धर्म की आड़ में कुछ लोग दहशतगर्दी का कारोबार कर रहे हैं..

Desk

यूरोपीय देश आस्ट्रिया की राजधानी विएना सोमवार रात हुए आतंकी हमले से दहल गई है। हमले में सात लोगों की मौत हो चुकी है और कम से कम 15 घायल हैं। भयावह बात ये है कि हमलावरों ने विएना के छह स्थानों पर गोलियां चलाईं और इंटरनेट पर एक वीडियो आया है, जिसमें नजर आ रहा है कि आधुनिक हथियारों से लैस हमलावर चलते हुए गोलियां बरसा रहा है। इस भयावह मंजर से मुंबई हमलों के दिल दहलाने वाले दृश्य याद आ गए। हालांकि इंटरनेट पर चल रहे वीडियो की सत्यता की पुष्टि नहीं की गई है। गोलीबारी की ये घटना विएना के सेंट्रल सिनेगॉग के पास हुई जो शहर का मुख्य यहूदी मंदिर है।

हालांकि ये दावे के साथ नहीं कहा जा सकता कि हमले का निशाना यही जगह थी। खास बात ये है कि ये हमला उस वक्त हुआ जब ऑस्ट्रिया में लॉकडाउन का दूसरा दौर शुरु होने में चंद घंटे शेष थे। गौरतलब है कि कोरोना संक्रमण के बढ़ते मामलों के बाद पूरे देश में नई सख्तियां लागू की जा रही हैं। इस वजह से बहुत सारे लोग शराबखानों और रेस्तरां में लुत्फ़ उठा रहे थे जिन्हें अब नवंबर के अंत तक बंद कर दिया गया है। ऑस्ट्रिया के चांसलर सेबेल्टियन क्रूज़ ने इसे एक आतंकवादी हमला करार देते हुए कहा कि हम कभी भी आतंकवाद से नहीं डरेंगे और इन हमलों का मुकाबला हर तरह से करेंगे।

उधर,  विएना में यहूदी समुदाय के प्रमुख ओस्कार ड्यूट्स ने कहा कि यह स्पष्ट नहीं है कि मुख्य उपासनागृह को निशाना बनाया गया था या नहीं। विएना की इस घटना पर भारत, अमेरिका, ब्रिटेन, जर्मनी समेत कई देशों ने दुख जताया है और हमले की निंदा की है। वहीं फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों ने ट्वीट कर कहा है कि विएना में हमला दुखद है।

मैक्रों ने कहा, फ्रांस के बाद हमारे करीब देश ऑस्ट्रिया को निशाना बनाया गया है। हमारे दुश्मनों को पता होना चाहिए कि हम झुकेंगे नहीं और साथ मिलकर लड़ेंगे। बता दें कि फ्रांस में इस वक्त आतंकवाद और इस्लामिक कट्टरता को लेकर विवाद चल रहा है। कुछ दिनों पहले पैगंबर मोहम्मद साहब का कार्टून कक्षा में दिखाने पर एक शिक्षक की नृशंस हत्या कर दी गई थी। जिस पर फ्रांस की सरकार ने कड़ी प्रतिक्रिया दी थी। राष्ट्रपति इमैनुअल मैक्रों ने इसे इस्लामिक कट्टरता कहा था, जिसके बाद फ्रांस के नीस शहर में चर्च के बाहर एक 20 बरस के युवक ने चाकू से तीन लोगों की हत्या कर दी थी।

मैक्रों ने इस्लामिक कट्टरपंथ पर नकेल कसने की भी बात कही थी जिसे लेकर मुस्लिम देशों के नेताओं ने उन पर इस्लामोफोबिया को बढ़ावा देने का आरोप लगाया था। पाकिस्तान, ईरान, तुर्की, बांग्लादेश और मोरक्को समेत कई देशों ने मैक्रों के बयान को लेकर नाराजगी जाहिर की, भारत में भी कुछ शहरों में इसे लेकर विरोध हुआ। वैसे भी आतंकवाद का कोई धर्म नहीं होता। हालांकि मैक्रों ने हाल ही में यह भी कहा कि वह समझ सकते हैं कि पैगंबर मोहम्मद के कार्टून से मुस्लिम समुदाय को धक्का या हैरानी हुई लेकिन हिंसा को स्वीकार नहीं किया जा सकता। 

इधर यूएई ने फ्रांस का समर्थन किया है। अबूधाबी के क्राउन प्रिंस ने कहा कि पैगंबर मोहम्मद के लिए मुसलमानों के मन में अपार आस्था है लेकिन इस मुद्दे को हिंसा से जोड़ना और इसका राजनीतिकरण करना बिल्कुल अस्वीकार्य है। यह सही बात है कि किसी भी तरह की हिंसा या आतंकी हमले का राजनीतिकरण नहीं किया जाना चाहिए। मगर इस वक्त वैश्विक राजनीति में यह आम बात हो गई है। धर्म की आड़ में कुछ लोग दहशतगर्दी का कारोबार कर रहे हैं और इस बात के प्रमाण हैं कि दुनिया के ताकतवर मुल्कों ने इस कारोबार को बढ़ाने में मदद की, जैसे अमेरिका की मदद से तालिबान खड़ा हुआ।

लेकिन अब अमेरिका खुद को शांतिदूत के तौर पर प्रस्तुत कर रहा है। अपने आर्थिक, राजनैतिक स्वार्थों के लिए दुनिया भर में इस तरह के खेल खेले गए, लेकिन जब आतंकवाद विषबेल की तरह बढ़ गया, तो इसके लिए एक धर्म को जिम्मेदार ठहराया जा रहा है। इस्लामिक कट्टरपंथ जैसे शब्द रचकर गुमराह किया जा रहा है। जबकि सच ये है कि कट्टरता हर धर्म में है और उदारत भी उसी तरह हर जगह मौजूद है। अभी बांग्लादेश में कथित इस्लाम विरोधी फेसबुक पोस्ट के बाद हिन्दुओं के घर और मंदिर जलाए जाने के मामले में गृहमंत्री असदुज्जमां खान कमाल ने कड़ी कार्रवाई करने के आदेश दिए हैं।

उन्होंने कहा कि कट्टरपंथियों को बख्शा नहीं जाएगा। इधर महाराष्ट्र में औरंगाबाद के डॉ. अल्ताफ का एक दिल को छूने वाला वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुआ है, जिसमें डॉ.अल्ताफ एक शहीद की मां को गले लगा रहे हैं। दरअसल उन्होंने उस बुजुर्ग महिला का इलाज किया था और जब ये पता चला कि उनका बेटा शहीद हुआ है, तो उन्होंने उनसे फीस नहीं ली और गले लगाकर अपनी भावनाएं प्रदर्शित कीं। इस पर महाराष्ट्र के मंत्री अशोक चव्हाण ने फोन कर उनकी सराहना की है। इस तरह की घटनाओं से इंसानियत पर भरोसा बने रहता है और सभी धर्म इसी तरह की इंसानियत की शिक्षा ही देते हैं। कट्टरता का पाठ किसी धर्म में नहीं है, केवल स्वार्थ से भरी राजनीति में है। आतंकवाद के खिलाफ लड़ाई लड़ने का दावा करने वालों को ये बात हमेशा याद रखना चाहिए।

(देशबंधु)

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