मथुरा: सर्व धर्म सम भाव बनाम धार्मिक कठमुल्लावाद..

-अनिल शुक्ल॥

‘सर्व धर्म सम भाव’ की सोच और कर्तव्य कैसे धार्मिक कठमुल्लावाद, सोशल मीडिया और मीडिया के क्रूर प्रचार की भेंट चढ़ जाते हैं और कैसे पुलिस-प्रशासन इन मामलों में एकतरफ़ा कार्रवाई करने को तत्काल सक्रिय हो जाती है, इसका उदाहरण दिल्ली से मथुरा आए ‘ख़ुदाई ख़िदमतगाऱ संस्था’ के कार्यकर्ता हैं। मथुरा पुलिस ने ‘संस्था’ के प्रमुख को दिल्ली पहुँच कर गिरफ़्तार कर लिया है। ‘ख़ुदाई ख़िदमतगाऱ’ संस्था भारत रत्न सीमान्त गांधी ख़ान अब्दुलगफ़्फ़ार ख़ान द्वारा स्थापित की गई थी। इन कार्यकर्ताओं का स्वागत करने वाली संस्था के संयोजक के भी पॉपुलेशन फ्रंट ऑफ़ इंडिया (पीएफआई) से जुड़े होने की कहानियां भी टीवी चैनल पर चलाई जा रही है। संयोजक का दोष इतना है कि वह पेशे से वकील हैं।


‘ख़ुदाई ख़िदमतगार’ संस्था के 4 कार्यकर्ता दिल्ली से ’84 कोस ब्रज यात्रा’ की परिक्रमा करने की नियत से मथुरा-वृन्दावन आए थे। इनमें संस्था के सचिव फ़ैज़ल ख़ान के अलावा मोहम्मद चांद, नीलेश गुप्ता और आलोक रत्न शामिल थे। ‘परिक्रमा’ का उद्देश्य ‘देश और दुनिया की भलाई के लिए धर्मों के उज्जवल पक्ष को आगे रखने की ज़रुरत’ को बताया गया था। उनकी यात्रा से पहले 27 अक्टूबर को मथुरा की स्थानीय संस्था ‘क़ौमी एकता मंच’ ने मथुरा में उनका नागरिक अभिनन्दन किया। अपने अभिनंदन समारोह में बोलते हुए संस्था के सचिव फ़ैज़ल ख़ान ने रामचरितमानस की चौपाइयों, क़ुरआन शरीफ की आयतों और हदीस के हवाले से “सभी धर्मों में निहित समान सद्गुणों” को “ईश्वरीय देन” कहा। सीमान्त गांधी का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि ग़ैर बराबरी और नाइंसाफ़ी को समाप्त करके सभी धर्मों में प्रीति पैदा करने की शिक्षा ही सभी धर्मों का मूल है। फ़ैज़ल ने भक्ति और सूफ़ी मार्ग के कवियों- कबीर, रहीम, रसखान और मीरा आदि के दोहे और भजन के उदाहरणों से देश की जनता के भीतर आपसी सद्भाव और आवश्यक्ता को रेखांकित किया। बताते हैं कि उक्त समारोह में बड़ी तादाद में मथुरा-वृन्दावन के बुद्धिजीवी और विभिन्न पेशों के लोग शामिल थे।


‘परिक्रमा’ को पूरी करके ये लोग विभिन्न मंदिरों में अभ्यर्थना करते और स्थानीय पुरोहितों और मंदिर में मौजूद भक्त जनों आदि के समक्ष अपनी यात्रा का उद्देश्य बताते हुए 29 अक्टूबर को नंदगांव के प्रसिद्ध मंदिर में पहुंचे। फ़ैज़ल ने मीडिया को बताया कि “यहां मौजूद सेवायतों और भक्त जनों से हमारे अपने उद्देश्य की चर्चा के दौरान ही नमाज़ का समय हो गया था। जब हमने वहाँ मौजूद लोगों से नज़दीक में किसी मस्जिद की बाबत पूछा तो सेवायत कान्हा आदि ने कहा कि जब आप सभी धर्मों को समान समझते हैं तो यहाँ क्या मतभेद? यह भी भगवान् का घर है। आप नमाज़ यहां भी कर सकते हैं, हमें कोई आपत्ति नहीं। सेवायतों का ऐसा उत्तर सुनकर हम लोगों को बड़ी प्रसन्नता हुई और मैंने और चांद ख़ान ने मंदिर में ही अपनी नमाज़ अता की।”


यहां तक सब ठीक था। बाहर निकल कर ‘सर्व धर्म सम भाव’ के इन आस्थावानों ने मंदिर के सेवायतों की इस ‘ऊंची’ सोच की प्रशंसा की नियत से नमाज़ की अपनी तस्वीरों को सोशल मीडिया पर अपलोड कर दिया।


उनका अपलोड करना था कि जैसे बवाल उठ खड़ा हुआ। न सिर्फ़ मथुरा, बल्कि दिल्ली तक के ‘हिन्दू’ और ‘इस्लाम’ के आस्थावानों ने जम कर उत्पात मचाया। सोशल मीडिया पर 3 दिन तक मंदिर परिसर के ‘अपवित्र’ होने और उसे पवित्र करने की नियत से गंगाजल से धोने आदि की तस्वीरें चलती रहीं। उधर इसकी प्रतिक्रियास्वरूप कई मुस्लिम कठमुल्लावादी संगठनों के सोशल नेटवर्क पर भी फ़ैज़ल और उनके संगठन पर ‘इस्लाम को नष्ट किये जाने’ के आरोप की टिप्पणियां वायरल हुईं।


मथुरा-वृन्दावन के कथित संत समाज ने ‘नन्द बाबा मंदिर’ के सेवायतों को इस ‘जघन्य अपराध’ के लिए कस कर धमकाया और कठोर दबाव डाला। तीसरे दिन यानि 1 नवंबर की रात ‘मंदिर’ के सेवायत कान्हा, मुकेश और शिवहरि गोस्वामी की तहरीर के आधार पर पुलिस थाना बरसाना में सब इन्स्पेक्टर दीपक कुमार पांडेय की ओर से एफआईआर दर्ज़ करवाई गई। इन लोगों ने पुलिस को बताया कि फ़ैज़ल आदि ने रसखान, मीरा आदि की हमसे चर्चा की जो उनका भक्त होना दर्शाती थी। राजभोग का समय हो जाने पर हम लोग मंदिर के गर्भगृह में चले गए इसी बीच इन्होने नमाज़ पढ़ के फोटो को वायरल कर दिया।
एसएसपी मथुरा गौरव ने सोमवार की शाम स्थानीय संवाददाताओं के समक्ष कहा कि समूचे प्रकरण की जांच की जा रही है लेकिन पुलिस ने 2 नम्बर की रात ही फ़ैज़ल को नयी दिल्ली स्थित जामिया नगर के उनके आवास से गिरफ्तार कर लिया। बाक़ी 3 लोगों की खोज की जा रही है। फ़ैज़ल लम्बे समय से मेधा पाटेकर और संदीप पांडेय जैसे सामाजिक कार्यकर्ताओं के साथ सामाजिक गतिविधियों में सक्रिय रहे हैं।
सोमवार 2 अक्टूबर को ‘न्यूज़ 24 टीवी चैनल के जरिये इस प्रकरण को एक नया रूप देने की कोशिशें चलती रहीं। सारे दिन ये खबर चलाई गई की मंदिर और ‘हिन्दू आस्थाओं का विनाश’ करने वाले इन लोगों को मथुरा में जिस संगठन ने आमंत्रित किया, उसके संयोजक के तार ‘पीएफ़आई’ से जुड़े हुए हैं। वस्तुतः ‘क़ौमी एकता संगठन’ नामक उक्त संस्था के संयोजक मधुवन दत्त चतुर्वेदी की गिनती मथुरा के वरिष्ठ वकीलों में होती है।


मथुरा में हाल ही में गिरफ्तार किये गए मलयाली पत्रकार व 3 अन्य मुस्लिम युवकों के वक़ील होने के नाते कोर्ट में पैरवी कर रहे हैं। पुलिस ने इन युवकों को ‘पीएफ़आई’ से जुड़ा होने का आरोप लगाया है। श्री चतुर्वेदी टीवी चैनल के इस मीडिया ट्रायल से बेहद आहत हैं।

“मीडिया दरबार” से हुई बातचीत में उन्होंने बताया कि “ख़ुदाई खिदमतगार संस्था’ एक सर्व धर्म सम भाव संस्था है जो धर्म के जरिये समाज में प्रेम के प्रसार का काम कर रही है। हमारा ‘क़ौमी एकता मंच’ भी लम्बे समय से कमोबेश समाज में ऐसे ही प्रेमपूर्ण मूल्यों को लोकप्रिय बनाने की दिशा में अग्रसर है इसीलिये उनका नागरिक अभिनन्दन करना हम अपना कर्तव्य समझते हैं। ” टीवी चैनल द्वारा पीएफआई से तार जुड़े होने के आरोप के बारे में पूछे जाने पर उनका कहना है कि “अदालत में मुजरिम की पैरोकारी करना मेरा पेशा है। उसका धर्म और राजनीति से कोई ताल्लुक़ नहीं। यह आरोप शरारतपूर्ण और राजनीति से प्रेरित है।“
बहरहाल देखना होगा कि सर्व धर्म सम भाव और धार्मिक कठमुल्लावाद के संघर्ष में क़ानूनन जीत किसकी होती है।

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