दिमागी बीमार ट्रंप के फतवों से उपजी हिंसा अमरीका पर कलंक..

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-सुनील कुमार॥
हिन्दुस्तानी समय के मुताबिक बीती रात से अमरीका में जो हिंसा चल रही है उसकी कल्पना सैकड़ों बरस के अमरीकी लोकतांत्रिक और संसदीय इतिहास में भी किसी ने नहीं की थी। मौजूदा राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप चुनाव में अपनी शिकस्त को बर्दाश्त नहीं कर पा रहे हैं, और वे इन नतीजों को झूठा, फर्जी, और गढ़ा हुआ करार देते आए हैं। आज उनके हिंसक समर्थक हजारों की संख्या में अमरीकी संसद भवन के भीतर घुस गए, वे नस्लवादी झंडे लिए हुए थे, हिंसक नारे लगा रहे थे, और ट्रंप को ही अपना अगला राष्ट्रपति बता रहे थे। ट्रंप ने इस मौके पर सोशल मीडिया पर जो कुछ लिखा, उसे सच से परे कहते हुए ट्विटर, फेसबुक, और इंस्टाग्राम, सभी ने अमरीकी राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रंप के अकाऊंट सस्पेंड कर दिए, उनका कुछ भी पोस्ट करना ब्लॉक कर दिया। अमरीकी संसद के सामने चल रही इस हिंसा में 4 लोग मारे जा चुके हैं, प्रदर्शनकारी झंडे-डंडे लिए हुए संसद के भीतर घूम रहे हैं, और सुरक्षा दस्ते सांसदों को बचाकर सुरक्षित जगह पर ले गए हैं। अमरीकी चुनाव प्रणाली के मुताबिक कुछ इलेक्टोरल वोटों की गिनती संसद भवन में भी होनी थी, और इन वोटों को सुरक्षित हटा लिया गया है। इस हिंसक भीड़ के बारे में यह अंदाज है कि यह संसद की कार्रवाई रोक देना चाहती थी ताकि नवनिर्वाचित राष्ट्रपति जो बाइडन को जीत का सर्टिफिकेट न मिल सके।
यह सब कुछ ऐसा अजीब सिलसिला है कि डोनल्ड ट्रंप की खुद की पार्टी, रिपब्लिकन पार्टी के बारे में ऐसी खबरें आ रही हैं कि पार्टी के नेता संविधान की एक विशेष धारा का इस्तेमाल करके राष्ट्रपति को हटाने की संभावनाओं पर विचार कर रही है। अमरीकी संविधान का 25वां अनुच्छेद राष्ट्रपति को हटाने का एक प्रावधान रखता है, अगर राष्ट्रपति की दिमागी हालत ठीक नहीं रह जाती। आज की यह हिंसा तब शुरू हुई जब राष्ट्रपति ट्रंप ने अपने समर्थकों को संसद भवन पर चढ़ाई करके चुनावी नतीजों को पलट देने का फतवा दिया। इसके बाद उनके हिंसक समर्थक हथियारबंद होकर संसद पर चढ़ बैठे, और खिडक़ी-दरवाजे तोडक़र भी भीतर घुसे। इस पूरे दौर में ट्रंप अपने आम सनकी और हिंसक मिजाज के मुताबिक हमलावर भीड़ को बहुत खास बताते हुए उसकी तारीफ करते रहे। उन्होंने चुनावी धांधली का आरोप लगाते हुए हिंसा को जायज ठहराया। तीनों प्रमुख सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ने ट्रंप पर लोगों को भडक़ाने और अपने दावों से उन्हें भ्रमित करने का दोषी मानते हुए राष्ट्रपति के अधिकारिक अकाऊंट ब्लॉक कर दिए।
पूर्व राष्ट्रपति बराक ओबामा सहित अमरीका के बहुत से दूसरे नेताओं का मानना है कि दो महीनों से इस हिंसा के लिए माहौल बनाया जा रहा था, ताकि ट्रंप के समर्थकों को सच्चाई दिखाई ही न दे। वाशिंगटन शहर में पूरी रात के लिए कफ्र्यू लगा दिया गया है, और 15 दिनों की इमरजेंसी लागू कर दी गई है। इस सिलसिले में देखने लायक बात यह भी है कि ट्रंप की बेटी इवांका ने संसद पर हमला करने वालों को देशभक्त कहते हुए ट्वीट किया, और उस पर इतनी आलोचना हुई कि उन्हें खुद ही ट्वीट डिलीट करना पड़ा।
अमरीका का संविधान दुनिया में अनोखा है, और वहां की चुनाव प्रणाली भी। अमरीकी संसदीय इतिहास में पहले भी कुछ राष्ट्रपति ऐसे हुए हैं जिन पर महाभियोग चला, लेकिन ट्रंप जैसा सनकी, बददिमाग, हिंसक, और अश्लील कोई राष्ट्रपति पहले नहीं हुआ था। ट्रंप ने अमरीकी संवैधानिक व्यवस्थाओं को पूरी तरह खारिज करते हुए अपने महत्वोन्माद को देश पर लादने की कोशिश की, और जाहिर तौर पर ट्रंप एक दिमागी मरीज है। ट्रंप ने अमरीका की लोकतांत्रिक-संवैधानिक परंपराओं को कुचलते हुए अपने आपको चुनाव प्रक्रिया और चुनावी नतीजों के ऊपर माना। उन्होंने अपने नस्लवादी, अलोकतांत्रिक समर्थकों को चुनाव के पहले से लगातार एक राष्ट्रवादी उन्माद में डुबाकर रखा।
अमरीकी लोकतंत्र के लिए आज का दिन भारी शर्मिंदगी का काला दिन है जब मौजूदा राष्ट्रपति ही फतवे देकर अपने समर्थकों से चल रही संसद पर हमला करवाता है। किसी भी सभ्य देश में क्या ऐसी कल्पना की जा सकती है कि आए दिन सोशल मीडिया राष्ट्रपति की पोस्ट को ब्लॉक करता रहे, डिलीट करता रहे, अकाऊंट को लॉक कर दे कि राष्ट्रपति झूठ बोल रहा है, या भडक़ाऊ बातें कर रहा है। अमरीका एक बहुत बड़े खतरे में इसलिए भी है कि वहां हर नागरिक को कई-कई बंदूकें और मशीनगन रखने की छूट है। ऐसे में अगर ट्रंप के राष्ट्रवादी-उन्मादी लोग देश भर में जगह-जगह हथियारों का इस्तेमाल करने लगें तो क्या होगा? जब देश के लोगों को वहां का कोई फतवेबाज नेता संविधान में आस्था से परे ले जाता है, जब संवैधानिक व्यवस्था को खारिज कर देता है, जब हिंसा के लिए फतवे देता है, और अपने आपको कानून से ऊपर साबित करता है, तो फिर उसके समर्थक अपने ही देश के लिए खतरनाक हो जाते हैं। अमरीका जैसा मजबूत-लोकतांत्रिक देश आज इतिहास का पहला ऐसा हमला झेल रहा है। यह पूरा सिलसिला बाकी दुनिया के लिए भी एक सबक है कि जब नेता अपने समर्थकों को कानून से परे ले जाते हैं, तो पूरा देश एक ऐसे खतरे में पड़ता है जिसके अंत का अंदाज मुश्किल रहता है। अमरीका के आने वाले दिन बताएंगे कि ट्रंप के मंत्रिमंडल के सदस्य उसे राष्ट्रपति के पद से हटाने के संवैधानिक प्रावधान का उपयोग करते हैं या नहीं? लेकिन एक बात तय है कि ट्रंप अपनी पार्टी के लिए एक बड़ा कलंक साबित हुआ है, और अमरीकी लोकतंत्र के लिए भी। पार्टी अपनी इज्जत कुछ हद तक बचा सकती है अगर वह ट्रंप को दिमागी-बीमार करार देकर हटा दे।

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