डरपोक सरकार ट्रैक्टर रैली से भी डरी..

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नए कृषि कानूनों को लेकर कांग्रेस का विरोध-प्रदर्शन जारी है। पिछले दो दिनों से राहुल गांधी ने जिस तरह पंजाब में ट्रैक्टर रैली निकाली और हजारों किसानों का समर्थन उन्हें प्राप्त हुआ, उससे यह साफ नजर आ रहा है कि किसान सरकार के फैसले से खुश नहीं हैं। सरकार भले उन्हें समझाने के लिए अंग्रेजी अखबारों में बड़े-बड़े विज्ञापन दे दे, उन्हें अपनी आय दोगुनी करने का ख्वाब दिखाए, उन्हें ये समझाए कि एमएसपी खत्म नहीं हो रही है, बल्कि अब वे देश में जहां चाहे, जिस कीमत पर चाहें अपना उत्पाद बेच सकते हैं। लेकिन किसानों पर सरकार की इन लचर दलीलों का कोई फर्क नहीं पड़ रहा। वे लगातार आंदोलनरत हैं, खासकर उन इलाकों में जहां कृषि मंडियां काफी प्रभावी हैं। पंजाब और हरियाणा में तो इन कानूनों के प्रस्ताव के वक्त से ही मुखालफत शुरु हो गई थी और नौबत अकाली दल के भाजपा का साथ छोडऩे तक आ पहुंची। मोदी सरकार फिर भी अपने फैसले पर अडिग हैं। प्रधानमंत्री से लेकर कृषि मंत्री तक इन कानूनों के फायदे गिना रहे हैं, लेकिन विरोधी उनसे संतुष्ट नहीं हैं।

कांग्रेस ने संसद में भी इन विधेयकों के कानून बनने का विरोध किया था और अब राहुल गांधी किसानों के साथ सड़क पर उतर कर आंदोलन कर रहे हैं। उनके तेवर शायद भाजपा को डरा रहे हैं। इसलिए पंजाब में रैली निकालने के बाद जब वे हरियाणा पहुंचे तो वहां उनका प्रवेश निषिद्ध कर दिया गया। खट्टर सरकार पहले ही कह चुकी थी कि राहुल गांधी की रैली को उनके राज्य में आने की इजाजत नहीं दी जाएगी। इन पंक्तियों के लिखे जाने तक राहुल गांधी अपने काफिले के साथ पंजाब-हरियाणा की सीमा पर धरने पर बैठे हुए हैं। मुमकिन है, यहां भी उन्हें पुलिस की सख्ती देखनी पड़े या कि हिरासत में जाना पड़े। अभी इसी सप्ताह यही सब वे दिल्ली-उत्तरप्रदेश सीमा पर झेल चुके हैं और अपने साथ हुई धक्का-मुक्की पर भी उन्हें कोई ऐतराज नहीं है।

उनका कहना है कि क्या हुआ जो मुझे धक्का दिया गया, हमारा काम देश को बचाना है।  वैसे जिस तरह से भाजपा सरकारें और नेता राहुल फोबिया से ग्रसित हैं, उससे मुमकिन है अभी उन्हें कई भाजपा शासित राज्यों में इसी तरह पुलिसिया जबरदस्ती या प्रवेश निषिद्ध के आदेश से दो-चार होना पड़े। राहुल गांधी की इस रैली में किसान जिस तरह एकजुटता दिखा रहे हैं, उससे भाजपा परेशान है। इसलिए एक बार फिर असल मुद्दे से ध्यान भटकाने की कोशिश की जा रही है।

केन्द्रीय मंत्री स्मृति ईरानी ने उनकी ट्रैक्टर रैली पर तंज कसा कि ट्रैक्टर पर गद्देदार सोफा लगाकर बैठने वाले राहुल गांधी किसानों का दर्द नहीं समझ सकते हैं। मंत्री महोदया को ये याद रखना चाहिए कि किसी का दर्द समझने के लिए संवेदनशील हृदय की जरूरत होती है, फिर चाहे आप चटाई पर बैठें या गद्दे पर, फर्क नहीं पड़ता। एक पत्रकार ने भी राहुल गांधी से यही सवाल किया, जिसका माकूल जवाब उन्होंने दिया कि प्रधानमंत्री ने आठ हजार करोड़ के दो विमान अपने लिए खरीदे हैं, उन पर कोई सवाल क्यों नहीं पूछता। यह सही है कि इस वक्त जबकि देश की अर्थव्यवस्था बुरी तरह चरमरा चुकी है, सरकार खुद खर्चों में कटौती की बात कर रही है, सांसद निधि में कटौती जैसे फैसले सरकार ने लिए हैं, लेकिन सेंट्रल विस्टा का आलीशान प्रोजेक्ट या हजारों करोड़ का विमान जैसी विलासिताओं पर सरकार रोक नहीं लगा रही है। 

पंजाब की रैली में राहुल गांधी ने जो बातें कहीं हैं, उससे जाहिर होता है कि ये मात्र विरोध के नाते विरोध नहीं है, बल्कि कुछ वाजिब सवाल हैं, जिनके जवाब सरकार को देना चाहिए। राहुल गांधी ने देश को नोटबंदी और जीएसटी के फैसलों की विफलताओं की याद दिलाई और कहा कि अगर इन कानूनों से फायदा होता तो फिर संसद में डिबेट क्यों नहीं करवाई,  अगर फायदा है तो कोरोना के वक्त ही क्यों पास किया। अगर मंडियां बंद होंगी, तो उनमें काम करने वालों का क्या होगा। राहुल गांधी ने कहा कि मंडी और पीडीएस के सिस्टम में जो कमियां हैं, उन्हें सुधारने और मजबूत करने की जरूरत है।

एमएसपी पर गारंटी देने की जरूरत है। उनकी उठाई इन आपत्तियों पर सरकार कोई जवाब देती है या नहीं ये देखने वाली बात है। वैसे किसानों की भी यही मांग है कि एमएसपी के लिए सरकार कानून ले जाए, लेकिन सरकार ऐसा नहीं कर रही है। देश में रोजगार के अवसर सरकार ने पहले ही कम कर दिए हैं। उद्योगों की हालत खस्ता है, तो वहां भी नौकरियां खत्म होती जा रही हैं। और श्रम कानून अब इस तरह का हो गया है जिसमें अधिकतर चीजें मालिकों-नियोक्ताओं के हक में हैं और कर्मचारियों के शोषण की आशंकाएं बढ़ गई हैं। अब यही स्थिति कृषि क्षेत्र में भी हो जाएगी, क्योंकि एक देश एक बाजार होने से बड़े-संपन्न किसानों का लाभ होगा, जो अधिकतर बड़े उद्योगपति ही होते हैं।

ये किसाननुमा उद्योगपति-व्यापारी कृषि उपज का दाम पहले ही तय कर लेंगे, किसान से उसका सौदा भी दबाव डालकर कर लेंगे और देश को अपना निजी बाजार बनाकर जी भर के मुनाफा कमाएंगे, जबकि किसान अपनी ही जमीन पर मजदूर बन कर रह जाएगा। यही किसानों का सबसे बड़ा डर है, लेकिन मोदी सरकार उन्हें बिचौलियों का डर दिखलाकर अपने कानून को सही बताना चाह रही है। अगर बिचौलियों के कारण शोषण हो रहा है, तो उस शोषण को खत्म करने की तरकीबें ढूंढनी चाहिए, न कि पूरी व्यवस्था को।

राहुल गांधी ट्रैक्टर पर किस गद्दी पर बैठे हैं, इस पर ध्यान देने की जगह भाजपा को ये ध्यान देना चाहिए कि वह देश की सत्ता की गद्दी पर बैठी है, जिसकी प्रतिबद्धताएं आम जनता के लिए होनी चाहिए।

{देशबन्धु)

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