रंगा सियार बन बैठा सम्राट ककुदुम ..

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-राजीव मित्तल॥

एक समय की बात है. एक सियार किसी हादसे में घायल हो गया. कई दिन तक वह अपनी खोह में पड़ा रहा..जब ठीक हो कर बाहर आया तो काफी कमजोर हो चुका था. ऊपर से भूखा.. किसी मृत जानवर की तलाश में चलते चलते वो एक बस्ती में आ गया..जहां कुत्तों ने उसे दौड़ा दिया. जान बचाने को वो अंधाधुंध भागा और एक ड्रम में जा गिरा. ड्रम में एक रंगरेज ने कपड़े रंगने के लिए रंग घोल रखा था.

सियार काफी देर तक उसमें छुपा रहा..जब कुत्ते चले गए तो वह बाहर निकला.. लेकिन तब तक वह पूरी तरह रंगीला हो चुका था.. जंगल में पहुंचा तो सुनहरे रंग वाले सियार को देख शेर और हाथी तक डर कर भागने लगे…
उनको भागता देख रंगे सियार के दिमाग में एक योजना आई.. वो चिल्लाया-ओये शेर, ओये मोटे, भागो मत मेरी बात सुनो.

उसकी आवाज़ सुनकर शेर, हाथी और बाकी जानवर रुक गए.. काँखता हुआ सियार उनके पास पहुंचा और बोला-देखो-देखो मेरा सुनहर रंग..मुझे भगवान ने स्पेशली यहां भेजा है..जाओ शेरू, तुम सब जानवरों को बुला लाओ तो मैं भगवान का संदेश तुम सब जानवरों को सुनाऊं.

शेर डर के मारे दहाड़ तक नहीं पा रहा था..उसके मुँह से म्याऊं म्याऊं की आवाज़ सुन हाथी की सू सू तक निकल गयी..किसी तरह जंगल के सब जानवरों को इकट्ठा किया गया..

सब जानवरों को सामने देख सियार एक टीले पर चढ़ कर बोला- मित्रों, प्रजापति ब्रह्मा ने मुझे खुद अपने हाथों से आलौकिक रंग का प्राणी बनाकर कहा है कि जाओ, इस जंगल में एक बेवकूफ शेर का राज है, उसको कान से पकड़ कर सिंहासन से उतार दो और तुम सम्राट बन सब का कल्याण करो..अब से तुम सब मेरी प्रजा हो और मैं इस जंगल का सम्राट ककुदुम हूँ..

सारे जानवर वैसे ही सियार के सुनहरे रंग से चकराए हुए थे.. उसकी बातों से तो सबकी सिट्टी पिट्टी ही गुम हो गयी.. शेर, बाघ, चीते, हाथी, भेड़िया, अजगर, काला नाग तक की ऊपर की सांस ऊपर और नीचे की सांस नीचे..फिर तो शेर और हाथी में तो उसके चरणों में लोटने की होड़ सी लग गयी..बाकी जानवर भी उसके चरणों में लोटने के लिए लाइन लगा कर खड़े हो गए..

चरण वंदना के बाद सब जानवर एक स्वर में बोले-हे बह्मा के दूत, प्राणियों में श्रेष्ठ ककुदुम, हम आपको अपना सम्राट स्वीकार करते हैं.. भगवान की इच्छा का पालन करके हमें अतीव प्रसन्नता हो रही है..एक बूढ़े हाथी ने सियार के चरणों में कमलपुष्प चढ़ाए और शेरनी ने उसकी आरती उतारी…डर के मारे पेड़ पे लटका लंगूर मिनमिनाया-हे सम्राट, अब हमें बताइए कि हमारा क्या कर्तव्य है?..

रंगा सियार सम्राट की तरह पंजा उठाकर बोला-तुम्हें अपने सम्राट की खूब सेवा और आदर करना चाहिए.जब जब हमें बोलने का मन करे, तुम सब सारे काम छोड़ मेरी बात सुनो और उस पर अमल करो वरना ब्रह्मा जी कुपित हो जाएंगे और तुम सबको श्राप दे देंगे.. अब तुम सब हमारे खाने-पीने का शाही प्रबंध करो. शेर ने सिर झुकाकर कहा- महाराज, ऐसा ही होगा.. आपकी सेवा कर हमें हमारा जीवन धन्य करना है..आज से मेरी शेरनी आपका खास ख्याल रखेगी..

बस, अब तो सम्राट ककुदुम बने रंगे सियार के ठाठ हो गए.. वह राजसी शान से रहने लगा..शेरनी और कई लोमड़ियां उसकी सेवा में लगी रहतीं, भालू पंखा झुलाता..हाथी चरण धोता.. शेर उसका बावर्ची हो गया..नाग और नागिन नृत्य दिखाते..बंदर बीन बजाता.. सियार जिस जीव का मांस खाने की इच्छा जाहिर करता, वो खुद उसके चरणों में गिर कर प्राण त्याग देता..

जब सियार घूमने निकलता तो हाथी आगे-आगे सूंड उठाकर बिगुल की तरह चिंघाड़ता चलता.. दो शेर उसके दोनों ओर कमांडो बने होते..कभी कभी सम्राट ककुदुम दरबार भी लगाता, जिसमें वो कुछ उपदेशात्मक बातें करता. इस बीच रंगे सियार ने एक चालाकी यह कर दी थी कि सम्राट बनते ही उसने शाही आदेश जारी कर बाकी सियारों को जंगल से निकलवा दिया ताकि कोई उसे गलती से भी न पहचान ले.. लेकिन एक वृद्ध सियार ने उसकी बड़ी चिरौरी की कि उसे जंगल में ही रहने दिया जाए तो रंगे सियार ने उसे पैर दबाने के लिए रख लिया..

एक दिन सम्राट ककुदुम खूब खा-पीकर अपने शाही मांद में आराम कर रहा था कि बाहर उजाला देखकर उठा.. बाहर चांदनी रात खिली थी.. पड़ौसी देश के सियारों की टोलियां ‘हू हू हुआँ हुआँ’ की आवाज़ें निकाल रही थीं. यह आलम देख रंगे सियार के पैर दबा रहा वयोवृद्ध सियार उनके सुर में सुर मिलाने लगा..यहां तक कि सम्राट ककुदुम भी आपा खो बैठा.. और वह भी अपना मुंह चांद की ओर उठाकर ‘हू हू हुआँ हुआँ…’ करने लगा..

शेर और बाघ ने उसकी ‘हू हू …’ सुनी तो वे चौंके, बाघ बोला, ‘अरे, यह तो सियार है.. हमें धोखा देकर सम्राट बना रहा.. मारो साले को..सब जानवर उसकी ओर लपके और देखते ही देखते उसका तिया-पांचा कर डाला..

——पंचतान्त्रिक सीख-
सम्राट बने सियार चांदनी रात में बाहर न निकला करें..

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