शिकायत करने वालों के खिलाफ एफआईआर का पैटर्न

शिकायत करने वालों के खिलाफ एफआईआर का पैटर्न

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-संजय कुमार सिंह।।
चिन्मयानंद के खिलाफ आरोप लगाने वाली पीड़िता अगर मुकर नहीं जाती तो क्या उसे न्याय मिलने की उम्मीद थी? इन मामलों को याद कीजिए। क्या यह एक पैटर्न नहीं है?

  1. अखलाक की हत्या हुई। घर के फ्रीज में गोमांस रखने की एफआईआर हुई। हत्या के अभियुक्तों को जो ईनाम मिले वह अलग है।
  2. उन्नाव की पीड़िता पर भी एफआईआर हुई थी – अभियुक्त भाजपा विधायक जेल में हैं। कैसे सबको पता है। भाजपा सांसद जेल जाकर उनसे मिल भी आए हैं। उस पर उम्र प्रमाणपत्र में फर्जीवाड़ा करने का आरोप था।
  3. गोरखपुर मेडिकल कॉलेज अस्पताल में बच्चों की मौत हुई – एफआईआर हुई डॉक्टर कफील पर। मामला आप जानते हैं। किसी और कार्रवाई की खबर है?
  4. जेएनयू में छात्र संघ अध्यक्ष आईशी पर हमला हुआ – एफआईआर उसी पर हुई। नाकबपोश हमलावर शर्मा जी की बिटिया का पता अभी तक नहीं चला। आपको कोई खबर है?
  5. इंस्पेक्टर सुबोध सिंह को गोली मारने वालों का स्वागत किया गया सबको पता है।
  6. मुख्यमंत्री बनने के बाद योगी आदित्य नाथ ने अपने खिलाफ मुकदमे हटाने की कार्रवाई शुरू की थी – आगे की खबर अखबारों ने दी? चिन्मयानंद के खिलाफ एक मामले में भी … उसपर मेरी कल की पोस्ट देखिए।
  7. हाथरस का मामला सबको पता है। लड़की मर गई पर बलात्कार नहीं हुआ इसका प्रचार किया जा रहा है। मृत्युपूर्व बयान भी नजरअंदाज करके। हालांकि उसपर केंद्र सरकार का निर्देश आया। नार्को टेस्क की जरूरत बताने के बाद!!
  8. भिडे के बारे में प्रधानमंत्री ने कहा था, “मैं भिडे गुरु जी का बहुत आभारी हूं क्योंकि उन्होंने मुझे निमंत्रण नहीं दिया बल्कि उन्होंने मुझे हुक्म दिया था। मैं भिडे गुरु जी को बहुत सालों से जानता हूं और हम जब समाज जीवन के लिए कार्य करने के संस्कार प्राप्त करते थे तब हमारे सामने भिडे गुरु जी का उदाहरण प्रस्तुत किया जाता था।” – (बीबीसी की खबर) अब आप भीमा कोरेगांव मामले की ‘साजिश’ का पर्दाफाश अभी तक जारी रहने का कारण समझ सकते हैं।
  9. रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह पहले कह चुके हैं कि उनकी सरकार में इस्तीफे नहीं होते। मंत्री बनाना प्रधानमंत्री का विशेषाधिकार है पर उसमें गृहमंत्री पद के लिए पूर्व तड़ी पार को चुनना और दागियों को मंत्री बनाना भी एक पैटर्न है। उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री पद के लिए योगी आदित्यनाथ का नाम कैसे उभरा सबको पता है। पूर्व रेल राज्य मंत्री मनोज सिन्हा रह गए थे उनका पुनर्स्थापन – सबको पता है। देर हुई और उनपर आपराधिक मामले शायद नहीं है। यह संयोग है या प्रयोग इसपर फिर कभी।

About Post Author

Sanjaya Kumar Singh

छपरा के संजय कुमार सिंह जमशेदपुर होते हुए एनसीआर में रहते हैं। 1987 से 2002 तक जनसत्ता में रहे और अब भिन्न भाषाओं में अनुवाद करने वाली फर्म, अनुवाद कम्युनिकेशन (www.anuvaadcommunication.com) के संस्थापक हैं। संजय की दो किताबें हैं, ‘पत्रकारिता : जो मैंने देखा जाना समझा’ और ’जीएसटी – 100 झंझट’।
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