वैक्सीन एक्सपर्ट कमेटी की एक्सपर्टीज क्या है?

Desk

-गिरीश मालवीय॥

कल कोविड-19 का टीका उपलब्ध कराने के लिए सरकार द्वारा गठित सब्जेक्ट एक्सपर्ट कमेटी ने सीरम इंस्टीट्यूट द्वारा उत्पादन की गयी कोरोना वैक्सीन को इमरजेंसी अप्रूवल देने की सिफारिश कर दी है

मेरा प्रश्न बहुत सीधा सा है..

आखिर इस एक्सपर्ट कमेटी में कितने मेम्बर है ?
इसमें से कितने पब्लिक हेल्थ एक्सपर्ट है ?
कौन वायरोलॉजिस्ट है ?
कौन महामारी विशेषज्ञ है ?
कौन सांख्यिकीविद है ?
कौन बायोटेक्नोलॉजी का एक्सपर्ट है ?
इस कमेटी में इंडिपेंडेंट मेम्बर कितने है?
सरकार की विभिन्न संस्थाओ से जुड़े मेम्बर कितने है ?

अभी तक जो हमे मालूम चला है कि इस एक्सपर्ट कमेटी में नीति आयोग के सदस्य डॉ वी के पॉल अध्यक्ष है.
VK पॉल न तो पब्लिक हेल्थ एक्सपर्ट है न वायरोलॉजिस्ट न ही महामारी विशेषज्ञ है न वह बायोटेक्नोलॉजी से जुड़े है बस बाल रोग विशेषज्ञ है !

आइये अब जरा यूएस फूड ऐंड ड्रग ऐडमिनिस्ट्रेशन (FDA) की भारत की इस एक्सपर्ट कमेटी से तुलना करें ..…….इस संदर्भ में फाइजर की वेक्सीन को इमरजेंसी अप्रूवल देने की जो खबर हमने ढूंढी उस के मुताबिक USFDA के वैक्सीन अडवाइजरी पैनल में स्वतंत्र वैज्ञानिक एक्सपर्ट्स, संक्रामक रोग के डॉक्टर्स, सांख्यिकीविद आदि शामिल थे और इमर्जेंसी मंजूरी के पक्ष में 17 जबकि इसके विरोध में केवल 4 वोट पड़े थे ‘द न्यूयॉर्क टाइम्स’ की रिपोर्ट के अनुसार एक सदस्य ने 16 साल या उससे ऊपर के लोगों पर वैक्सीन के इमर्जेंसी ऑथोराइजेशन के पक्ष में वोट किया.

क्या भारत की मीडिया का यह फर्ज नही था कि वह लोगो को बताए कि भारत के एक्सपर्ट पैनल में कितने विशेषज्ञों ने सीरम इंस्टिट्यूट की वैक्सीन को इमरजेंसी अप्रूवल देने के पक्ष में मत दिया है और कितने इसके विरोध में थे ?

इस मीटिंग का लिखित एजेंडा क्या था ? सीरम इंस्टिट्यूट का प्रजेंटेशन कैसा था ?

कुछ महीनों पहले इस एक्सपर्ट पैनल के गतिविधियों के बारे में कॉमनवेल्थ ह्यूमन राइट्स इनीशियेटिव के वेंकटेश नायक ने स्वास्थ्य मंत्रालय में एक RTI लगाकर कई जानकारियां मांगी थीं, जिनमें उसके गठन से लेकर कामकाज और बैठकों की तारीख, प्रत्येक बैठक में जारी विस्तृत एजेंडे की प्रति, इसके सदस्यों के समक्ष दी गई प्रस्तुति तथा विदेश मंत्रालय के साथ साझा किये गए दस्तावेजों की जानकारी शामिल है.

उन्हें कोई जानकारी नही दी गयी.

वेंकटेश नायक ने इस एक्सपर्ट पैनल के अध्यक्ष तथा प्रत्येक सदस्य को प्रत्येक बैठक के लिये दिये जाने वाले शुल्क तथा अन्य पारिश्रमिक या भत्तों की जानकारी भी मांगी थी.

उन्होंने यह RTI स्वास्थ्य मंत्रालय के अलावा विदेश मंत्रालय और ICMR में भी लगाई थी किसी संस्थान ने इस RTI का जवाब नही दिया.

स्वास्थ्य मंत्रालय के अधिकारी का कहना था कि विशेषज्ञ समूह के अध्यक्ष तथा प्रत्येक सदस्य को दी जाने वाली प्रत्येक बैठक की फीस तथा अन्य पारिश्रमिक या भत्तों के बारे में जानकारी मंत्रालय के टीकाकरण अनुभाग के पास उपलब्ध नहीं है.

विदेश मंत्रालय ने दस्तावेजों के बारे में पूछे जाने पर राष्ट्रीय सुरक्षा का हवाला देते हुए रिकॉर्ड उपलब्ध कराने से इनकार कर दिया.

यानी साफ दिख रहा है कि एक्सपर्ट कमेटी के बारे में कोई पारदर्शिता नही बरती गई है कल को कुछ ऊंचनीच होती है तो कौन जिम्मेदार होगा ?

यदि आप को कोई गंभीर बीमारी हो जाती है तो क्या आप अपने फैमिली डॉक्टर को ही दिखाते रहेंगे ? उस बीमारी के विशेषज्ञ को नही दिखाएंगे उसकी ओपिनियन नही लेंगे….. यहां तो पूरे देश के करोड़ों लोगों के स्वास्थ्य का सवाल है.

कोई यह सवाल उठाएगा या नही उठाएगा ?

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