भाजपा ना बलात्कार रोक पाती है ना विरोध करती है

भाजपा ना बलात्कार रोक पाती है ना विरोध करती है

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अपने विरोध का मुकाबला करने के लिए प्रचारकों से ऐसे काम करवाती है..
वह दिन दूर नहीं है जब बलात्कार के विरोध को राष्ट्रविरोध करार दिया जाएगा..

-संजय कुमार सिंह।।

इस तालिका में यह आरोप लगाया गया है और अगर यह सही भी है तो ऐसा करने में गलत क्या है? इसे प्रचारित करने का क्या मतलब है? इसमें ‘बताया’ गया है कि उदारवादी बलात्कार को कैसे देखते हैं। जैसे हजारों बलात्कार हों तो उदारवादियों को रोज सड़क पर सिपाहियों से मार खाना चाहिए। सरकार ना बलात्कार रोकेगी ना लाठी भांजने वाले अपने सिपाहियों को। इस तालिका के अनुसार बलात्कार हुआ तो पीड़िता का धर्म देखते हैं। अगर पीड़िता हिन्दू हुई तो क्या करते हैं और मुस्लिम हुई तो क्या करते हैं। (करते दोनों में हैं इसे नहीं बताकर दूसरी बात की जा रही है)।

इसमें बताया गया है कि हिन्दू हुई तो देखेंगे कि दलित है अथवा अन्य जाति की। अगर दलित हुई तो ब्राह्मणों पर आरोप लगाएंगे। दमन को दोषी ठहराएंगे, जय भीम का नारा लगाएंगे और मोदी आरएसएस भाजपा पर आरोप लगाएंगे। आप जानते हैं कि पिछले कुछ समय में बलात्कारी और बलात्कार की कोशिश करने वाले कई भाजपाई-भाजपा समर्थक निकले हैं, उन्हें सरकारी समर्थन मिला है फिर भी यह दावा किया जा रहा है। चंडीगढ़ में तो एक भाजपाई अपनी सहेली की तीसरी मंजिल के गर से कूद गए थे। हालांकि, वह बलात्कार नहीं था।

इसमें आगे बताया गया है कि पीड़िता अगर दूसरी जाति की हुई तो देखा जाता है कि राज्य में भाजपा की सरकार है कि नहीं। अगर नहीं हुई तो नजरअंदाज कर दिया जाता है। मेरा मानना है कि अगर कर भी दिया जाता हो तो विरोध भाजपा को करना चाहिए। ढूंढ़ कर करना चाहिए खूब करना चाहिए ताकि बलात्कार रुके। ऐसा नहीं है कि भाजपा सिद्धांत रूप में यह सब नहीं कहती है। निर्भया मामले में नरेन्द्र मोदी ने जो कहा किया सबको याद है। चूंकि भाजपा और नरेन्द्र मोदी ने बड़े-बड़े दावे किए थे (और वो वीडियो में हैं) इसलिए भाजपा सरकार हो तो अपेक्षा की जाती है कि वहां बलात्कार न हो और हो तो कार्रवाई हो। भाजपा को अब इसपर भी एतराज है?

अंत में इसमें यह भी कहा गया है कि अगर भाजपा शासित राज्य में बलात्कार हो और पीड़िता दलित न होकर किसी और जाति की हो तो कानून व्यवस्था पर आरोप लगाया जाता है (जैसे वह निराधार होता है), मुख्यमंत्री से इस्तीफा मांगा जाता है (जैसे दे ही देते हों) और मोदी, अमित शाह आरएसएस पर आरोप लगाया जाता है। जैसे वो प्रभावित होते हों और कुछ करते हों जिससे बलात्कार रुके या कम हो।

मुझे नहीं पता इसे किसने बनाया है और उसका मकसद यही है। पर एक भक्त मित्र ने इसे साझा किया है और इसमें रेप को अलग रंग में इनवर्टेड कॉमा में लिखकर पता नहीं क्या बताने समझाने की कोशिश की गई है। अमूमन तो हर बलात्कार, बलात्कार है और ना जाति, धर्म, उम्र या बलात्कारी या उसकी जाति धर्म के लिहाज से उसे अलग किया जा सकता है। फिर भी भारत में इन दिनों बलात्कार का विरोध सरकार का विरोध तो मान ही लिया गया है अगर भक्तों की ऐसे ही चलती रही तो वह दिन दूर नहीं है जब बलात्कार के विरोध को राष्ट्रविरोध करार दिया जाए।

बलात्कार का विरोध करने वालों, इसके खिलाफ हंगामा करने वालों को अलग करने का और क्या मतलब हो सकता है? इसे एक भक्त मित्र ने साझा किया है इसलिए यह माना जा सकता है कि भाजपा के समर्थक इसे सही मानते हैं या ऐसा कहना चाहते हैं। उसी मित्र ने एक और पोस्ट शेयर किया है जिसमें बताया गया है कि दुनिया भर में आबादी के लिहाज से बलात्कार के मामले कितने प्रतिशत होते हैं और भारत में कितने हैं। जाहिर है वह कम है और इसीलिए शेयर किया गया है वरना डाटा होता कहां है?

दोनों ही बातों का कोई मतलब नहीं है। यानी यह कहना कि आबादी के प्रतिशत के लिहाज से विदेशों में ज्यादा बलात्कार होते हैं इसलिए भारत में कम है और सरकार का विरोध गलत है – कहने का कोई मतलब नहीं है। इसी तरह यह कहने का कोई मतलब नहीं है कि कुछ लोग सिर्फ भाजपा शासित राज्यों में कुछ खास वर्ग के बलात्कार के मामले में बोलते हैं। मेरा मानना है कि वे अपने सामान्य काम से हट कर बलात्कार के कुछ मामलों में तो बोलते हैं। और जाहिर है कुछ तो करते हैं। और उन लोगों से तो बेहतर हैं जो कुछ नहीं करते या सरकार की नालायकी का समर्थन करते हैं या पार्टी देखकर चुप रहते हैं।

यह दिलचस्प है कि भाजपा का समर्थन करने के लिए बलात्कार का समर्थन किया जाए या उसे कम महत्वपूर्ण करार दिया जाए या विरोधियों को कहा जाए कि वे सत्तारूढ़ दल या बलात्कारी या बलत्कृत को देखकर विरोध करते हैं। अव्वल तो एक नागरिक के रूप में हमें यही मानना और अपेक्षा करना चाहिए कि कोई भी सरकार हो, बलात्कार का एक भी मामला न हो। अगर हो तो उचित कार्रवाई तुरंत बिना किसी मांग के सामान्य तौर पर की जाए और बलात्कारी को कानून सम्मत सजा मिले।

सरकार किसी भी पार्टी की हो अगर वह उचित कार्रवाई नहीं करे तो उसका विरोध किया जाए। मान लीजिए आम आदमी के विरोध से सुनवाई नहीं होती है और वह सरकार विरोधी या उसे जिसका समर्थन मिल सकता है उस पार्टी का समर्थन ले या सरकार का विरोध करने वाली पार्टी सरकार का विरोध कर – इसमें गलती क्या है? और किसने किसी पार्टी को किसी राज्य में बलात्कार का विरोध करने से रोका है? अगर कांग्रेस शासित राज्यों में बलात्कार होता है और सरकार काम नहीं करती है तो भाजपा और भाजपा के समर्थक उसका विरोध क्यों नहीं करते हैं? यह क्यों कहते हैं कि कांग्रेस इसका विरोध कर रही है, उसका नहीं कर रही है।

कांग्रेस तुम्हारा विरोध कर रही है तुम उसका करो। किसने रोका है? पर ये रोना तो यही बताता है कि सरकार में हैं (जहां) तो बलात्कार रोक नहीं सकते और विपक्ष में हैं तो (वहां बलात्कार का) विरोध नहीं कर सकते। जाहिर है यह पार्टी की घोषित नीति नहीं है पर बलात्कार के मामले में जो होता है उससे तो यही लगता है। और अघोषित रूप से यह अपेक्षा है कि हम तुम्हारे मामले में नहीं बोलें और तुम हमारे मामले में न बोलो। यह मिल बांट कर खाने के अलावा भी कुछ हो सकता है? अगर आपको सत्ता का फल खाना बुरा लगता है तो सरकारी खर्चे पर निजी उपयोग के लिए विमान खरीदने को फल खाना मत मानिए।

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