कुछ लाख वीवीआईपी को भी कोरोना-टीके लग जाएं, तो भी कोई बुराई नहीं…

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-सुनील कुमार॥
पहले की घोषणा के मुताबिक हिन्दुस्तान में आज कोरोना-टीकाकरण शुरू हुआ। प्रधानमंत्री ने एक औपचारिक भाषण देकर इसकी शुरुआत की, और इस पहले दौर में करीब 3 करोड़ स्वास्थ्य कर्मचारियों, और कोरोनाग्रस्त लोगों से सामना होने वाले लोगों को ये टीके लगने जा रहे हैं। करीब महीने भर के फासले पर इन लोगों को इसी टीके का एक डोज और लगेगा, और उसके एक पखवाड़े बाद ऐसा अनुमान है कि इनके शरीर में कोरोना के खिलाफ प्रतिरोधक क्षमता विकसित हो जाएगी। यह मौका छोटी राहत का नहीं है, और आज दुनिया के जो हालात हैं उन्हें देखते हुए इस वैक्सीन के और अधिक बहुत लंबे नियंत्रित परीक्षणों को शायद सबसे अच्छा विकल्प मानना भी मुमकिन नहीं है। आज बीमारी के खतरे और वैक्सीन के खतरे के बीच किसी एक को अगर छांटना हो, तो मामूली समझ वैक्सीन का खतरा झेलने का सुझाव देगी क्योंकि अब तक के मानव परीक्षणों में वैक्सीन के खतरे सामने नहीं आए हैं, जबकि कोरोना से मौतें जारी ही हैं। फिर यह बात भी है कि शुरुआत के ये तीन करोड़ टीके देश के उस चुनिंदा लोगों को लगने जा रहे हैं जो कि कोरोना के मोर्चे पर डटे हुए जाने-पहचाने लोग हैं, स्वास्थ्य कर्मचारी हैं, और जिन पर टीके का कोई नकारात्मक असर हुआ, तो उसका पता लगाना आसान रहेगा। हालांकि आज ही आई एक दूसरी खबर को इसके साथ जोड़े बिना कोई अनुमान लगाना गलत होगा। योरप के एक सबसे विकसित देश नार्वे ने कहा है कि वहां अमरीका में बनी हुई फाइजर कंपनी की वैक्सीन लगवाने के बाद 23 मौतें हो चुकी हैं। ये सारे के सारे 80 बरस से ऊपर के लोग हैं, और वहां की सरकार का कहना है कि यह वैक्सीन बुजुर्गों और पहले से बीमार लोगों के लिए खतरनाक साबित हो सकती है। वहां सरकार ने यह तय किया है कि गंभीर बीमार लोगों पर इस टीके का बहुत बुरा असर हो सकता है, लेकिन सरकार ने यह भी कहा है कि नौजवान और सेहतमंद लोगों को इस टीके से बचने की जरूरत नहीं है। इस देश के इस तजुर्बे को देखें तो भारत को इससे सीखने की जरूरत है और चूंकि हिन्दुस्तान की पूरी आबादी को तो अभी टीका लगने नहीं जा रहा है इसलिए नार्वे के इस तजुर्बे वाली उम्र के लोगों को हिन्दुस्तान में भी कुछ वक्त के लिए टीके से परे रखा जा सकता है।

अभी सरकार ने कोई ताजा अंदाज सामने नहीं रखा है, लेकिन कुछ हफ्ते पहले तक केन्द्रीय स्वास्थ्य मंत्री ने जो कहा था उसके मुताबिक जून-जुलाई तक 25 करोड़ लोगों के टीकाकरण का अंदाज था। अभी सरकार ने जिन तबकों को इस टीके से बाहर रखा है, उनमें गर्भवती महिलाएं और बच्चे हैं। नार्वे की ताजा खबर को देखें तो 80 बरस से ऊपर के लोगों को या गंभीर बीमार लोगों को भी टीकाकरण से बाहर रख सकते हैं। इसके बाद बची आबादी के 30 करोड़ लोगों को अगर अगले 6 महीनों में टीके लगते हैं, तो आबादी का एक हिस्सा खतरे से काफी हद तक बच सकता है। भारत में अभी जिस टीके से शुरुआत की गई है, उससे शायद 70 फीसदी कामयाब होने की उम्मीद है। ऐसा होने पर भी देश की आबादी का एक बड़ा हिस्सा खतरे से काफी हद तक बचने जा रहा है। और जैसा कि किसी भी संक्रामक बीमारी के साथ होता है, जैसे-जैसे उससे संक्रमित लोग घटते हैं, आगे उसका संक्रमण भी घटता है।


टीकाकरण शुरू होने से देश के लोगों के बीच एक नया आत्मविश्वास देखने मिलेगा कि मानो कोरोना से जीत हो चुकी है। जबकि हिन्दुस्तान ऐसी नौबत से अभी खासे दूर भी है। कोरोना की दूसरी लहर और तीसरी लहर, और कोरोना की कोई नई किस्म, और टीके के बेअसर होने के खतरे, किसी और संक्रामक रोग के आने के खतरे, ऐसी कई बातों की आशंका अभी पूरी तरह खत्म नहीं हुई है। इसलिए कोरोना-टीकों से पैदा होने वाला आत्मविश्वास घमंड बनकर लोगों को लापरवाह न कर दे, यह भी देखना जरूरी है।
सोशल मीडिया पर इस बात को लेकर बड़ा बवाल चल रहा है कि कोरोना-वैक्सीन की विश्वसनीयता को कायम करने के लिए पहले से देश के नेताओं को लगाया जाए, ताकि आम जनता में भी भरोसा पैदा हो सके। वैक्सीन के दो पहलू हैं, एक तो उसका मेडिकल असर, जिसकी वजह से पहले उसे कोरोना-खतरा अधिक झेल रहे स्वास्थ्य कर्मचारियों और जुड़ी हुई सेवाओं के लोगों को लगाया जा रहा है। लेकिन ऐसे तीन करोड़ लोगों के साथ अगर देश के कुछ लाख नेताओं, जजों, मंत्रियों और बड़े अफसरों को भी जोड़ा जाता है, तो यह बारी से पहले उन्हें टीका मिलने के बजाय टीकाकरण की विश्वसनीयता बनाने का काम होगा। और अगर ऐसा कोई फैसला होता भी है तो हम उसे कोई वीआईपी लिस्ट मानने के बजाय विश्वसनीयता-लिस्ट मानेंगे। इंडियन मेडिकल एसोसिएशन ने अपने सदस्य दसियों हजार डॉक्टरों से कहा है कि लोगों के बीच भरोसा पैदा करने के लिए डॉक्टर आगे आकर यह वैक्सीन लगवाएं। अब अगर इन तीन करोड़ लोगों के साथ, या इनके बाद लाख-दो लाख महत्वपूर्ण ओहदों पर बैठे लोगों को यह टीका लगाया जाता है, तो उससे लोगों की आशंकाएं कम होंगी।


फिलहाल जैसा कि प्रधानमंत्री ने अपने भाषण में कहा है कि पहले दौर में यहां तीन करोड़ लोगों को टीके लग रहे हैं, और दुनिया में सौ से ज्यादा तो ऐसे देश हैं जिनकी आबादी ही तीन करोड़ से कम हैं। उन्होंने यह भी कहा कि दूसरे चरण में 30 करोड़ लोगों को टीके लगेंगे, और दुनिया में 30 करोड़ से अधिक की आबादी के कुल तीन ही देश हैं, भारत, चीन, और अमरीका। इन आंकड़ों को देखें तो लगता है कि यह सचमुच ही दुनिया का सबसे बड़ा टीकाकरण अभियान तो है ही, खुद हिन्दुस्तान का यह एक अनोखा प्रयोग है, और हर हिन्दुस्तानी को इसकी कामयाबी में हाथ बंटाना चाहिए।

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