यह सिर्फ किसानों का सवाल नहीं है, गरीब बनाम कारपोरेट का सवाल है.!

यह सिर्फ किसानों का सवाल नहीं है, गरीब बनाम कारपोरेट का सवाल है.!

Page Visited: 1900
0 0
Read Time:5 Minute, 58 Second

-पुष्य मित्र॥

अभी जो नये कानून को लेकर विरोध है, वह एक क्षणिक मसला नहीं है। यह उस बड़ी लड़ाई का हिस्सा है, जो वर्ल्ड बैंक और आईएमएफ की वैश्विक नीतियों के खिलाफ है। वे नीतियां जो दुनिया की हर सरकार की लोक कल्याणकारी नीतियों को खत्म कर देना चाहती है। जो मानती है कि दुनिया में बेहतरी सिर्फ पूंजीवाद और कारपोरेट के विकास से ही हो सकती है।

वे नीतियां जो गरीबों की मदद के लिए खर्च होने पर एक-एक पैसे पर रोक लगाना चाहती है। जो चाहती है कि सरकारें सिर्फ ऐसी नीतियां बनायें, जिससे कारपोरेट को अपना व्यापार तेजी से बढ़ाने में मदद मिले। वे नीतियां जो हर सरकारी सेवा की पूरी कीमत उस देश के गरीब नागरिकों से वसूलना चाहती है। जो शिक्षा, स्वास्थ्य और रोजगार के बुनियादी सवालों को सरकार से लेकर कारपोरेट को सौंपना चाहती हैं। और इसे रिफार्म का नाम देती है।

यह सिर्फ इन तीन कानूनों का सवाल नहीं है, जो खेतिहार किसानों के नाम पर बड़ी कंपनियों के हित में बने हैं। यह सवाल उन तमाम नीतियों, कानूनों और फैसलों के लिए है, जो सरकारी कंपनियों को कमजोर करके उसे कारपोरेट को औने-पौने दाम पर सुपुर्द कर रही हैं। जो कालेजों की फीस बढ़ा रही है, रेल को गरीबों की सवारी के बदले पैसे वालों की सवारी बनाने पर तुली है। जो बीएसएनएल की कमाई को जिओ को और ओएनजीसी के बदले रिलायंस को देश के संसाधनों को सौंप रही है। जो सरकारी अस्पतालों के बदले अपोलो और मैक्स जैसे कारपोरेट अस्पतालों के आगे बढ़ने के पक्ष में नीतियां बना रही हैं।

हमारा विरोध उन नीतियों से भी है जो ऑटोमेशन को बढ़ावा देती है और सरकारी पदों पर भर्ती नहीं करना चाहती। जो कारपोरेट और उद्योगों के हित में मजदूरों को 8 के बदले 12 घंटे तक काम करने के लिए विवश करना चाहती है। जो आंगनबाड़ी और राशन की दुकानों को बंद कराना चाहती है, जबकि देश के करोड़ों बच्चे कुपोषण और एनीमिया से ग्रस्त हैं।

यह सिर्फ भारत में नहीं बल्कि पूरी दुनिया में हो रहा है और ऐसा नहीं कि भारत में यह सिर्फ इसी सरकार के समय में हो रहा है, पिछले दो दशकों से यह लगातार हो रहा है। हां, यह जरूर सच है कि अब तक चोरी-छिपे और शर्मिंदगी के साथ होता था। अब पूरी बेशर्मी के साथ देश के संसाधनों को बेचा जा रहा है। पहली दफा कोई सरकार कह रही है कि मेरे खून में व्यापार है। सरकार सभी भारतीय कंपनियों को बेचने की प्लानिंग कर रही है। कालेजों की फीस, रेल का किराया, अस्पतालों का खर्च सब बेशर्मी के साथ बढ़ाया जा रहा है।

मजदूरों की मुसीबतें बढ़ रही हैं। छोटे व्यापारियों को परेशान किया जा रहा है। सरकारी स्कूलों और अस्पतालों को बंद करने की योजनाएं बोर्ड पर हैं। पेट्रोल के दाम बढ़ाये जा रहे हैं। गरीबों को दी जाने वाली हर तरह की सब्सिडी खत्म की जा रही है।

किसानों पर जो हमला हुआ है, वह इसी की एक कड़ी है। लक्ष्य है कृषि क्षेत्र का जो थोड़ा बहुत मुनाफा है, उसे छीन कर कारपोरेट को सौंपना। बड़ी कंपनियों को अपने हिसाब से खेती करवाने की छूट देना। उन्हीं सस्ती कीमत पर किसानों की फसल खरीद लेने की रियायत देना और वे जितना चाहें उतना माल समेट कर स्टोर कर लेने की इजाजत देना। यह सब उसी कड़ी का हिस्सा है।

यह एक अमूर्त किस्म का हमला है, जिसे देश की बड़ी आबादी समझ नहीं पा रही। उसे अंदाजा नहीं है कि आखिरकार इन सबका नुकसान उन्हें ही झेलना है। उनके ही बच्चों को ऊंची फीस चुकानी है और 8 के बदले 12 घंटे की नौकरी करनी है। अस्पतालों का लाखों का बिल भरना है। महंगे खाने के सामान को खरीदने के लिए मजबूर होना है। कुपोषित और एनीमिक होकर जीना है। अब रेल यात्रा स्वप्न होने जा रही है। यह सब गरीबों और मध्यम वर्ग को झेलना है। मगर उन्हें हिंदुत्व का अफीम थमा दिया गया है और वे उसे ही चाट कर मग्न है।

इस सरकार की यही सफलता है कि वह आहिस्ता-आहिस्ता लोगों का गला भी रेत रही है और लोग मगन भी हैं। उसका जयकारा भी लगा रहे हैं। कारपोरेट को ऐसा एजेंट फिर कहां मिलेगा।

मगर जो यह सब होता हुआ देख रहे हैं, वह कैसे चुप हो सकते हैं। इसलिए लड़ रहे हैं।

कबीर दास कह गये हैं-

सुखिया सब संसार है, खाये और सोये।
दुखिया दास कबीर है, जागे और रोये।

Happy
Happy
0 %
Sad
Sad
0 %
Excited
Excited
0 %
Sleepy
Sleepy
0 %
Angry
Angry
0 %
Surprise
Surprise
0 %
Facebook Comments

Average Rating

5 Star
0%
4 Star
0%
3 Star
0%
2 Star
0%
1 Star
0%

प्रातिक्रिया दे

आपका ईमेल पता प्रकाशित नहीं किया जाएगा. आवश्यक फ़ील्ड चिह्नित हैं *

This site uses Akismet to reduce spam. Learn how your comment data is processed.

Visit Us On TwitterVisit Us On FacebookVisit Us On YoutubeVisit Us On LinkedinCheck Our FeedVisit Us On Instagram