किसानों के प्रति सरकार की असंवेदनशीलता न जाने कितनी जानें लेगी..

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– एआईकेएससीसी ने कहा कि सरकार गैर गम्भीर; अन्य किसान संगठनों से वार्ता और ‘कई संशोधनों’ पर जोर दिखाता है कि वह वार्ता में दिये गये ‘आपकी रिपील की बात समझ ली है’, ‘आपस में चर्चा करेंगे’ से पीछे हटी है

– भाजपा नेताओं द्वारा किसानों की मांग की आलोचना, प्रधानमंत्री मोदी द्वारा तीन खेती के कानून अमल करके कारपोरेट मुनाफे को मदद देने और किसानों को बरबाद करने से प्रेरित है।

– गणतंत्र दिवस पर दिल्ली व शेष देश में किसानों की ट्रेक्टर परेड। कल सभी धरनास्थलों से इसकी अभ्यास परेड।

– सरकार की ओर से विरोधाभासी बयान – मंत्री, किसानों की मांग व खाद्यान्न सुरक्षा जरूरतों पर हमलावर, जबकि दुनिया के एक तिहाई भूखे लोग भारत में रहते हैं।

– जैसे-जैसे एमएसपी पर आश्वासन बढ़ रहा है धान के दाम गिर रहे हैं।

– रेवाड़ी पुलिस द्वारा आपसी मतभेद बढ़ाने की साजिश विफल; विरोध कर रहे किसान व जनता ने आम यातायात खुलवाया; किसानों की पुलिस घेराबंदी जारी।

– एआईकेएससीसी व एसकेएम के आह्नान पर राज्यों में अभियान व विरोध बढ़े; बागपत में किसानों का धरना; चेन्नई धरने में भारी भागीदारी, ओडिशा के आदिवासियों ने तीन कानूनों के विरोध की, की घोषणा; दक्षिण राज्यों के सैकड़ों किसान दिल्ली के विरोध में भाग लेने के लिए आ रहे हैं।

गणतंत्र दिवस के अवसर पर दिल्ली में किसान ट्रैक्टर परेड निकालेंगे और इसी तरह सभी ग्रामीण इलाकों में, सभी जिलों में ट्रैक्टर परेड या किसान परेड आयोजित की जाएंगी। कल की सभी धरना स्थलों से टैªक्टर रैली की तैयारी भी चल रही है और भारी संख्या में लोग एकत्र हो रहे हैं।

एआईकेएससीसी के वर्किंग ग्रुप ने कहा है कि सरकार वार्ता तथा किसानों की समस्या को हल करने के प्रति गैर गम्भीर है। 7वें दौर की वार्ता के अंत में उसने कहा था ‘हमने समझ लिया है कि आप रिपील की बात कर रहे हैं’ और हमें अब ‘आपस में और चर्चा’ करनी होगी। इसके बावजूद जिस दिन से वार्ता विफल रही है, कई मंत्री व भाजपा नेता आगे की प्रक्रिया में रोड़ा अटका रहे हैं।

कृषि मंत्री ने कहा कि वे उन अन्य किसान यूनियनों से बात करेंगे जो किसानों का समर्थन कर रहे हैं। कानून के पक्ष में समर्थन का वह यह असफल प्रयास पहले भी कर चुके हैं। प्रधानमंत्री मोदी की दिशा को अपनाते हुए मध्य प्रदेश व पंजाब के भाजपा नेता लगातार किसानों की मांगों को देश हित के विपरीत बता रहे हैं।

जहां श्री गडकरी ने अनाज के उत्पादन को सुधारते हुए देश की ज्यादातर भूखी जनसंख्या का पेट भरने की आवश्यकता पर हमला किया है, उन्होंने एमएसपी की मांग को गलत बताते हुए कहा कि यह बाजार के रेट से ज्यादा होती है। यह तब कहा कि जब सरकार कह रही है कि एमएसपी जारी रहेगी। मंत्रियों को ये पता होना चाहिए कि दुनिया के एक तिहाई भूखे लोग भारत में रहते हैं, जो उसकी जनसंख्या के हिस्से से दो गुना हैं। नीति आयोग के सदस्य लगातार कह रहे हैं कि सरकार न खाना खरीद सकती है, न उसको भंडारण कर सकती है, जबकि सरकारी पक्ष है कि खरीद जारी रहेगी।

जैसे-जैसे सरकार के एमएसपी के आश्वासन की ध्वनि तेज हो रही है, धान के दाम गिरते जा रहे हैं, जो अब 900 से 1000 रु0 कुंतल बिक रहे हैं।

इस बीच हरियाणा पुलिस द्वारा रेवाड़ी में विरोध कर रहे किसान व स्थानीय लोगों में मतभेद पैदा करने के प्रयासों को विफल किया गया। हालांकि पुलिस ने किसानों को घेरा हुआ है। उसने विपरीत दिशा में जाने वाले मार्ग को बंद करके लोगों की परेशानी बढ़ा दी थी। आज सुबह ट्रक ड्राइवरों, किसानों व स्थानीय लोगों ने दबाव बनाकर यह रास्ता खुलवा दिया।

किसानों के पक्ष में बहुत सारे अन्य विरोध भी शुरु हो गये हैं। कल किसान 500 ट्रैक्टरों में बागपत जिले के बड़ौत तहसील में आए और धरना शुरु कर दिया। चेन्नई में भी भारी भागीदारी के साथ धरना चल रहा है। ओडिशा में आदिवासियों की विरोध की तैयारी चल रही है।

इस बीच एआईकेएससीसी व एसकेएम के आह्नान पर कई जन कार्यक्रमों की घोषणा की गयी है। देश भर में लोग 13 जनवरी लोहड़ी/संक्राति के अवसर पर 3 कानून व बिजली बिल की प्रतियां जलाएंगे। 18 जनवरी को महिला किसान दिवस मनाया जाएगा। 23 जनवरी को सुभाषचन्द्र बोस की जयंती पर कार्यक्रम किया जाएगा और जिला व निचले स्तर के धरने व क्रमिक हड़तालें जारी रहेंगी।

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