गणेश की सर्जरी से लेकर हवा से पानी निकालने तक का आइडिया..

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पहले गणेश जी की गर्दन से “सर्जरी” वाली टेक्निक सुझाई। फिर नाले की गैस से चाय बनाने की विधि बताई।। अब हवा में से ऑक्सीजन निकालने की विधि बता रहे हैं।।।

-श्याम मीरा सिंह।।

ऐसा नहीं है कि ऐसी मूर्खताएं पहले नहीं थीं। लेकिन पहले ये बातें सिर्फ व्हाट्सएप फॉरवर्ड पर हुआ करती थीं। वहीं रह जाती थीं। लेकिन अब इस मूर्खता का नेशनलाइजेशन हो रहा है। जिसे हिंदी में राष्ट्रीयकरण कहते हैं। जहां मूर्खता अब सरकारी हो गई है। सरकार ने मूर्खता का अधिग्रहण कर लिया है। पूरी दुनिया में दो तरह के देश हैं एक वे जिनका नेता मूर्ख है, मगर जनता समझदार है। दूसरे वे जिनका नेता समझदार है जनता मूर्ख है। लेकिन भारत चूंकि विरला देश है इसलिए यहां तीसरे किस्म की नस्ल पैदा की गई है जिसे मूर्ख कहने पर मूर्खता भी मानहानि का केस लगा सकती है। आरएसएस ने पहले ऐसी नस्ल पैदा की, पहले ऐसे मूर्ख भक्त पैदा किए, फिर इसी लेवल के एंकरों की भर्ती कराई। जिन्होंने नोटों में चिप होने वाली बात तक कह डाली। अपने मूर्खतापूर्ण साम्राज्य को बढाने के लिए आरएसएस ने मीडिया के एंकरों से लेकर विश्वविद्यालय स्तर पर मूर्खों की भर्ती करवाई। अब चारो ओर मूर्खता अपने चरम पर है। चूंकि मूर्खता अब बहुमत में आ गई है तो आरएसएस ने उन्हीं के स्तर का एक प्रधानमंत्री दिया है। इसलिए भारत तीसरी केटेगरी का विरला देश है जहां बहुसंख्यक जनता और उसके नेता का लेवल एकदम मैच करता है।

लेकिन सोचने वाली बात है, पूरी दुनिया कहाँ से कहाँ बढ़ गई, हमने एक प्रधानमंत्री तक ढंग का नहीं चुना। मतलब 135 करोड़ लोगों में नरेंद्र मोदी जैसे अयोग्य आदमी को प्रधानमंत्री चुन लिया। हम बात नालंदा, तक्षशिला की करते हैं, प्रशंसा वैदिक ज्ञान की करते हैं, चर्चा आर्यभट्ट और बाणभट्ट की करते हैं लेकिन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जैसा औसत दर्जे से भी नीचे का आदमी चुन लेते हैं। बात शिक्षा के स्तर की नहीं है बात मूर्खता के सार्वजनिक प्रदर्शन की है, उसके वैधीकरण की है।

राजनीति होती रहेगी, सरकारें आएंगी जाएंगी, लेकिन आरएसएस जिस तरह इस देश की वैज्ञानिक सोच को खत्म कर रहा है वह इस देश को वर्षों के लिए मानसिक गुलाम बना सकता है। अगर आपको इस देश से प्यार है तो इस देश की वैज्ञानिक सोच खत्म करने वालों को पहचान लीजिए।

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