किरण बेदी इसी भ्रष्टाचार के खिलाफ लड़ाई का दावा कैसे कर सकती हैं?

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मीडिया दरबार के मॉडरेटर 1979 से पत्रकारिता से जुड़े हैं. एक साप्ताहिक से शुरूआत के बाद अस्सी के दशक में स्वतंत्र पत्रकार बतौर खोजी पत्रकारिता में कदम रखा, हिंदी के अधिकांश राष्ट्रीय अख़बारों में हस्ताक्षर. उसी दौरान राजस्थान के अजमेर जिले के एक सशक्त राजनैतिक परिवार द्वारा एक युवती के साथ किये गए खिलवाड़ पर नवभारत टाइम्स के लिए लिखी रिपोर्ट वरिष्ठ पत्रकार श्री मिलाप चंद डंडिया की पुस्तक "मुखौटों के पीछे - असली चेहरों को उजागर करते पचास वर्ष" में भी संकलित की गयी है. कुछ समय के लिए चौथी दुनियां के मुख्य उपसंपादक रहे किन्तु नौकरी कर पाने के लक्खन न होने से तेईस दिन में ही चौथी दुनिया को अलविदा कह आये. नब्बे के दशक से पिछले दशक तक दूरदर्शन पर समसामयिक विषयों पर प्रायोजित श्रेणी में कार्यक्रम बनाते रहे. अब वैकल्पिक मीडिया पर सक्रिय.
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7 thoughts on “किरण बेदी के 18 और मामले छपे इंडियन एक्सप्रेस में, ट्रैवेल एजेंट ने भी पल्ला झाड़ा

  1. जब से किरण वेदी का मामला सामने आया तब से चारों तरफ बड़े -बड़े घोटालों को भूलकर इस मामले को बड़ा तूल
    दिया जा रहा है जबकी टीम अन्ना सहित सभी भारतियों का कहना है की जन लोकपाल कानून बनाओ और जो भी हो सब पर मुकदमा चलाओ चाहे टीम अन्ना का ही सदस्य क्यों न हो लेकिन एसा होगा नहीं क्योंकी ये सारा षड़यंत्र तो लोकपाल से ध्यान हटाने के लिए किया जा रहा है

  2. मित्रौ यहाँ हि ये वात नहीँ सभी जगह है पर जहाँ का भेद खुल गया वो चोर है , कोई छोटा को बडा चोर है इमानदार को जहाँ मे कहाँ ठोर है , डाकू अच्छे काम करते थे तब भी अच्छे थे यदी चार काम अच्छे एक बिगड गया तब क्या हो गया

  3. कितने बचकाने तर्क दे रही है टीम अन्ना!
    देश की जनता अपने आप को ठगा हुआ महसूस कर रही है |
    केजरीवाल अपने विभाग को प्रार्थना करते हैं कि चूँकि मै देश सेवा का कम कर रहा हूँ अत: मुझे विभाग के बकाये से छूट मिलनी चाहिए|
    रामलीला मैदान में वसूले गये करोड़ो रुपये को वे अपने NGO के a /c में जमा करके कानून का उल्लंघन करते हैं बावजूद इसके कि वो टैक्स विभाग में ही कार्यरत थे और टैक्स कानूनों को भली भांति जानते थे |

    किरणजी देश से प्राप्त वीरता पुरस्कार का प्रयोग लोगों को cheat करने के लिए करती रही | मामला सामने आने पर पहले तर्क देती हैं कि वो “बचाया” गया पैसा मैंने जन कल्याण में खर्च किया | आज एक नई बात सामने आई कि मै इस पैसे को वापिस लौटाने को तैयार हूँ??????
    वो एक पढ़ी लिखी अवकाश प्राप्त पुलिस अधिकारी हैं,(जो अपने विभाग से इसलिए VRS ले लेती हैं कि उन्हें दिल्ली का कमिश्नर नही बनाया गया)| क्या किरणजी नही जानती थी कि वो क्या कर रही हैं?

    एक अजीब सा तर्क दिया जा रहा है कि इसी समय ये सब मामले सामने क्यों आ रहे हैं|
    मै कहना चाहता हूँ कि जब आप घर से बाहर निकलते हैं तो पहले अपने कपड़ो और चेहरे को देखते हैं कि कहीं कोई दाग न लगा हो| तो ये सब महानुभाव कैसे भूल गए कि जब वो देश कि पूरी राजनीतिक व्यवस्था पर सवाल उठाने जा रहे हैं तो उन्हें अपने ऊपर भी इन सवालों का सामना करना पड़ेगा ?

    NDTV पर एक बहस में भाग लेते हुए कुमार विश्वाश जी कहते हैं कि यदि हमारी टीम के लोगों से कोई गलती हुई है तो इसका मतलब ये नही कि हम भ्रष्टाचार के खिलाफ नही बोल सकते?
    मै आदर पूर्वक पूछना चाहता हूँ कि :

    जनता से अपार समर्थन अन्ना टीम को इसलिए मिला था क्योकि जनता के सामने ये लोग एक आदर्श के रूप में सामने आये थे |
    क्या इन आरोपों के सामने आने और स्वीकारोक्ति के बाद इन लोगों की स्थिति उन ढोंगी उपदेशकों (बाबाओं) जैसे नहीं हो गयी है जो खुद भोग विलास में डूबे रहते हैं और अपने शिष्यों को त्याग का उपदेश देते हैं?

    क्या इसीलिए NGO को लोकपाल से बाहर रखने कि जिद की जा रही थी की इन लोगों की मनमानी चलती रहे? सरकार जनता से टैक्स के माध्यम से धन इकट्ठा करती है तो ये NGO भी “दान” के रूप में जनता से ही पैसा वसूलते हैं, उसका प्रयोग कानून के अनुसार ही होना चाहिए न कि पदाधिकारियों की मर्जी से|

  4. इंडियन एक्सप्रेस के रिपोर्टर ने किरण बेदी जी को फ़साने में
    कोई कसार नहीं छोड़ी लेकिन शीला दीक्षित जैसे न जाने कितने बड़े – 2 मगरमच्छ सरकार में पल रहे है उसके लिएयह न्यूज़ चेनल वाले अंधे बन बैठे है / दीक्षित के कारनामों से पूरी पत्रकारिता ऑंखें मूंदे हुई है / वह शिला दीक्षित के बेटे का दस लाख कहाँ गया उसका तो किसी मिडिया ने कुछ बताया ही नहीं ट्रेन में जो भूल गया था अब तो मिडिया वालों को भी याद आ गया होगा / कितना – 2 पैसा किस -2 ने खाया सब पता है सरकार का कोई भी मंत्री जिसने पब्लिक का पैसा नहीं खाया हो यहाँ सभी ऑफिसर और छोटे से ले कर बड़े नेता तक सब की खोजबीन होनी चाहिए / और पब्लिक को जनलोक पाल बिल चाहिए हम तब तक इंतज़ार करेंगे ————– जय हिंद

  5. समाज के मूल में ही भ्रस्ताचार भरा पड़ा है जितने भी लोग सम्माज सेवा कर रहे है वो समाज को धोख ही देते है समाज से जो वकील ,डोक्टर इन्गिनियर चर्तारेड अकोउन्तंत या समाज के नाम पर जितने भी नगों खड़े करने वाले लोग है वो सब के सब भ्रस्ताचारी
    है कोई भी व्यक्ति ये दावे के साथ नहीं कह सकता अब तो लोग धर्म के नाम पर भ्रस्ताचार करते है लोगो के साथ अविध धन मांगते रहते है ये एक ऐसी प्रवत्ति है जो समाज के बुध्ध्हिजिवियो के द्वारा ही चलाई जाती सर्कार के कर्मचारी छोटी सी रिश्वत में फस जाते यही करोरो डकार जाते है और ईमानदार बनकर घूमते है
    मई भी यह जनता हो की ये बिमारी का कोई इलाज ही नहीं और न दूर हो सकती फिर उअसके नाम पर इतना शोर कैसा हर चोर दुसरे को चोर कह रहा है यही इस देश का दुर्भ आज्ञा है

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