हॉलीवुड से लेकर बॉलीवुड तक, आधी सदी का दौर भरा पड़ा है मर्दानी हिंसा से

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-सुनील कुमार।।
जेम्स बांड की फिल्मों में इस किरदार को अलग-अलग वक्त पर अलग-अलग बहुत से लोगों ने निभाया, लेकिन उनमें से एक शॉन कॉनरी अधिक शोहरत पाने वाले अभिनेता थे। कल वे गुजरे तो इनकी फिल्मों का मजा लेने वाले लोगों के बीच अफसोस का दौर शुरू हो गया। लेकिन सोशल मीडिया पर कुछ महिलाओं ने उन्हें श्रद्धांजलि देने से मना कर दिया, और लिखा कि इसी आदमी ने महिलाओं के बारे में घोर अपमानजनक बातें भी कही थीं। इंटरनेट पर कुछ भी ढूंढना आसान हो जाता है, और 1965 में शॉन कॉनरी का प्लेबॉय पत्रिका को दिया गया एक इंटरव्यू पल भर में सामने आ गया जिसमें उसने कहा था- मैं नहीं समझता कि किसी महिला को पीटने में कोई खास बुराई है, हालांकि मैं ऐसा करते हुए यह सलाह दूंगा कि वैसे नहीं पीटना चाहिए जैसे किसी मर्द को पीटा जाता है। खुले हाथ का एक झापड़ उस वक्त सही होगा जब बहुत सी चेतावनियों के बावजूद कोई महिला न समझे। एक तो यह इंटरव्यू 1965 के उस वक्त का है जब महिलाओं की इज्जत करना अधिक चलन में नहीं था। फिर जेम्स बांड के किरदार का एक अनिवार्य हिस्सा खूबसूरत और ग्लैमरस महिलाओं से सेक्स रहता था, और ऐसी फिल्में कर-करके किसी का भी दिमाग थोड़ा सा खराब होना स्वाभाविक था। फिर यह इंटरव्यू अमरीका की एक मर्दाना ग्लैमरस नग्न पत्रिका प्लेबॉय को दिया गया था, और जाहिर है कि उसके सवाल और उससे बात करने वाले के जवाब मर्दाना तो रहने ही थे।

लेकिन हम जिन बातों के आधार पर यह विश्लेषण कर रहे हैं उनसे ठीक परे का एक इंटरव्यू अभी हिन्दुस्तान में भी सामने आया है। एक वीडियो इंटरव्यू में मुकेश खन्ना नाम के एक औसत दर्जे के चर्चित अभिनेता ने महिलाओं के अपमान की ढेर सारी बातें कही हैं। यह अभिनेता महाभारत में भीष्म पितामह बना था, और बच्चों के टीवी सीरियल शक्तिमान में यह एक सुपरमैन की तरह का किरदार, शक्तिमान, बनता है। अब इन दोनों ही किरदारों में किसी किस्म के सेक्स की कोई गुंजाइश तो थी नहीं, लेकिन इसने अभी वीडियो पर दर्ज इस इंटरव्यू में फिल्म उद्योग में सेक्स-शोषण के खिलाफ शुरू हुए मी-टू (मेरे साथ भी) अभियान को लेकर परले दर्जे की घटिया बातें कही हैं। उसका कहना है- औरत का काम है घर सम्हालना, प्रॉब्लम कहां से शुरू हुई है मी-टू की, जब औरत ने भी काम करना शुरू कर दिया। आज औरत मर्द के साथ कंधे से कंधा मिलाने की बात करती है। लोग महिलाओं की आजादी की बात करेंगे, लेकिन मैं आपको बता दूं औरत के बाहर काम करने से सबसे पहले घर के बच्चों का नुकसान होता है जिनको मां नहीं मिलती। जब से शुरूआत हुई (महिला के बाहर काम करने की) तब से यह भी शुरूआत हुई कि मैं भी वही करूंगी जो मर्द करता है। नहीं, मर्द मर्द है, और औरत औरत है।

अब अगर जेम्स बांड का सेक्सभरा किरदार करने से, और 1965 के वक्त में, और प्लेबॉय पत्रिका से बात करने से शॉन कॉनरी की वैसी सोच हो गई थी, तो फिर भीष्म पितामह और बच्चों का शक्तिमान बनने वाले की सोच तो ऐसी नहीं होनी चाहिए थी? लेकिन अपनी ही बात को काटते हुए हम यह भी सोच रहे हैं कि महाभारत में जिस तरह भीष्म पितामह ने बेकसूर महिला पर जुर्म को अनदेखा किया था, हो सकता है कि भीष्म पितामह का किरदार करते-करते इस बहुत ही साधारण अभिनेता की सोच उस कहानी के जमाने की हो गई हो, जिस वक्त महिलाओं के लिए हिकारत ही रहती थी।

लेकिन इस मुद्दे पर आज लिखना इसलिए तय किया था कि किसी वक्त लापरवाही में कही गई कोई बात किस तरह लोगों की याददाश्त में भी दर्ज हो जाती है, और इतिहास में भी। आधी सदी के भी पहले 1965 में न तो इंटरनेट था, और न ही सोशल मीडिया। लेकिन लोग उस वक्त के इंटरव्यू में उस अमरीकी अभिनेता की कही हुई बातों को आज भी भूले नहीं हैं, और घटिया-हिंसक बातों की वजह से आज भी उसे श्रद्धांजलि देने से इंकार कर रहे हैं। अब तो वक्त बदल गया है, लोगों के वीडियो पल भर में ट्वीट हो जाते हैं, और बाद में मुकरना नामुमकिन भी हो जाता है। आज किसी को उसकी हिंसक और गलत बातों के लिए धिक्कारना आसान हो गया है। यही मुकेश खन्ना छत्तीसगढ़ में स्कूलों के एक फर्जीवाड़े में ब्रांड एम्बेसडर था, जालसाजों से उसकी यारी थी, और उसके नाम और चेहरे, और मौजूदगी का सहारा लेकर इस प्रदेश के हजारों बच्चों के मां-बाप को धोखा दिया गया था। ऐसा आदमी आज महिलाओं के सेक्स-शोषण के मुद्दे पर अगर यह कह रहा है कि चूंकि वे काम करने बाहर निकलती हैं, इसलिए उनके साथ ऐसा होता है, तो इस आदमी को महाभारत के भीतर ही दफन कर देना चाहिए। ऐसा बयान देने वाला महाभारत काल के बाद कम से कम लोकतंत्र में तो रहने का हकदार नहीं है। यह तो अच्छा है कि इनके मन की गंदगी ऐसे इंटरव्यू में सामने आती है, और लोगों को इन्हें धिक्कारने का मौका मिलता है।

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