हमाम में सब नंगे हैं , एक दूसरे पर उंगली उठा रहे हैं, आइना दिखा रहे हैं..

हमाम में सब नंगे हैं , एक दूसरे पर उंगली उठा रहे हैं, आइना दिखा रहे हैं..

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-अमिताभ श्रीवास्तव।।

बिल्ली के भाग्य से छींका फूटने की तर्ज पर मुंबई पुलिस आज रिपब्लिक टीवी से लगातार पिट रहे तमाम चैनलों की संकटमोचक बन कर उभरी । आज ही टी आर पी का ताज़ा आंकड़ा आया है और आज तक हाथरस काण्ड की शुरुआती तेज़तर्रार रिपोर्टिंग के बावजूद नंबर दो पर ही रह गया है। दो महीने से नंबर दो के पायदान पर लुढ़का पड़ा आजतक अर्णव गोस्वामी से बुरी तरह पिट कर बिलबिला रहा था। अर्णव गोस्वामी पिछले कुछ महीनों से सुशांत सिंह राजपूत की मौत में साज़िश का एंगल खोजते हुए अपने स्टूडियो में बैठ कर रोज़ शाम अपने मीडिया प्रतिद्वंद्वियों पर वाहियात छींटाकशी करने के अलावा ओए उद्धव ठाकरे , ओए संजय राउत , बेबी पेंगुइन चिल्ला रहे थे , चुनौती दे रहे थे , मुंबई पुलिस को गाली दे रहे थे, परमबीर सिंह को नाम ले ले कर कोस रहे थे। ज़ाहिर है राज्य सरकार और मुंबई की पुलिस पर बेवजह उंगली उठाने का खामियाज़ा उन्हें भुगतना ही था , जो बिलकुल सही है।
कंटेंट के मामले में रिपब्लिक के ही हमराह हिंदी चैनल और अंग्रेजी चैनल भी अब अपनी चादर बेदाग होने का दावा करें तो उसे हास्यास्पद और ढोंग ही मानना चाहिए।


अर्णव गोस्वामी राष्ट्रवादी पत्रकारिता का चमकदार महानगरीय चेहरा है, कैम्ब्रिज ब्रांड अंग्रेजी बोलने वाला , डिजिटल इंडिया वाला। देश के लिए लड़ने का दावा करने वाला। हकीकत ये है कि ये देश के लिए लड़ने का नहीं, समाज को लगातार बांटने का काम कर रहे हैं । इन जैसों को पत्रकारिता का उज्ज्वल रोल मॉडल मानने वाले समाज को भी अपने पैमानों के बारे में सोचने की ज़रुरत है। सुदर्शन न्यूज़ और सुरेश चव्हाणके इसके आगे बहुत बेचारा लगता है। आज तक सारे धतकरम करके भी साफ़सुथरा दिखने का पाखंड करता है जो और भी निंदनीय है।
मीडिया के बड़े हिस्से ने सुशांत राजपूत मामले में रिया चक्रवर्ती के खिलाफ लगातार तीखा दुर्भावनापूर्ण अभियान चलाया । चैनलों की चर्चाओं के ज़रिये फिल्म इंडस्ट्री के तमाम प्रतिनिधियों की तरफ से भी उस पर तरह-तरह के आरोप लगे। रिपब्लिक चैनल ने रिया के खिलाफ दुर्भावनापूर्ण अभियान चलाया। आजतक ने रिया का इंटरव्यू तो दिखाया लेकिन चैनल पर हुई बहसों के स्वर उसको कटघरे में ही खड़ा करते रहे।‌
पिछले कुछ बरसों की इलेक्ट्रॉनिक मीडिया की पत्रकारिता ने यह बात आईने की तरह साफ़ कर दी है कि कुछेक अपवादों को छोड़कर मुख्यधारा के तमाम हिंदी-अंग्रेजी टीवी चैनल , उनके संपादक , एंकर- रिपोर्टर सरकारपरस्ती के साथ-साथ दुर्भावना के तहत देश-समाज में घृणा, अशांति फ़ैलाने के विघटनकारी एजेंडे के तहत काम करते हैं। असल में देशद्रोही अगर कोई है तो वह इस देश का तथाकथित मुख्यधारा का मीडिया और उसके संचालक लोग हैं।

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