सद्भावपूर्ण वार्ता करनी हो तो NIA के नोटिस वापिस हों..

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एआईकेएससीसी ने कहा कि महिला किसान दिवस में वृहद व उत्साहवर्धक भागीदारी; देश के 300 जिलों में मनाया गया। यह कानून जीविका तथा भोेजन पर हमला हैं। वर्किंग ग्रुप ने जोर देकर कहा कि वार्ता में 3 कानून व बिजली बिल 2020 की वापसी वार्ता शुरू होने के लिए एकमात्र अजेन्डा; यह सरकार को तय करना है कि उसे सकारात्मक वार्ता करनी है या सिर्फ समय बरबाद करना है। 26 जनवरी की तैयारी अभूतपूर्वविश्व इतिहास में यह गोलबंदी एक मिसाल कायम करेगी। दुनिया की किसी भी चुनी हुई सरकार के खिलाफ, जो अपने किसानों के हित का सौदा कर कारपोरेट को लाभ पहुँचाना चाह रही हो, सबसे बड़ा विरोध देखेगी।

एआईकेएससीसी के वर्किंग ग्रुप ने आज के महिला किसान दिवस में विरोध काय्रक्रमोें में भागीदारी व व्यापकता पर संतोष जाहिर करते हुए कहा है कि यह विरोध देश भर में 300 से अधिक जिलों में आयोजित हुए और महिलाओं ने खुद नेतृत्व की बागडोर सम्भाली। उन्होंने आवाज बुलन्द कर देश के किसानों के रूप में अपनी पहचान का सवाल उठाया और कहा कि खेती का 75 फीसदी काम महिलाएं करती हैं और ये 3 खेती के कानून सबसे पहले व सबसे ज्यादा उनकी जीविका को छीनेंगे। खेती के सभी काम जैसे बुआई, रुपाई, सिंचाई, निराई, कटाई, ढुलाई, छंटाई, भराई, बंधाई और पशुपालन से जुड़े काम जैसे चारा डालना, चराने ले जाना, दूध निकालना, सफाई करना, गोबर बटोरना व कण्डे बनाना, दूध का प्रसंस्करण करना, सभी में ज्यादतर महिला श्रम काम आता है।

एआईकेएससीसी के नेतृत्व में महिलाओं ने राष्ट्रपति के नाम एक ज्ञापन भी दिया जिसमें उन्होने मांग की कि उन्हें मनरेगा में काम व मजदूरी दर बढ़ाया जाए व भ्रष्टाचार समाप्त किया जाए, उन्हे सस्ते कर्ज दिये जाएं, सभी फसलों का सी2 + 50 फीसदी दाम सुनिश्चित किया जाए, उनके कर्ज माफ किये जाएं, उन्हें सस्ती दरों पर कर्ज दिये जाएं, परिवहन की सुविधाएं दी जाएं, उन्हें खाद्यान्न प्रसंस्करण करने के लिए उपकरण दिये जाएं ताकि वे खुद फसलों का प्रसंस्करण करें और उसे बेच सकें, उन्हें पेंशन दी जाए और उनके सामाजिक अधिकारों की तथा सुरक्षा की व्यवस्था की जाए।

संक्षेप में महिलाओं ने देश के विकास में सरकार से अपना हिस्सा देने की गुहार लगाई और कहा कि इसे कारपोरेट व विदेशी कम्पनियों को ना सौंपा जाए। साथ में संकल्प लिया कि इन कानूनों की वापसी तक संघर्ष चलेगा।

महिलाओं ने यह भी कहा कि इनसे उनकी राशन व खाद्य सुरक्षा खतरे में पड़ जाएगी और इसका सबसे घातक असर महिलाअें पर ही पड़ेगा।

महिला किसानों ने इस बात को भी उजागर किया कि नये बिजली दरों के लागू होने से, बिलों के बढ़ा-चढ़ाकर दिये जाने से और सुधारने के नाम पर रिश्वतखोरी से उनका संकट बहुत ज्यादा बढ़ गया है और बिजली बिल 2020 की वापसी अब ग्रामीण इलाकों में बढ़ा सवाल बनता जा रहा है।
एआईकेएससीसी ने इस बात पर जोर दिया है कि महिलाओं की यह बढ़ती ताकत देेश में एक नयी जागृति पैदा कर रही है और यह देश के एक नये विकास की, जो जनता के विकास पर आधारित होगा, कम्पनियों और उनके बिचैलियों के विकास पर नहीं, नीव ढाल रहा है।

एआईकेएससीसी ने यह भी कहा है कि यदि कल की वार्ता में कुछ भी सकारात्मक होना है तो उसमें एक ही सवाल है, वह है 3 खेती के कानूनों और बिजली बिल 2020 की वापसी। अगर सरकार केवल दिखावा करना चाहती है और समय बरबाद कर सोचती है कि किसान थक जाएंगे, तो मरजी उसकी है, वह गलत फहमी में है। यह भी कहा कि वार्ता लायक माहौल बनाने के लिए जरूरी है कि कुछ नेताओं को दिये गए एनआईए नोटिस को वापस लिया जाए।

एआईकेएससीसी ने कहा है कि दिल्ली की ट्रैक्टर परेड ऐतिहासिक होगी और हर कीमत पर की जाएगी। प्रत्येक जिले से इसके लिए हजारों ट्रैक्टरो को लाने की तैयारी की जा रही है और यह किसी भी देश की चुनी हुई सरकार के विरुद्ध उसके किसानों का सबसे बड़ा विरोध प्रदर्शन होगा। उसने कहा कि पार्टियों को जीत कर गद्दी पर बैठने के लिए किसानों के वोट चाहिये पर सेवा वे कारपोरेट हितों की करना चाहती हैं, इसे अब सहन नहीं किया जाएगा। आंदोलन तब तक चलेगा जब तक ये कानून वापस नहीं हो जाते।

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