Home घोटाला बाइडेन के शुरूआती फैसले, भारत और अमेरिका के बीच गाढ़े संबंध के संकेत..

बाइडेन के शुरूआती फैसले, भारत और अमेरिका के बीच गाढ़े संबंध के संकेत..

-अजय कुमार सामाजिक यायावर॥

जो बाइडेन अमेरिका के 46 वें राष्ट्रपति के रूप में कार्यभार संभालते ही अपनी एक नई टीम बनाई है, जिसमें 20 भारतीय-अमेरिकियों की नियुक्ति किया गया है। अमेरिकी राष्ट्रपति ने अपनी इस नई टीम में एक भी आरआरएस या बीजपी से जुड़े हुए लोगों को जगह नहीं दिया है। जो बाइडेन ने ओबामा के कार्यकाल के समय उनके साथ काम करने वाली भारतवंशी सोनल शाह को अपनी टीम से बाहर निकाल दिया है। साथ ही बाइडेन के लिए चुनावी कंपैनिंग करने वाला भारतीय-अमेरिकी अमित जानी को भी बाहर का रास्ता दिखा दिया है।

दरअसल सेक्युलर 19 भारतीय-अमेरिकी संगठनों ने बाइडेन-हैरिस को पत्र लिखकर दबाव बनाया है कि ऐसे किसी भी व्यक्ति को बाइडेन प्रशासन में शामिल नहीं किया जाए जिसका आरआरएस या बीजेपी से किसी प्रकार का कोई लिंक हो। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक पत्र में यह भी लिखा गया है कि डेमोक्रेटिक पार्टी में बहुत से ऐसे लोग हैं जिनका सीधा संबंध भारत के कट्टरपंथी हिंदुत्ववादी संगठनों से है।

आइए जानते हैं कि सोनल शाह और अमित जानी का आरआरएस या बीजेपी से क्या संबंध है?

सोनल जॉर्ज, टाऊन यूनिवर्सिटी में बीक सेंटर फॉर सोशल इंपैक्ट एंड इनोवेशन के संस्थापक कार्यकारी निदेशक हैं। इससे पहले सोनल ओबामा-बाइडेन के साथ यूनिटी टास्क फोर्स (ट्रांजिशन प्रोजेक्ट के सदस्य के रूप ) में साथ काम कर चुकी है। हालांकि उस दौरान भी उनपर विश्व हिंदू परिषद से जुड़े होने का कई आरोप लगाया गया था।

2001 के गुजरात भूकंप के दौरान सोनल कट्टरवादी हिंदुत्ववादी संगठन की अमरीकी शाखा विश्व हिंदू परिषद के साथ राष्ट्रीय समन्यवक के रूप में काम किया। जब सोनल को ओबामा के ट्रांजिशन प्रोजेक्ट के सदस्य के रूप में नियुक्त किया गया था, तब आरआरएस और विश्व हिंदू परिषद के नेताओं ने एक बयान जारी कर ” सोनल शाह को ओवरसीज फ्रेंड्स ऑफ बीजेपी-यूएसए नामक संगठन के प्रेसीडेंट और विश्व हिंदू परिषद के सम्मानित सदस्य रमेश शाह की बेटी, जो एक वरिष्ठ वीएचपी (विश्व हिंदू परिषद) नेत्री है ” कहा। उसी समय ट्रिनिटी कॉलेज में दक्षिण एशिया इतिहास के अध्यक्ष विजय प्रसाद ने अपने एक लेख में सोनल को भारत के अंदर सबसे विषैले कट्टरवादी हिंदुत्ववादी संगठन की अमरीकी शाखा, वीएसपी का सक्रिय सदस्य बताया। उन्होंने उसे ‘ एकल विद्यालय ‘ से जोड़ा जिसके फाउंडर सोनल के पिता रहें हैं। इन्होंने इस ‘ एकल विद्यालय ‘ को ईसाईयों के लिए एक ट्रिगर कहा था। इस ‘ एकल विद्यालय ‘ संस्था के लिए सोनल फंड्स इकठ्ठे करती रही थी।

अब आते हैं अमित जानी पर…
सोशल मीडिया पर उनके पोस्टों और तस्वीरों से साफ पता चलता है कि अमित जानी नरेंद्र मोदी के एक बड़े समर्थक हैं। उनके परिवार के सदस्य भी मोदी और बीजेपी के अन्य नेताओं के साथ बहुत करीबी संबंध है। 2017 में अमेरिका के आधिकारिक यात्रा के दौरान अमित जानी की मुलाकात नरेंद्र मोदी से हो चुकी है। उनके पिता अमेरिका में बीजेपी के प्रवासी भारतीय मित्रों के संस्थापकों में से एक हैं।

वहीं बाइडेन ने अपनी नई टीम में सीनियर डिप्लोमेट भारतीय मूल की उजरा जेया को मौका दिया है। उन्हें विदेश मंत्रालय के एक अहम पद के लिए नामित किया गया है। उज़ारा जेया, जिसने पूर्व भारतीय राजनयिक देवयानी खोबरागड़े के वीजा फ्रॉड मामले में अहम भूमिका निभाई थी। 2018 में उजरा जेया ने ट्रंप प्रशासन पर नस्ली भेदभाव और अभ्रद व्यवहार करने का आरोप लगा अमेरिका के विदेश मंत्रालय से इस्तीफा दे दिया था।

बाइडेन ने उजरा जेया के साथ ही सीएए-एनआरसी और कश्मीर धारा-370 के खिलाफ अमेरिका की सड़कों पर बढ़-चढ़ कर नेतृत्व करने वाली भारतीय-अमेरिकी कश्मीरी मूल की समीरा फाजली को भी अपनी प्रशासन में जगह दिया है। उन्हें कोरोना संकट के दौरन अमेरिका में बने आर्थिक संकट को कैसे उबारा जाए, के लिए नेशनल इकोनॉमी काउंसिल का डिप्टी डायरेक्टर बनाया गया।

अमरीकी राष्ट्रपति का यह फैसला अमेरिका के साथ भारत के नए संबंध की एक शुरूआती संकेत है। आने वाले आगे के दिनों में बाइडेन के कुछ और नए फैसले से स्थिति पूरी तरह साफ हो जाएगी कि भारत और अमेरिका के बीच आगे का संबंध किस प्रकार का रहेगा??

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