SC में योगी सरकार घटिया स्क्रिप्ट के सहारे गुड़िया कांड को ट्विस्ट दे पाएगी.?

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-सुनील कुमार।।
हाथरस में दलित युवती के साथ गैंगरेप के बाद उसे बुरी तरह जख्मी किया गया था जिससे अस्पताल में उसकी मौत हो गई थी। रात में ही पुलिस ने दिल्ली के अस्पताल से उसकी लाश ले ली थी, और उसके गांव ले जाकर घरवालों के कड़े विरोध के बावजूद खुद ही उसका अंतिम संस्कार कर दिया था। अब जब सुप्रीम कोर्ट इस मामले में एक जनहित याचिका पर सुनवाई कर रहा है तो उत्तरप्रदेश सरकार वहां पर एक ऐसी फिल्मी कहानी सुना रही है जैसी इंदिरा गांधी ने इमरजेंसी लगाने के लिए उसके पहले सुनाई थी। इंदिरा गांधी ने भारत में अस्थिरता पैदा करने के लिए विदेशी ताकतों की साजिश की बात कही थी, और इसके पीछे विदेशी हाथ बताया था। आज यूपी के भाजपाई मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की सरकार अदालत को कुछ वैसी ही कहानी सुना रही है।

आज सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में कहा कि इस युवती का अंतिम संस्कार रात में इसलिए किया गया क्योंकि युवती और आरोपी, दोनों के समुदायों के लाखों लोग राजनीतिक कार्यकर्ताओं के साथ उसके गांव में इकट्ठा होंगे जिससे कानून व्यवस्था को लेकर बड़ी समस्या हो जाती। सरकार ने अदालत से कहा कि जातिगत विभाजन से उत्पन्न संभावित हिंसक स्थिति के अलावा दाह संस्कार जल्दी करने के पीछे कोई बुरा इरादा नहीं हो सकता।

उत्तरप्रदेश सरकार का यह हलफनामा पता नहीं सुप्रीम कोर्ट के जजों को कितना जंचेगा, हमको पहली नजर में यह फर्जी तर्कों से भरा हुआ एक गुब्बारा दिख रहा है जिसका वजन हवा के गुब्बारे जितना भी नहीं लग रहा। जिन लाखों लोगों के इकट्ठा होने की खुफिया सूचना की बात यूपी सरकार ने की है, उनमें से कुछ सौ लोग अगले दिन बलात्कार के आरोपियों के हिमायती होकर वहां के शायद एक भाजपा विधायक के घर पर इकट्ठा हुए थे, और पुलिस घेरे में बैठकर दलित परिवार को धमकियां देते हुए ऊंची कही जाने वाली जाति के एक नौजवान का वीडियो चारों तरफ घूम रहा है। इसके अलावा कोई तनाव वहां अभी तक नहीं हुआ है, बल्कि जिले की सरहद पर भी बाहर से मीडिया या चुनिंदा नेताओं-सांसदों के अलावा कोई पहुंचे हों ऐसी भी कोई खबर नहीं है।

यूपी सरकार के खिलाफ जो भी वकील वहां खड़े होंगे, वे इस बात को सामने रखें या नहीं, हमारी जैसी साधारण कानूनी समझ वाले लोगों को भी यह बात सूझ रही है कि हड़बड़ी में बंदूक की नोंक पर रातों-रात अंतिम संस्कार करने के पीछे सरकार की बहुत साफ बदनीयत यह थी कि उस लडक़ी का दुबारा पोस्टमार्टम न हो सके। पहले के पोस्टमार्टम के नमूने इकट्ठे करने में यूपी पुलिस ने कानून में निर्धारित समय के मुकाबले चार गुना अधिक समय लगाया ताकि बलात्कार के सुबूत ही जांच में न मिल सकें। इसके बाद यूपी पुलिस का एक सबसे बड़ा अफसर प्रेस कांफ्रेंस लेकर यह तर्क देता है कि उस लडक़ी के बदन से चूंकि वीर्य नहीं मिला, इसलिए उसके साथ बलात्कार नहीं हुआ। यह बात नहीं है कि उस पुलिस अफसर को इतनी कानूनी अक्ल नहीं थी, या इतनी कानूनी जानकारी हासिल नहीं थी कि बलात्कार को मानने के लिए किसी भी मेडिकल जांच की जरूरत नहीं है, बस लडक़ी का बयान काफी था। इसके बावजूद बलात्कार की शिकार इस लडक़ी का अपमान करते हुए, दलित समाज का अपमान करते हुए, घायल और दुखी परिवार को और चोट पहुंचाते हुए इस अफसर ने ऐसा घटिया और गंदा बयान दिया, सोच-समझकर दिया, और मीडिया का जो बड़ा हिस्सा इस बदनामी से यूपी सरकार को बचाने में लगा हुआ है उसने हाथोंहाथ इस बयान को लपका, और इसे दिखाते रहा।

अब जब पुलिस और सरकार इस मामले में बहुत बुरी तरह घिर चुके हैं, जब कांग्रेस पार्टी के राहुल और प्रियंका यूपी जाकर, पुलिस का सामना करके, उसकी धक्का-मुक्की झेलकर दुखी दलित परिवार में हमदर्दी दिखाकर लौट चुके हैं, देश के सोशल मीडिया के एक बड़े तबके में राहुल-प्रियंका की तारीफ हो रही है, तब यूपी सरकार डैमेज कंट्रोल की नीयत से एक नई साजिश की कहानी रचने में लग गई है। अब एक किसी फर्जी वेबसाईट का हवाला देते हुए यह कहानी गढ़ी जा रही है कि इस्लामी देशों के आतंकी संगठन इस मामले को लेकर यूपी सरकार पलटने के लिए साजिश रच रहे थे, और यूपी की पुलिस ने इस साजिश को पकड़ लिया है। ऐसी कहानी किसी छोटे बच्चे को भी भरोसा नहीं दिला पाएगी कि अनगिनत मुस्लिम लड़कियों या महिलाओं से बलात्कार, अनगिनत मुस्लिम हत्याओं के बाद भी ऐसे किसी इस्लामी आतंकी संगठन को यूपी सरकार पलटने की जरूरत नहीं लगी थी, और आज एक दलित लडक़ी की बलात्कार-हत्या पर इस्लामी आतंकी संगठन इतने विचलित हो गए हैं कि वे इसकी वजह से यूपी सरकार पलटने की आतंकी साजिश रच रहे हैं। दुनिया में ऐसे कौन से आतंकी संगठन है जो कि सरकार को पलटने की साजिश रचने के लिए ऐसी वेबसाईट बनाते हैं? और कौन से आतंकी संगठन है जिनका भरोसा सरकार को पलटने में होता है? देश के भीतर के नक्सली-संगठनों से लेकर अलकायदा और आईएएस तक कौन सा संगठन इतना बेवकूफ है कि वह यूपी की सरकार को पलटने की सोचेगा।

अब यह सुप्रीम कोर्ट पर है कि उसे ऐसी घटिया फिल्मी कहानी सरकार के जुर्म माफ करने लायक लगती है या नहीं जिस पर बॉलीवुड में भी योगी सरकार के प्रशंसक कोई फिल्म बनाने का दुस्साहस नहीं कर पाएंगे। यह सिलसिला योगी सरकार की गलतियों और गलत कामों दोनों को बढ़ाते चल रहा है। जब देश के सबसे बड़े प्रदेश का सबसे ताकतवर मुख्यमंत्री, अपनी पार्टी की केन्द्र सरकार के रहते हुए, देश में अपनी पार्टी सबसे ताकतवर रहते हुए भी ऐसी अधकचरी हरकतों में अपने अफसरों के साथ जुट गया है, तो वह और बड़ी शर्मिंदगी लेकर आने की बात है। सरकार ने तो यह बलात्कार किया नहीं था, आरोपों के मुताबिक ऊंची कही जाने वाली जाति के चार युवकों ने एक दलित युवती के साथ इसे किया था। यूपी सरकार के लिए समझदारी की बात यही हुई होती कि वह इसे अपनी एक नाकामयाबी मान लेती, और कड़ी कार्रवाई करती। उससे उस पर से आगे की तोहमतें तो नहीं आई होतीं। लेकिन जिस तरह पिघले गुड़ मेें फंस गई मक्खी निकलने के चक्कर में अपने आपको और फंसाते चलती है, उसी तरह यूपी की योगी सरकार इस दलदल में और गहरे धंसते जा रही है। इससे देश भर में दलितों के बीच एक अलग भावनात्मक ध्रुवीकरण की नौबत भी आई है, और यह भी नहीं कहेंगे कि भाजपा को इसके खतरे का बिल्कुल अहसास नहीं है। आने वाले दिनों में जख्मी दलितों का ध्रुवीकरण किस तरह चुनावी नतीजों को प्रभावित करता है यह तो देखने की बात रहेगी, लेकिन हम चुनाव से परे भी इंसानियत के नाते योगी सरकार को सुझाना चाहते हैं कि वह जख्मी परिवार और जख्मी बिरादरी के साथ तोहमतों के मार्फत बलात्कार जारी न रखे, और इंसानियत दिखाए।

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