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दिमनी से ‘विकल्प’ की आस..

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-विवेक श्रीवास्तव।।
मध्य प्रदेश में किन हालात में उप चुनाव हो रहे हैं यह सभी जानते हैं। और ऐसे में सत्ता से सड़क पर और सड़क से सत्ता पर पहुंचीं कांग्रेस और भाजपा दोनों की ऊर्जा उपचुनाव में सिर्फ यही साबित करने में खर्च हो रही है कि कौन किससे बेहतर है। बिकाऊ- टिकाऊ और गद्दार-ख़ुद्दार जैसे चुनावी जुमलों के शोर में राजनीतिक दलों के पास ना कोई मुद्दा है और ना ही विजन। विधानसभा की 28 सीटों पर मुख्य मुकाबला कांग्रेस और भाजपा के बीच है तो कहीं-कहीं बसपा और सपा भी अपने वज़ूद के लिए ज़ोर आजमाइश करते नजर आ रहे हैं।
सही मायनों में उपचुनाव ग्वालियर और चंबल संभागों की उन 16 सीटों पर लड़ा जा रहा है जहां से राज्यसभा सदस्य और अब भाजपा के नेता ज्योतिरादित्य के समर्थक विधायकों ने भाजपा के साथ मिलकर कमलनाथ सरकार को गिराने में अहम रोल निभाया था। मुद्दे ना भाजपा के पास है और ना ही कांग्रेस के पास। लिहाजा दोनों ही दल एक दूसरे पर कमर के नीचे वार करने से भी नहीं चूक रहे हैं।


प्रदेश में जो चुनावी हालात बने हैं वह मतदाताओं को निराश भले ही करें लेकिन इन 16 सीटों में से एक दिमनी विधानसभा सीट ने “विकल्प” की उम्मीद जगाई है। चंबल संभाग के मुरैना जिले की इस विधानसभा सीट से चुनाव लड़ रहे जयंत तोमर बालिका शिक्षा, बीहड़ों को कॉरपोरेट्स से बचाने के लिए मतदाताओं के बीच अपनी बात रख रहे हैं। जयंत तोमर लोहियावादी नेता रघु ठाकुर की लोकतांत्रिक समाजवादी पार्टी के प्रत्याशी हैं। मूलतः पत्रकार जयंत तोमर एक निजी संस्थान में पत्रकारिता के छात्रों के शिक्षक हैं। इस चुनाव में उनके पास ना भीड़ है और ना भोंपू। उनके पास एक पर्चा है जिसे वह मतदाताओं को थमाते हैं और अपनी बात रखते हैं। इस पर्चे में दिमनी क्षेत्र की बालिकाओं के लिए स्कूल कॉलेज खोलने, चंबल के बीहड़ों को कॉरपोरेट्स से बचाने और क्षेत्र में कला संस्कृति को बढ़ावा देने की बात कही गई है।
जयंत तोमर कहते हैं, कांग्रेस और भाजपा दोनों की नीतियां एक जैसी हैं और इनमें आम आदमी के लिए कोई गुंजाइश नहीं है। लोसपा ने पूरे प्रदेश में सिर्फ इसी सीट पर अपना प्रत्याशी उतारा है। जयंत तोमर मतदाताओं से कहते हैं अगर वह चुनाव जीतते हैं तो शिक्षा और रोजगार के लिए आवाज़ उठाएंगे। हालांकि इस सीट पर धनबल, बाहुबल और जातीय समीकरण के लिए राजनीतिक दलों का अपना-अपना गणित है। इस सब के बावजूद जयंत तोमर का राग अलग ही है।
“मीडिया दरबार” से बातचीत में लोसपा नेता रघु ठाकुर सवाल उठाते हैं- आखिर विकल्प हीनता कब तक? मौजूदा राजनीति में वह सत्ता और विपक्ष को गूंगा-बहरा बताते हैं जो सिर्फ हाईकमान के इशारों पर काम करता है। आज गरीब किसान और बेरोजगार की आवाज उठाने की जरूरत है। वह कहते हैं हम दिमनी से इसकी शुरुआत कर रहे हैं। अलग मिजाज़ के इस चुनाव में जयंत तोमर के सवाल मतदाताओं पर कितना असर डालते हैं यह नतीजों के बाद पता चलेगा लेकिन वह इस बात से संतुष्ट हैं कि दिमनी का वोटर उनकी बात सुन जरूर रहा है।

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मीडिया दरबार के मॉडरेटर 1979 से पत्रकारिता से जुड़े हैं. एक साप्ताहिक से शुरूआत के बाद अस्सी के दशक में स्वतंत्र पत्रकार बतौर खोजी पत्रकारिता में कदम रखा, हिंदी के अधिकांश राष्ट्रीय अख़बारों में हस्ताक्षर. उसी दौरान राजस्थान के अजमेर जिले के एक सशक्त राजनैतिक परिवार द्वारा एक युवती के साथ किये गए खिलवाड़ पर नवभारत टाइम्स के लिए लिखी रिपोर्ट वरिष्ठ पत्रकार श्री मिलाप चंद डंडिया की पुस्तक "मुखौटों के पीछे - असली चेहरों को उजागर करते पचास वर्ष" में भी संकलित की गयी है. कुछ समय के लिए चौथी दुनियां के मुख्य उपसंपादक रहे किन्तु नौकरी कर पाने के लक्खन न होने से तेईस दिन में ही चौथी दुनिया को अलविदा कह आये. नब्बे के दशक से पिछले दशक तक दूरदर्शन पर समसामयिक विषयों पर प्रायोजित श्रेणी में कार्यक्रम बनाते रहे. अब वैकल्पिक मीडिया पर सक्रिय.
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