नए खेती कानून बड़े पैमाने पर महिलाओं और मजदूरों को प्रभावित करेंगे..

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तीन केंद्रीय कृषि कानूनों के विरोध में चल रहे प्रदर्शन के अंतर्गत आज देशभर में महिला किसान दिवस मनाया गया। दिल्ली के सभी बोर्डर्स से लेकर गावों-कस्बों तक औरतो ने इन कार्यक्रमों का नेतृत्व किया और सफल बनाया।

महिलाएं कृषि की रीढ़ है और सरकार द्वारा लाये गए तीन कृषि कानून बड़े पैमाने पर महिलाओं और मजदूरों को प्रभावित करेंगे। औरतों के उत्साह और ऊर्जा ने यह साबित कर दिया कि हर उस जगह पर औरत की भागीदारी होगी जहां पर उनकी हिस्सेदारी है।

कल से ही देशभर से औरतों का दिल्ली बोर्डर्स पर पहुंचना शुरू हो गया था। महाराष्ट्र, गुजरात, केरल, हरियाणा और पंजाब से भारी संख्या में महिलाएं दिल्ली बोर्डर्स पर धर्मस्थलो पर पहुंची। सभी बोर्डर्स पर मंच संचालन से लेकर सभा संबोधन महिलाओं ने किया।

शाहजहांपुर बॉर्डर पर अनेक राज्यों से आई महिलाओं ने सांस्कृतिक कार्यक्रम भी प्रस्तुत किये। टीकरी मोर्चे पर महिलाओं ने विश्व व्यापार संगठन और अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष के पुतले जलाए। सिंघु बॉर्डर पर प्रगतिशील महिला संगठनों के वक्ताओं ने तीन कानूनों के अलावा सामान्य तौर पर महिला किसानों के मुद्दों को सभा के सामने रखा। गाजीपुर बॉर्डर पर महिलाए भुख हड़ताल पर बैठी।

देश की राजधानी से दूर, बरसो से संघर्ष कर रहे नर्मदा घाटी के आदिवासी क्षेत्रों की महिला किसानों ने इस दिन को मनाकर दिल्ली के बोर्डर्स पर संघर्षरत किसानों को अपना समर्थन दिया। इलाहाबाद में महिला किसान रैली आयोजित की गई। ओडिशा में कई जगहों पर भी आज कार्यक्रम आयोजित किये गए। बिहार में दरभंगा, पटना समेत अनेक जगहों पर महिला किसान दिवस मनाया गया. ग्वालियर समेत मध्य प्रदेश के कई स्थानों पर किसान लामबंद हुए और कृषि कानूनों का विरोध किया

कोलकाता में लगे पक्के मोर्चे में आज महिला किसान दिवस मनाया गया। असम में गाँव स्तर पर भी कार्यक्रम आयोजित किये गए। ‘किसान दिल्ली चलो यात्रा’ को झारखंड में भारी समर्थन मिल रहा है। राजस्थान के कोटपूतली से महिला किसानो का एक जत्था शाहजहांपुर पहुंचा। हैदराबाद में भी आज एक मार्च निकालकर इस दिन महिलाओं के संघर्ष को याद किया गया। आंध्र प्रदेश में विजयवाड़ा, अनंतपुर समेत कई जगह आज विरोध प्रदर्शन किये गए।

हरियाणा में अनेक जगहों पर आज किसान संगठनों ने विरोध प्रदर्शन किए। पंजाब में इन कानूनों के विरोध और महिला दिवस के साथ साथ भाजपा नेता सुरजीत ज्याणी और हरजीत ग्रेवाल, जो लगातार किसान आंदोलन को बदनाम कर रहे है, के गावों में हज़ारों की सख्यां में महिलाओ ने बड़ी सभाएं कर विरोध प्रकट किया।

आज इस दिवस की सफलता ने किसान आंदोलन को जीत की और अग्रसर किया है। इस मुहिम में सहयोग करने वाले सभी संस्थाओं और व्यक्तियो का सयुंक्त किसान मोर्चा हार्दिक धन्यवाद करता है।

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